












































प्रतीकात्मक चित्र
लखनऊ। वर्तमान परिवेश में अगर आपको कोई बार- बार और अत्याधिक़ हाथ धोते या अत्याधिक सफ़ाई करते हुए मिल जाए तो हम लोग यही सोचेंगे की जिस तरह से आज कल कोरोना (corona) एवं अन्य बीमारियाँ फैल रही है ऐसे मे ये व्यहवार पूरी तरह से सही है, लेकिन हम में से ज़्यादातर लोग इस बात से अनजान है की ये एक गंभीर मानसिक बीमारी का लक्षण भी हो सकता है। अब्सेसिव कम्पल्शन डिसोर्डेर नाम की ये बीमारी ऐसे ही धीरे-धीरे हमारे आस-पास बढ़ रही है और हम इस गंभीर मानसिक बीमारी से अनजान बने हुए है।
सहारा हॉस्पिटल (Sahara Hospital) के मानसिक रोग विशेषज्ञ (mental specialist) डॉक्टर अपूर्वा उपाध्याय ने इस गम्भीर मानसिक समस्या के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस बीमारी के नाम को समझने का प्रयास करे तो अब्सेसिव का अर्थ है कि रोगी के मन में बार बार एक ही तरह के विचार आना और प्रयास करने के बाद भी रोगी द्वारा इन विचारो को न रोक पाना, इन विचारो से अक्सर मन में घबराहट और बेचैनी होती है। कम्पल्शन का अर्थ होता है इन विचारो के आने के बाद रोगी जो मानसिक या शारीरिक काम करता है जैसे गंदगी के विचार आने के बाद अत्यधिक सफ़ाई करना।
ये बीमारी सौ में दो व्यक्तियों को होती है, ये बीमारी महिलाओं और पुरुषों में समान रूप से पायी जाती है और ये बीमारी लगभग हर उम्र में जैसे कि बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गों में हो सकती है।
अब्सेसिव कम्पल्शन डिसोर्डेर (Obsessive Compulsion Disorder) के लक्षणों की बात करे तो इस बीमारी में मरीज़ के मन में बार बार ऐसे विचार आते है की मेरे हाथ, कपड़े या आस पास की वस्तुयें गंदी हैं और अगर इनको साफ़ नहीं किया गया तो कोई गम्भीर बीमारी या समस्या हो जाएगी और मरीज़ ये जानते हुए की ये विचार पूरी तरह से सही नहीं है इसके बावजूद भी बार बार सफ़ाई में लगा रहता है और अपना बहुमूल्य समय खो देता है। इस बीमारी में सफ़ाई (cleanliness) के अतिरिक्त रोगी के मन में तरह तरह के अन्य विचार जैसे अगर मैंने कोई काम किसी विशेष तरह से नहीं किया तो कुछ अनहोनी हो जाएगी, किसी से बात करते समय मन में विचार आना की कहीं सामने वाले को मेरी बात बुरी ना लग जाए, अपने आस पास की वस्तुवो को किसी विशेष प्रकार से ही रखना है, बार बार मन में शंका आना जैसे मैंने गैस का स्विच बंद किया था या फिर नहीं या फिर दरवाज़ा या ताला बंद किया था या नहीं, ना चाहते हुए भी मन गंदे और भद्धे विचार आना जैसे लक्षण इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं।
अगर समय रहते इस बीमारी का इलाज न किया जाए तो मरीज़ को मानसिक अवसाद (mental depression) या डिप्रेशन जैसी गम्भीर मानसिक समस्या (serious mental problem) भी बन जाती है।
इस बीमारी का इलाज पूरी तरह से सम्भव है, इस बीमारी में दवाओं और काउन्सलिंग के माध्यम से रोगी का इलाज किया जाता है। अन्य मानसिक बीमारियों (mental illnesses) कि तरह ही इस बीमारी के बारे में भी लोगों के मन में विभिन्न तरह की भ्रांतियाँ है जैसी कि ये बीमारी ज़्यादा सोचने से या किसी तरह के बुरे कर्मो से या फिर भूत प्रेत की वजह से होती है। अक्सर सही जानकारी के अभाव में ऐसे रोगी झाड़ फूंक में समय और पैसा व्यर्थ करते रहते है और धीरे धीरे डिप्रेशन में चले जाते है। अगर आपके घर में या आस पास कोई व्यक्ति इस तरह की समस्या से ग्रसित हो तो उसकी मदद करें और उसे मानसिक रोग विशेषज्ञ (mental specialist) से सलाह लेने के लिए प्रेरित करे।
आजकल के बढ़ते तनाव पूर्ण जीवन (stressful life) में सभी को शारीरिक स्वास्थ्य के साथ साथ अपने मानसिक स्वास्थ्य को भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। सही समय पर सम्बंधित चिकित्सक से परामर्श लें।







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