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गोरखपुर। कोरोना काल में स्कूल बंद होने के कारण ऑनलाइन पढ़ाई हो रही थी। घर पर टीवी और अन्य मनोरंजन साधनों ने बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ा दिया। इससे बच्चों की आंखों का पानी सूख रहा है। इसके कारण बच्चों की आंखें तेजी से खराब हो रही है।उनकी टीयर फिल्म खराब हो रही है। जिसके कारण आंखों में घाव हो जा रहा है। आंखों की रोशनी कम हो रही है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज (BRD Medical College) के नेत्र रोग के विभागाध्यक्ष (Department of Ophthalmology) डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि कोविड (Covid) के बाद से परिस्थितियां बहुत बदली है। ओपीडी (OPD) में बच्चों की संख्या बढ़ गई है। कोविड से पूर्व 10 फीसदी मरीज बच्चे थे। अब यह संख्या 15 से 20 फीसदी तक पहुंच गई है। बच्चों की नजर (eyesight) कमजोर होने के भी मामले बढ़े हैं।
डॉ. जायसवाल (Dr. Jaiswal) ने बताया कि स्क्रीन टाइम बढ़ने का असर बच्चों के आंखों पर सबसे ज्यादा पड़ा है। आंखों पर तीन परत की टीयर फिल्म होती है। आंखे सूखती है। तो टीयर फिल्म की परतें एक-एक कर क्षतिग्रस्त होती जाती हैं। इससे कार्निया में घाव हो जाता है। उससे ब्लास्टोमा (blastoma) जैसा कैंसर भी हो सकता है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist) डॉ. वाई सिंह ने बताया कि बच्चों की आंखें बड़ों की अपेक्षा ज्यादा संवेदनशील होती है। ऑनलाइन क्लास के दौरान बच्चों को मोबाइल फोन के बजाय लैपटॉप या फिर डेस्कटॉप का इस्तेमाल करवाना चाहिए, क्योंकि मोबाइल की स्क्रीन छोटी होती है इसलिए बच्चों की आंखों पर ज्यादा जोर पड़ता है। लैपटॉप की स्क्रीन को थोड़ी दूरी पर रखें। कुर्सी या फिर बेड पर छोटा टेबल लगाकर बच्चों को पढ़ाई कराएं। हर 20 मिनट पर ब्रेक लेने को कहें। हर 20 सेकेंड पर आंखों की पुतली को पूरी तरह से बंद कर खोलते रहें।







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