











































प्रतीकात्मक चित्र
कीव। रूस और यूक्रेन के हालातों से तो हर कोई वाकिफ है लेकिन यूक्रेन के जैपसोरिजिया न्यूक्लियर प्लांट के करीब रहने वाले लोगों को अथॉरिटीज की तरफ से आयोडीन की गोलियां दी जा रही हैं। ये गोलियां उन्हें संभावित रेडिएशन लीक से बचने के लिए दी गई हैं।
बता दें रूस पर सेनाओं ने मार्च में दक्षिणी यूक्रेन (Ukraine) में स्थित न्यूक्लियर प्लांट (nuclear plant) पर कब्जा कर लिया था और तब से प्लांट उसके ही कब्जे में है। हालांकि इसका संचालन अभी तक यूक्रेन के टेक्निशियंस के हाथ में है। दोनों देशों की तरफ से एक-दूसरे पर इस प्लांट पर फायरिंग करने का आरोप लगाया गया था।
ब्रिटिश अखबार (British newspaper) द सन की तरफ से इस बात की जानकारी दी गई है कि दो दिन पहले इस न्यूक्लियर प्लांट को बंद कर दिया गया था और अब लोगों को आयोडीन की गोलियां दिए जाने की खबरें आ रही हैं। आयोडीन वह तत्व है जो थायरायड ग्रंथि से निकले आयोडीन के अवशोषण को ब्लॉक करने में मदद करती हैं, जिससे थायराइड कैंसर का खतरा कम हो। उसकी गोलियां जैपसोरिजिया शहर में लोगों को बांटी गई हैं। यह जगह प्लांट से करीब 45 किलोमीटर दूर है।
प्लांट के करीब हो रही लड़ाई ने संभावित परमाणु तबाही की चिंताओं को दोगुना कर दिया है। इस इलाके में लगातार गोलीबारी हो रही है। रेडिएशन से लड़ने में आयोडिन को कारगर माना जाता है। हालांकि यह हमेशा मददगार नहीं होता। बल्कि कई बार तो यह खतरनाक हो सकता है। जब एटमी ऊर्जा संयंत्र में कोई दुर्घटना होती है- कोई विस्फोट या कोई रिसाव या युद्ध के दौरान कोई क्षति तो उस स्थिति में रेडियोधर्मी आयोडीन हवा में मिलने वाले सबसे पहले पदार्थों में से एक होती है। अगर वो रेडियोधर्मी (radioactive) आयोडीन शरीर में चला जाए तो वो थाइरॉयड कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कैंसर पैदा कर सकता है।
इसलिए कहा जाता है कि रेडिएशन फैलते समय आयोडीन की गोलियां दी जानी चाहिए। अगर व्यक्ति कथित रूप से "अच्छी आयोडीन पर्याप्त मात्रा में ग्रहण कर लेते हैं तो थाइराइड में किसी "बुरी" या रेडियोएक्टिव आयोडीन के लिए कोई जगह नहीं बचेगी। यानी तब रेडियोएक्टिव आयोडीन फैलेगी तो वह शरीर में तो जाएगी लेकिन गुर्दों के जरिए बाहर निकल जाएगी। हालांकि ये इतना आसान नहीं है। इसके अलग-अलग शरीर पर अलग-अलग प्रभाव देखे जा सकते हैं।
Edited by Shweta Singh







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