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लखनऊ। प्रदेश में नकली दवाओं का जाल बड़े पैमाने पर फैला हुआ है। इसमें कैंसर रोधी और विटामिन की नकली दवाएं बड़े पैमाने पर राज्य में सप्लाई की जा रही हैं। इसमें एक अंतर्राज्यीय गिरोह के शामिल होने की बात सामने आयी है। वह गिरोह इन दवाओं को नए रैपर में पैक करके उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में आपूर्ति कर रहा है।
कैंसर (cancer) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमत अधिक होती है। कीमोथेरेपी (chemotherapy) में प्रयोग होने वाली दवा की एक डोज करीब 10 से 30 हजार के बीच होती है। ऐसे में यह गिरोह नामचीन कंपनियों के रैपर में अपनी नकली दवाओं को पैक कर देते है इन दवाओं को इनके एजेंट मेडिकल स्टोर तक पहुंचाते हैं। फिर मेडिकल स्टोर के एजेंट मरीजों तक पहुंचाते हैं।मेडिकल स्टोर वाले लोगों को सस्ती दवा (cheap medicines) का झांसी देकर रसीद भी नहीं देते हैं।
सूत्रों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (Food Safety and Drug Administration) (एफएसडीए) विभाग को सुराग मिला है कि दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में तैयार होने वाली नकली दवाएं गाजियाबाद, आगरा और लखनऊ के जरिए पूरे प्रदेश के मेडिकल स्टोर पर पहुंच रही हैं। इसमें ज्यादातर एंटी कैंसर (anti cancer drugs) की दवाएं हैं। कुछ हार्ट, किडनी व लिवर के मरीजों (heart, kidney and liver patients) से जुड़ी दवाएं भी हैं।
एफएसडीए (FSDA) ने ड्रग इंस्पेक्टरों (drug inspectors) को निर्देश दिया है कि सप्ताह में कम से कम दो दिन अलग-अलग इलाके के स्टोर की दवाएं जांची जाएं। संबंधित दवा के बिल व वाउचर का मिलान किया जाए। जिस दुकान पर बिना बिल की दवाएं मिले, उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें। संबंधित मेडिकल स्टोर (medical store) का लाइसेंस निरस्त करने की भी कार्रवाई की जाएं। लखनऊ, कानपुर, आगरा, गोरखपुर सहित जहां सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं से जुड़े अस्पताल हैं। वहां विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है।
एके जैन, उप आयुक्त ड्रग, एफएसडीए (AK Jain, Deputy Commissioner Drugs, FSDA) ने बताया की हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों से मिले इनपुट के आधार पर निगरानी की जा रही है। हर जिले में टीम सक्रिय है। बिना बिल दवा बेचने पर रोक है। मरीजों से अपील है कि दवा खरीदते समय बिल जरूर लें। गाजियाबाद में पकड़ी गई दवा का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित बैच को बैन किया जाएगा।
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