











































डा. आरएन सिंह
गोरखपुर। मिशन सेव इन इंडिया के प्रणेता डा. आरएन सिंह ने कहा है कि अगर कोई मरीज एक चिकित्सक के सामने आ ही जाता है तो यह चिकित्सक की ड्यूटी है कि वह उसे देखे, इंटरटेन करे और उसका इलाज करे। आपको यह बहाना नहीं करना चाहिए कि सरकार अराजक तत्वों से सही से नहीं निपट रही है।
डा. सिंह का कहना था कि सीरियस रोगियों को तो उपचार मिलना ही चाहिए। यह उपचार चिकित्सक नहीं तो कौन देगा। लिहाजा, मसला कम या ज्यादा काम करने का नहीं अपितु सरकार व व्यवस्था की उपेक्षात्मक नीति का है। इलाज करना चिकित्सक का धर्म है। यह उसे कभी नहीं भूलना चाहिए।
डा. आरएन सिंह ने कहा कि चिकित्सक कभी पिक और चूज की स्थिति में नहीं था। आये हुए रोगी को प्राथमिक या पूर्ण उपचार देना ही हमारी पहली और आखिरी जिम्मेदारी है। अगर व्यवस्था द्वारा उपद्रवियों, अराजक तत्वों के खिलाफ इलाज के दौरान कोई अप्रिय घटना हो भी जाए तो भी चिकित्सकों को अपनी ड्यूटी निभानी है।
उन्होंने कहा कि हां, ये देखना प्रशासन का काम है कि अराजक तत्वों पर तत्काल प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई हो रही है या नहीं। जो कानून हैं, उनके आलोक में काम हो। ये न तो हो कि आप चिकित्सकों के खिलाफ ही कार्रवाई कर बैठें। कायदा तो यह कहता है कि जिस तरह सरकारी सेवा में रत कर्मचारियों के काम में बाधा डालने पर कार्रवाई होती है, वैसी ही कार्रवाई चिकित्सा कार्य में व्यवधान डालने पर होनी चाहिए।







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