











































प्रतीकात्मक चित्र
लखनऊ। देश को वर्ष 2025 तक क्षय रोग यानि टीबी मुक्त बनाने के प्रधानमंत्री के आह्वान के मद्देनजर अब प्रदेश के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को इस अभियान में शामिल किया जा रहा है। इन सेंटर पर टीबी मरीजों की पहचान से लेकर जांच व इलाज तक की व्यवस्था की गई है।
23 अगस्त से 30 सितंबर तक इन सेंटर (Health and wellness centers of UP) पर विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से टीबी के मरीज खोजे जाएंगे और उनका इलाज किया जाएगा। पूरे अभियान में प्रदेश में तीन लाख सैंपल जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन (National Health Mission) निदेशक की ओर से प्रदेश के सभी डीएम और सीएमओ को जारी पत्र के मुताबिक आशा कार्यकर्ता (ASHA workers) अपने क्षेत्र में भ्रमण कर ऐसे समस्त संभावित मरीजों की पहचान करेंगी और एएनएम (ANM) के माध्यम से मरीज का सैंपल लेकर नजदीकी जांच केन्द्र पर जांच कराई जाएगी। इसके अलावा जो व्यक्ति खुद अपनी जांच कराना चाहता है उसे जांच केन्द्र पर रेफर किया जाएगा।
जारी पत्र के अनुसार कम्युनिटी हेल्थ अफसर (CHO) अपने क्षेत्र की गतिविधियों के संपादन के लिए जिम्मेदार होंगे। उन्हें तीन उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का चयन करना होगा। ये क्षेत्र होंगे- जहां विगत दो वर्षों में अधिक क्षय रोगी (TB patients) अथवा कोविड मरीज (Covid patients) मिले हों और जो क्षेत्र आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से दूरस्थ क्षेत्र हों।
सीएचओ इन क्षेत्रों में हफ्ते में एक बार कैंप भी लगवाएंगे। इसलिए जिसको भी दो हफ्ते से अधिक समय से खांसी आ रही हो, बुखार बना हो, वजन गिर रहा हो, रात को सोते समय पसीना आता हो, भूख न लगती हो वह लोग सेंटर पर पहुंचकर टीबी की जांच जरूर कराएं।
उपचार पर रखे गए टीबी मरीजों को इलाज के दौरान पोषण (nutrition to TB patients) के लिए 500 रुपए प्रतिमाह निक्षय पोषण योजना के तहत सीधे बैंक खाते में भेजे जाते हैं। इसके लिए टीबी मरीजों के बैंक खाता का विवरण एवं पहचान पत्र सीएचओ/आशा द्वारा सम्बन्धित एसटीएस को उपलब्ध कराया जाएगा।
टीबी को मात देकर स्वस्थ हुए लोगों में से चयनित टीबी चैम्पियन (TB champions) लोगों को अपने अनुभव के आधार पर बताएँगे कि टीबी के लक्षण नजर आएं तो जाँच जरूर कराएँ। समय से जाँच और उपचार से टीबी को बहुत जल्दी मात दिया जा सकता है।
बस ध्यान यह रखना है कि दवा का पूरा कोर्स करना है क्योंकि बीच में दवा छोड़ने से वह गंभीर रूप ले सकती है और उसका इलाज लंबा चल सकता है। इसके अलावा सीएचओ क्षेत्र के स्कूलों में हर हफ्ते क्षय रोग पर गोष्ठी आदि आयोजित कर क्षय रोग के प्रति जागरूकता फ़ैलाने का भी काम करेंगे।







हुज़ैफ़ा अबरार August 24 2026 0 28
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 7994
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 1939
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 1694
हुज़ैफ़ा अबरार August 08 2026 0 1582
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 7994
एस. के. राणा January 20 2026 0 5271
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 5173
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 5082
एस. के. राणा February 01 2026 0 4907
एस. के. राणा January 13 2026 0 4781
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4725
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87183
सौंदर्या राय April 08 2022 0 35169
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38272
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35763
लेख विभाग March 19 2022 0 35392
सौंदर्या राय March 16 2022 0 73001
बच्चों में अस्थमा के लक्षणों में शामिल है - खांसी जो दूर नहीं होती है, खांसी जो वायरल संक्रमण के बाद
गौरतलब है कि डॉ सूर्यकान्त ने 11 साल पहले 5 अगस्त 2011 को इस विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में पदभार
दुनिया भर में युवा व्यस्क मेंटल वैलनैस पर ध्यान देते हुए अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना चाहते हैं। जहा
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआइआइए) ने स्टार्टअप इंडिया के साथ मिलकर 'आयुष स्टार्ट-अप चुनौती' का श
हजरतगंज स्थित अस्पताल की एक्स-रे मशीन छह महीने से खराब है। तब से डिजिटल एक्स-रे की इकलौती मशीन से जा
वैसे तो स्लिम बॉडी और पतला होने की दवा की, बाजार में भरमार है। लेकिन यह काफी हद तक हमारे शरीर को नुक
कोरोना वायरस महामारी में तीसरी लहर लाने वाले ओमिक्रॉन वैरिएंट का असर दुनिया भर में धीमा हो रहा है। क
रोबोट के पिता बनने की ये कहानी बार्सिलोना की है। वैज्ञानिकों ने यहां रोबोट की मदद से संतानोत्पति के
बलरामपुर जेल में महिला कैदी ने बच्चे को जन्म दिया है। इस दौरान जेल प्रशासन की ओर से बैरक को गुब्बारो
दूध की एक खासियत यह है कि दिन में किसी भी समय इसका सेवन किया जा सकता है। अलग-अलग समय पर दूध के सेवन

COMMENTS