











































प्रतीकात्मक चित्र
लखनऊ। केजीएमयू और लोहिया संस्थान की ओपीडी से मरीज़ों को अस्पताल में भर्ती करने से पहले कोविड जांच करानी होगी। अभी तक सर्दी-जुकाम और बुखार के लक्षण वालों को कोविड जांच कराया जा रहा था। ऑपरेशन के लिए भर्ती होने वाले मरीजों की भी कोरोना जांच कराई जा रही है।
केजीएमयू (KGMU) व लोहिया संस्थान (Lohia Institute) में मरीजों की भर्ती इमरजेंसी व ओपीडी के माध्यम से होती है। इमरजेंसी (Emergency) मरीजों को तुरंत भर्ती कर प्राथमिक इलाज मुहैया कराया जा रहा है। लक्षण वाले मरीजों को भर्ती के बाद कोविड जांच कराई जा रही है। जिन मरीजों का ऑपरेशन (operation) होना है उनकी भी कोविड जांच (covid test) कराई जा रही है।
ओपीडी (OPD) में इस व्यवस्था लागू कर दिया गया है। कोविड की नेगेटिव रिपोर्ट के बाद ही मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। ऑपरेशन के लिए भर्ती होने वाले मरीजों पर यही व्यवस्था लागू है। केजीएमयू सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार के मुताबिक ओपीडी में बिना कोविड रिपोर्ट (covid report) के मरीज देखे जा रहे हैं। इमरजेंसी में आने वालों को पहले भर्ती का इलाज मुहैया कराया जा रहा है। सिर्फ लक्षण वाले मरीजों की ही कोविड जांच कराई जा रही है। सामान्य मरीजों को सीधे वार्ड में भर्ती किया जा रहा है।







हुज़ैफ़ा अबरार September 02 2026 0 3479
हुज़ैफ़ा अबरार September 10 2026 0 1316
हुज़ैफ़ा अबरार September 04 2026 0 756
हुज़ैफ़ा अबरार September 08 2026 0 525
हुज़ैफ़ा अबरार September 01 2026 0 490
हुज़ैफ़ा अबरार September 02 2026 0 441
हुज़ैफ़ा अबरार September 10 2026 0 427
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 9184
एस. के. राणा January 20 2026 0 5656
एस. के. राणा February 01 2026 0 5432
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 5418
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 5327
एस. के. राणा January 13 2026 0 4949
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4886
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87316
सौंदर्या राय April 08 2022 0 35407
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38440
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35945
लेख विभाग March 19 2022 0 35581
सौंदर्या राय March 16 2022 0 73267
टीचिंग फैकल्टी की भर्ती कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर हो रही है। यह भर्ती तीन साल के कॉन्ट्रैक्ट पर होगी। जिस
आईसीएमआर के तहत काम करने वाले नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के वैज्ञानिकों का कहना है कि पुणे शहर म
मातृ एवं नवजात मृत्यु को रोकना केवल स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार का लक्ष्य नहीं है, बल्कि इसके पीछे
रोगी बच्ची जिसके दोनों कानों से सुनने की क्षमता काफी कम हो गई थी और परिणामस्वरूप बोलने में असमर्थता
किशोरियों में लगातार रहने वाले पेट दर्द को सामान्य समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय पर जांच
इसमें 31 अक्तूबर को सेवानिवृत्त होने वाले चिकित्सक भी आवेदन कर सकेंगे। प्रदेश में पुनर्नियुक्ति से भ
जहरीला फल खाने से बच्चों की तबीयत खराब हो गई। आपको बता दें कि मिर्जापुर के चुनार थाना क्षेत्र के कां
कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों को अधिक प्रभावित करने की वजह से यहां छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाओं के
अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में बेहोशी का डॉक्टर बाहर से नहीं बुलाना पड़ेगा। नए मिले डॉक्टरों में जिला
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. आर. के. चौधरी का कहना है कि अब ग्रामीण क्षे

COMMENTS