देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

स्वास्थ्य

जच्चा और बच्चा, दोनों के लिए जानलेवा हो सकता है पोस्ट पार्टम डिप्रेशन : मनोरोग विशेषज्ञ

ब्रिटिश नेशनल हेल्थ सर्विस के अनुसार प्रति एक हजार महिलाओं में से एक को प्रसव के बाद पोस्ट पार्टम डिप्रेशन या साइकोसिस होने की आशंका होती है। चिकित्सकों का कहना है कि प्रसव के बाद मां में थोड़ा बहुत मूड में बदलाव, चिड़चिड़ापन, उदासी आम बात है जो कुछ दिन में अपने आप ठीक हो जाती है लेकिन पोस्ट पार्टम साइकोसिस एक गंभीर मानसिक बीमारी है जिसके लिए तुरंत आपात चिकित्सा की जरूरत हो सकती है।

हे.जा.स.
October 12 2025 Updated: October 12 2025 19:55
0 4106
जच्चा और बच्चा, दोनों के लिए जानलेवा हो सकता है पोस्ट पार्टम डिप्रेशन : मनोरोग विशेषज्ञ पोस्टपार्टम डिप्रेशन महिला

नयी दिल्ली, (नरेश कौशिक, भाषा) उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में पिछले दिनों एक महिला द्वारा अपने नवजात शिशु को फ्रिज में बंद किए जाने की घटना ने लोगों को स्तब्ध कर दिया लेकिन वरिष्ठ मनोरोग चिकित्सकों का कहना है कि यह गर्भावस्था या प्रसूति के बाद महिलाओं में होने वाला पोस्ट पार्टम डिप्रेशन या साइकोसिस है जिसे भारतीय समाज में अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। मनोरोग विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि समय रहते इसके लक्षणों को पहचान कर ऐसी प्रसूता महिलाओं का आसानी से इलाज किया जा सकता है लेकिन सही इलाज नहीं मिलने पर यह जच्चा और बच्चा दोनों के लिए घातक हो सकता है।

मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) के पूर्व निदेशक और वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. (प्रोफेसर) निमेष जी. देसाई ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘ प्रसव के बाद मां को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या होना आम बात है और यह किसी भी वर्ग और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से जुड़ी महिलाओं को हो सकती है।’’उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन समस्या यह है कि इस प्रकार की बीमारियों की अकसर अनदेखी की जाती है और ऐसे में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।’’

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में पिछले दिनों एक महिला ने नवजात शिशु को फ्रिज में बंद कर दिया और सोने चली गई। अमेरिका के कैरोलाइना में 14 मार्च को एक औरत ने जन्म देने के तुरंत बाद चाकू से वार कर नवजात शिशु की हत्या कर दी। एक सितंबर 2024 को पश्चिमी दिल्ली के ख्याला में एक महिला ने नवजात बच्ची को दूध पिलाते समय गला घोंट कर मार डाला।

इन घटनाओं के पीछे पोस्ट पार्टम डिप्रेशन या साइकोसिस को कारण बताते हुए डॉ. देसाई ने कहा ‘‘अन्य मानसिक बीमारियों की तरह ही पोस्ट पार्टम डिस्आर्डर में डिप्रेशन या साइकोसिस होना बहुत सामान्य सी बात है और कुछ मरीजों में डिप्रेशन और साइकोसिस दोनों एक साथ हो सकते हैं। और ऐसे में लक्षणों को लेकर घालमेल होना संभव है।’’

मुरादाबाद की घटना के संबंध में डॉ. देसाई ने कहा कि नव प्रसूताओं में इन सभी मानसिक बीमारियों का बहुत ही आसानी से इलाज संभव है लेकिन अगर बिना इलाज के मरीज को छोड़ दिया जाए तो ऐसे मामलों के कई बार घातक परिणाम सामने आते हैं ।

ब्रिटिश नेशनल हेल्थ सर्विस के अनुसार प्रति एक हजार महिलाओं में से एक को प्रसव के बाद पोस्ट पार्टम डिप्रेशन या साइकोसिस होने की आशंका होती है। चिकित्सकों का कहना है कि प्रसव के बाद मां में थोड़ा बहुत मूड में बदलाव, चिड़चिड़ापन, उदासी आम बात है जो कुछ दिन में अपने आप ठीक हो जाती है लेकिन पोस्ट पार्टम साइकोसिस एक गंभीर मानसिक बीमारी है जिसके लिए तुरंत आपात चिकित्सा की जरूरत हो सकती है। इस बीमारी में मरीज की स्थिति बहुत तेजी से बिगड़ती है और यह जच्चा और बच्चा दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल के मनोरोग विभाग के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आर. पी. बेनीवाल ने बताया, ‘‘ इसके लक्षणों में जच्चा का अपने आसपास की वास्तविकता से संबंध खत्म हो जाता है और सित्जोफ्रेनिया के मरीज की तरह उसे ऐसी आवाजें सुनाई देने लगती हैं जो वहां नहीं हैं। उसे अपने आसपास लोगों की उपस्थिति का भान होता है, उसे अजीब तरह की महक आने लगती है या उसे वह सब महसूस हो सकता है जिसका असलियत से कोई वास्ता नहीं होता। ’’

उनका कहना था कि जच्चा का बिना बात रोना, उसे संदेह, डर की अनुभूति होना, बहुत अधिक सोचना, बहुत ज्यादा बोलना और थकान महसूस होना आदि पोस्ट पार्टम साइकोसिस के लक्षण हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि कोई महिला गर्भावस्था के दौरान या प्रसूति के बाद 12 सप्ताह के दौरान कभी भी जच्चा पोस्ट पार्टम डिप्रेशन या साइकोसिस का शिकार हो सकती है।

पिछले दिनों यूके मेडिकल रिसर्च कांउसिल के सहयोग से द जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ इंडिया और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा दिल्ली में आयोजित एक सम्मेलन में महिलाओं में गर्भावस्था और पोस्ट पार्टम मनोविकार के मुद्दे पर विचार विमर्श किया गया। इसमें विशेषज्ञों का कहना था कि भारत में हर साल दो करोड़ 50 लाख शिशु जन्म लेते हैं लेकिन गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं और प्रसूति के एक साल बाद तक उनकी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं पर ध्यान ही नहीं दिया जाता और इसी कारण उनका इलाज भी नहीं किया जाता, विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में।

जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ इंडिया के अनुसंधान निदेशक पल्लब मौलिक ने कहा, "भारत में प्रसवकालीन मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि बड़ी संख्या में महिलाएं बिना निदान और उपचार के प्रसवकालीन अवसाद और मनोविकृति से ग्रस्त हैं, जो न केवल मां को बल्कि बच्चे के स्वास्थ्य और परिवार के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।"

सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कहा कि चिंता का एक और कारण यह है कि भले ही भारत में मातृ मृत्यु दर 2000 के दशक की शुरुआत से 50 प्रतिशत से ज़्यादा घटकर प्रति 1,00,000 पर 97 हो गई है, फिर भी मातृ आत्महत्या, मातृ मृत्यु दर में एक बढ़ता हुआ अनुपात है।

केरल की एक हालिया रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2020 में लगभग पाँच में से एक महिला की मौत, प्रसव के बाद आत्महत्या के कारण हुई।

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

COMMENTS

B.Pharm. में एडमिशन, कैरियर, स्कोप, नौकरियां, और सैलरी। 

B.Pharm. में एडमिशन, कैरियर, स्कोप, नौकरियां, और सैलरी। 

अखण्ड प्रताप सिंह April 01 2021 46857

इस क्षेत्र में अनुभव प्राप्त करने के बाद, आप लगभग 50,000 रुपये तक कमा सकते हैं। विदेश में शुरूआती व

कोरोना महामारी के अंतिम दौर का जद्दोजेहद जारी, बीते 24 घंटों में केवल 861 नए संक्रमित मिले

कोरोना महामारी के अंतिम दौर का जद्दोजेहद जारी, बीते 24 घंटों में केवल 861 नए संक्रमित मिले

एस. के. राणा April 12 2022 24680

सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि देश में अब केवल 11,058 सक्रिय मामले ही बचे हैं जो कि दो साल बाद सबसे

फाइलेरिया रोगी नेटवर्क का जागरूकता शिविर आयोजित

फाइलेरिया रोगी नेटवर्क का जागरूकता शिविर आयोजित

हुज़ैफ़ा अबरार October 05 2022 26561

स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान और सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च सीफार के सहयोग से आयोजित इस शिविर में

उत्तर प्रदेश के 32 जिलों में शून्य पर पहुंचा कोविड-19 संक्रमण।

उत्तर प्रदेश के 32 जिलों में शून्य पर पहुंचा कोविड-19 संक्रमण।

हे.जा.स. February 08 2021 24873

लखनऊ में 18 नए मामले सामने आए, जबकि 406 रोगियों को अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई। लखनऊ में सक्रिय माम

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित हुआ मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेला

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित हुआ मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेला

आरती तिवारी November 14 2022 31500

मेले में बाल विकास पुष्टाहार विभाग (आईसीडीएस) ने भी अपना स्टाल लगाया। जिले के स्वास्थ्य केन्द्रों पर

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का बड़ा एलान, जल्द मिलेगा 2,505 नए स्वास्थ्य केंद्र

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का बड़ा एलान, जल्द मिलेगा 2,505 नए स्वास्थ्य केंद्र

आरती तिवारी March 23 2023 22875

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य की भौतिक विषमता को सुधारने के लिए 2505 स्वास्थ्

कोरोना संक्रमण की आशंका के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने की तैयारी शुरू

कोरोना संक्रमण की आशंका के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने की तैयारी शुरू

विशेष संवाददाता January 01 2023 46854

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल के स

जनवरी में बढ़ सकते है कोविड-19 के मामले, अगले 40 दिन मुश्किल

जनवरी में बढ़ सकते है कोविड-19 के मामले, अगले 40 दिन मुश्किल

विशेष संवाददाता December 29 2022 24005

स्वास्थ्य मंत्रालय का आकलन है कि भारत में चीन जैसी कोरोना की लहर आने की स्थिति में संक्रमितों की ताद

सुप्रीम कोर्ट ने टू-फिंगर टेस्ट के इस्तेमाल लगी रोक बरकरार रखी

सुप्रीम कोर्ट ने टू-फिंगर टेस्ट के इस्तेमाल लगी रोक बरकरार रखी

एस. के. राणा November 01 2022 30356

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमा कोहली की बेंच ने सोमवार को चेतावनी दी कि ऐसा करने वालों को कद

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और अस्पतालों में उपचार व्यवस्था सुचारु ढंग से संचालित के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और अस्पतालों में उपचार व्यवस्था सुचारु ढंग से संचालित के निर्देश दिए।

हुज़ैफ़ा अबरार February 13 2021 23223

जनरल ओपीडी, सर्जरी सहित विभिन्न चिकित्सा कार्य पूरी गति से किये जाएं। लखनऊ के ट्रॉमा सेन्टरों में ब

Login Panel