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अंग ट्रांसप्लांट के मरीज़ों को सुरक्षा देता है कोविड टीकाकरण।

जिन व्यक्तियों का ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुआ रहता है, उन्हें आमतौर पर कोविड-19 का खतरा ज्यादा रहता है। जिन लोगों को महामारी के दौरान ट्रांसप्लांट से पहले वैक्सीन लगायी गयी थी, उनमें सर्जरी के बाद कोविड -19 कॉम्प्लिकेशन होने का कम खतरा था।

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अंग ट्रांसप्लांट के मरीज़ों को सुरक्षा देता है कोविड टीकाकरण। प्रतीकात्मक

डॉ.  निर्भय  कुमार,
नेफ्रोलॉजिस्ट,रीजेंसी हॉस्पिटल, कानपुर। 

इंफेक्शियस डिजीज जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार जिन लोगों की किडनी या अन्य प्रमुख अंगो का ट्रांसप्लांट महामारी के दौरान हुआ है और उन्होंने वैक्सीन लगवाई है तो उनमें वैक्सीन न लगवाने वाले लोगों की तुलना में कोविड -19 बीमारी का खतरा 80% कम पाया गया है। ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया से गुजरने वाले को आमतौर पर सर्दी या फ्लू जैसे वायरस से संक्रमण का ज्यादा खतरा होता है क्योंकि उन्हें प्रक्रिया के दौरान इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं दी जाती हैं। उनकी इम्युनिटी दवाओं के जरिये कम कर दी जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनका ट्रांसप्लांट सफल और स्थायी हो, और जो अंग ट्रांसप्लांट किया गया हो वह नार्मल इम्यून रिस्पॉन्स से शरीर द्वारा अस्वीकार न हो।

जिन व्यक्तियों का ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुआ रहता है, उन्हें आमतौर पर कोविड-19 का खतरा ज्यादा रहता है। कई स्टडी और रिपोर्टों में पता चला है कि जिन लोगों को महामारी के दौरान ट्रांसप्लांट से पहले वैक्सीन लगायी गयी थी, उनमें सर्जरी के बाद कोविड -19 कॉम्प्लिकेशन होने का कम खतरा था। रीजेंसी कानपुर के डॉक्टरों की टीम इस बात से सहमत है कि इन निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि वैक्सीन लगवाने से महत्वपूर्ण रूप से सुरक्षा मिलती है। इसलिए वैक्सीन लगवाने से किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों या लीवर, फेफड़े और हृदय सहित समान महत्वपूर्ण अंगो के ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों में कोविड -19 के संक्रमण को कम किया जा सकता है।"

ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों में कोविड- 19 संक्रमण न हो इसके लिए हॉस्पिटल ने कई सुरक्षात्मक उपाय किए हैं। उदाहरण के लिए वे किडनी वाले मरीजों से वैक्सीन लगवाने का अनुरोध कर रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर सुरक्षित रूप से उनका ट्रांसप्लांट किया जा सके। इसके अलावा हॉस्पिटल ने अस्थायी रूप से वैकल्पिक जीवित डोनर ट्रांसप्लांट या गैर-जरूरी मृत डोनर ट्रांसप्लांट को न करने का फैसला किया है। हालांकि जिनकी स्थिति गंभीर है या जो ज्यादा बीमार हैं उनमे ट्रांसप्लांट को नही रोका गया है और ऐसे मरीजों को पहले कोविड-19 की जांच कराने के लिए कहा जा रहा है।

यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (सीडीसी) 2 के अनुसार जिन लोगों को किडनी की बीमारी है या जिन लोगों ने किडनी ट्रांसप्लांट कराया हैं, वे कुछ बातों का ध्यान रखकर सुरक्षित रहते हैं। इस तरह के मरीजों को अपने हाथों को बार-बार साबुन और पानी से 20 सेकंड तक धोना चाहिए या अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग करना चाहिए। उन्हें

बिना धुले हाथों से अपनी आंख, नाक या मुंह को छूने से बचना चाहिए। इसके अलावा उन्हें किसी ऐसे व्यक्ति से कम से कम 6 फीट की दूरी पर रहना चाहिए, जो खांसी या छींकने जैसे सांस से सम्बंधित लक्षणों से पीड़ित हो। अगर वे बीमार महसूस करते हैं या बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द या शरीर में दर्द सहित सर्दी जैसे या फ्लू जैसे लक्षण हैं तो उन्हें घर पर रहना चाहिए। इसके अलावा उन्हें खुद खांसते और छींकते हुए टिश्यु से नाक और मुंह को ढक लेना चाहिए, इसके बाद टिश्यु को फेंक देना चाहिए। ऐसे व्यक्ति किसी चीज या सतह को बार-बार छूते हैं तो उन्हें उस चीज और सतह को सैनीटाइज करना चाहिए।

कोविड-19 महामारी के बीच किडनी या किसी अन्य ट्रांसप्लांट को कराना खतरे से भरा हो सकता है। जिन व्यक्तियों को किडनी ट्रांसप्लांट या अन्य महत्वपूर्ण अंगो का ट्रांसप्लांट हुआ होता है उन्हें कोविड के दौरान ज्यादा खतरा रहता है। इसलिए ऐसे लोगों को पब्लिक गाइडलाइंस या वैक्सीन को प्रमुखता देनी चाहिए। हालांकि अगर किसी व्यक्ति ने किडनी ट्रांसप्लांट से पहले वैक्सीन नही लगायी है तो वह ऊपर बताए गए कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन कर सकते है और संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए अपने डॉक्टर से कंसल्ट कर सकते है। इसके अलावा उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके पास घर पर किडनी के अनुकूल भोजन उपलब्ध हो ताकि वे किडनी के अनुरूप भोजन और तरल पदार्थ का सेवन अच्छे से कर सकें। 

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