











































लखनऊ। राजधानी के डा0 राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के नेत्र विभाग में बच्चों की नेत्र समस्याओं के निदान हेतु क्लीनिक प्रारम्भ की गई है। नेत्र विज्ञान विभाग की अनुभवी प्रशिक्षित नेत्र चिकित्सक डा0 प्रोलिमा ठक्कर के निर्देशन में बच्चों की नेत्र सम्बन्धित बीमारियों का इलाज किया जाएगा।
डा0 राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (Dr. Ram Manohar Lohia Institute of Medical Sciences) की निदेशिका प्रो0 सोनिया नित्यानन्द (Prof. Sonia Nityanand), चिकित्सा अधीक्षक डा0 विक्रम सिंह एवं विभागाध्यक्ष डा0 शिखा अग्रवाल ने नेत्र क्लीनिक का शुभारम्भ किया।
प्रो0 सोनिया नित्यानन्द ने कहा कि नेत्र विभाग (Pediatric eye clinic) में चिकित्सा हेतु आने वाले बच्चों के नेत्र रोग के निदान हेतु एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। केन्द्र (Department of Ophthalmology) में विशेष तकनीक सेे बच्चों में होने वाले नेत्र रोगों (Eye diseases) का परीक्षण एवं उपचार किया जाएगा। जिसमें बच्चों में होने वाली लगभग आँख सम्बन्धी सभी बीमारियों जैसे अपवर्तक त्रुटियाँ, एंबीलिया, जन्मजात मोतियाबिन्द (congenital cataracts), जन्मजात ग्लूकोमा (congenital glaucoma), जन्मजात पीटोसिस (congenital ptosis), जन्मजात नासोलैक्रिमल डक्ट रूकावट (congenital nasolacrimal duct obstruction) और समसपूर्वता की रेटिनोपैथी (retinopathy) की जाँच और प्रबन्धन तथा बच्चों एवं वयस्क दोनों में भेंगापन (treatment of squint) के प्रबन्धन एवं उपचार हेतु उच्च स्तर की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी।
निदेशिका ने कहा कि हाल ही में ’’इण्डियन जर्नल आफ आप्थल्मोलाजी’’ (Indian Journal of Ophthalmology) में प्रकाशित एक शोध के अनुसार भारत में विद्यमान आप्थल्मोलाजी सेटअप में से मात्र 28 प्रतिशत केन्द्रों पर पूर्णकालिक पीडियाट्रिक नेत्र संसाधन (pediatric eye treatment) उपलब्ध है। अतः संस्थान में स्थापित उक्त सुविधा अपने में एक अद्वितीय उपलब्धि होगी तथा भविष्य में पूर्ण रूप से पीडियाट्रिक नेत्र उपचार के लिए उच्च गुणवत्ता के केन्द्र के रूप में कार्य करेगा।
बताते चले कि भारत जैसे देश में लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या 16 वर्ष से कम उम्र की है। जहाँ पर बच्चों में अन्धापन एक बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है। भारत के बच्चों में अन्धापन अन्य विकसित देशों की तुलना में 5 गुना ज्यादा पाया गया है। बच्चों में अन्धापन का मुख्य कारण काॅर्नियल अन्धापन, प्रीमैच्योरिटी की रेटिनोपैथी, जन्मजात मोतियाबिन्द, जन्मजात ग्लूकोमा और एम्बीलिया है (corneal blindness, retinopathy of prematurity, congenital cataract, congenital glaucoma and amblyopia)।
नेत्र रोगो से सम्बन्धित छोटी-छोटी बीमारियों का समय से निदान न किये जाने से स्थाई अन्धापन का कारण बनता है। जिसमें से 40 से 70 प्रतिशत तक बच्चों के अन्धापन को समय से उपचार करके दूर किया जा सकता है।







हुज़ैफ़ा अबरार August 02 2026 0 238
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 175
हुज़ैफ़ा अबरार August 02 2026 0 168
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 161
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 161
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 147
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 49
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 1211
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 385
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 252
हुज़ैफ़ा अबरार August 02 2026 0 238
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 203
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 175
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 5005
एस. के. राणा January 20 2026 0 4949
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 4851
एस. के. राणा January 13 2026 0 4627
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4529
एस. के. राणा February 01 2026 0 4305
एस. के. राणा February 04 2026 0 3983
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87043
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34938
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38104
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35609
लेख विभाग March 19 2022 0 35224
सौंदर्या राय March 16 2022 0 72777
मुंहासे हकीकत में काफी तकलीफदेह हो सकते हैं और दुर्भाग्य से ये त्वचा की सबसे आम स्थिति है। ये तब होत
इसके साथ ही महाराष्ट्र ओमिक्रॉन वैरिएंट से प्रभावित राज्यों में सबसे आगे है। सूबे में अब तक 88 केस ओ
एमपी में लगातार मामलों में गिरावट देखने को मिल रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बड़ी राहत की खबर दी है
सर्वे के अनुसार अब भी बड़ी संख्या में बेटियों की शादी कम उम्र में ही कर दी जाती है। आंकड़ों के अनुसार
बिहार शरीफ सदर अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड के डॉक्टर ड्यूटी से गायब मिले जिसकी वजह से मरीजों को इलाज
डॉ ए के ठक्कर ने कहा कि न्यूरोलॉजी को हम दो भागों में बांटते हैं। पहला सेंट्रल नर्वस सिस्टम जिसमें स
उपवास वैसे तो कई प्रकार के होते हैं। कोई सुबह उपवास रखता है, कोई रात को। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि
अब पूरी दुनिया में लोग योग के मुरीद होते जा रहे हैं। वहीं जागरूकता फैलाने और समाज के सभी वर्गों के ल
चीन में एक बार फिर से कोरोना ने कोहराम मचा दिया है। यहां पर संक्रमण की दरों में काफी इजाफा देखा गया
कैंसर की बीमारी का बहुत जल्दी खात्मा होने वाला है। जिस वैज्ञानिक दंपति ने कोविड-19 का टीका विकसित कि

COMMENTS