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वाराणसी (लखनऊ ब्यूरो)। आनुवंशिक बीमारियों का टेस्ट जल्दी और सस्ता हो तो काफी हद तक इस पर रोकथाम की जा सकती है। बीएचयू के साइंटिस्ट्स ने ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे थैलासीमिया, हिमोफीलिया जैसी बीमारियों का परीक्षण सस्ता व जल्द हो सकेगा।
मां के पेट में ही बच्चों को आनुवंशिक रोग (genetic diseases) हो जाते है जिनका टेस्ट काफी समय लेता है और काफी महंगा भी होता है। थैलासीमिया (Thalassemia) की बात करे तो एचएलए टेस्ट (HLA test) लगभग 10 हज़ार रुपए में होता है और रिपोर्ट दो महीने बाद आती है। अब बीएचयू (BHU) की नई तकनीक से थैलासीमिया, हिमोफीलिया (Haemophilia) जैसी बीमारियों का परीक्षण सस्ता व जल्द हो सकेगा।
चिकित्सा विज्ञान संस्थान (Institute of Medical Sciences), बीएचयू में अनाटमी विभाग (Anatomy) व एमआरयू लैब के साइंटिस्ट्स ने मालीक्यूलर कैरियाेटाइपिंग तकनीक (molecular karyotyping technique) क्यूएफ-पीसीआर (QF-PCR) विकसित की है जिससे सभी आनुवंशिक बीमारियों की रिपोर्ट मात्र एक से दो दिन में ही आ जाएगी। हालांकि, अभी इसका मूल्य निर्धारण नहीं हुआ है फिर भी यह जांच एक से दो हजार से भी कम में हो जाएगी। क्यूएफ-पीसीआर टेस्ट तेजी से कम लागत में जांच के लिए उपयुक्त है।
बीएचयू में अनाटमी विभाग व एमआरयू लैब (MRU Lab) की प्रभारी प्रो रोयना सिंह के निर्देशन में साइंटिस्ट्स डॉ आशीष चौरसिया, डॉ मनीषा उपाध्याय, डॉ अखिलेश शर्मा, डॉ मनप्रीत कौर ने 64 मरीजों पर सफल परीक्षण किया है।
मालीक्यूलर कैरियाेटाइपिंग तकनीक का इस्तेमाल देश के कुछ ही सरकारी संस्थानों में होती है, लेकिन उसका उपयोग आर्गन (organ transplant) व बोन मैरो ट्रांसप्लांट (bone marrow transplant) के लिए होता है। बीएचयू में पहली बार इस विधि से आनुवंशिक बीमारियों की जांच रिपोर्ट सस्ती और 48 घंटे में ही मिलेगी।







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