












































प्रतीकात्मक
लखनऊ। मानसून में जब बुखार या खांसी होती है तो सबको कोरोना हो जाने का भय सताने लगता है। लोग इन दोनों में अंतर को लेकर भ्रमित हो जाते हैं। मानसून की कई सारी बीमारियों के लक्षण कोरोना के संक्रमण से मिलते-जुलते हो सकते हैं, लेकिन इनमे अंतर् समझना बहुत जरुरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वैसे तो सामान्य सर्दी और कोविड-19 के बीच अंतर करना बहुत मुश्किल है। लेकिन यह असम्भव भी नहीं है। डॉक्टर्स के मुताबिक मानसून अपने साथ कई तरह की बीमारियों को लेकर आता है परन्तु इससे कोरोना को लेकर चिंतित होने की जरुरत नहीं है।
मानसून में सामान्यतौर वेक्टर जनित रोग जैसे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया के मामले बढ़ जाते हैं, वहीं कुछ लोगों को सामान्य सर्दी, वायरल बुखार जैसे वायरल संक्रमण की बीमारियां भी हो सकती हैं। मानसून के समय में पानी की अस्वच्छता से संबंधित रोग जैसे हैजा, टाइफाइड का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।
कोरोना महामारी के बीच, मानसून जनित बीमारियों के मामले भी कई हिस्सों में तेजी से बढ़ रहे हैं। जबकि दोनों पूरी तरह से अलग-अलग स्थितियां हैं। यदि इस मौसम में कोई बीमारी हो जाए तो कैसे अंतर किया जाय कि यह कोरोना का संक्रमण है या मानसूनी बीमारी।
हालांकि रोग की स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना सबसे बेहतर माना जाता है। चूंकि दोनों बीमारियां श्वसन से जुड़ी होती हैं ऐसे में इनके लक्षण बहुत समान हो सकते हैं। सामान्य तौर पर डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी वेक्टर जनित बीमारियों में अक्सर लोगों को तेज बुखार, थकान, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द की दिक्कत होती है, ऐसे लक्षण आपको कोरोना संक्रमण के दौरान भी हो सकते हैं, लेकिन अंतर स्पष्ट कर लेना ठीक रहता है।
गंध और स्वाद की कमी सिर्फ कोविड-19 संक्रमण के दौरान ही होती है, मानसूनी बीमारियों में यह लक्षण नहीं होता है। इस आधार पर लक्षणों में अंतर किया जा सकता है। तो मानसून जनित बीमारियों की रोकथाम और उनसे बचाव भी पहचान का कुछ आधार हो सकता है।







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