












































डॉ. प्रत्युष रंजन
वाराणसी। ड्राई आई आंखों की सबसे आम है लेकिन इसको नजरअंदाज कर दिया जाता है।इस समस्या पर जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। ड्राई आई यानी आंखों का सूखापन किसी भी उम्र में हो सकता है। उक्त जानकारी नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रत्युष रंजन ने दी। वे आंखों के बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और समाज से प्रिवेंटेबल ब्लाइंडनेस यानी ऐसे अंधेपन की समस्या को खत्म करने के लक्ष्य के साथ प्रयासरत हैं, जिनकी रोकथाम संभव है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रत्युष रंजन
ड्राई आई के बारे में उन्होंने कहा, "आंखें शरीर में कई तरह के संक्रमण का रास्ता भी हैं। पर्याप्त देखभाल के जरिये हम कई गंभीर संक्रमणों से भी बचे रह सकते हैं। कोरोना संक्रमण के मामले में हम सबने यह देखा है।"
उन्होंने आगे कहा, "इस महामारी के दौरान पूरी दुनिया वर्चुअल और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है, जिस कारण से कंप्यूटर और मोबाइल स्क्रीन के सामने ज्यादा वक्त गुजारना पड़ रहा है। जितना ज्यादा समय हम कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन के सामने बिताते हैं, उससे हमारी आंखों पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है और ड्राई आई की समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है। इसकी वजह यह है कि इन पर काम करते हुए एकाग्रता की जरूरत होती है और ऐसे में पलकें कम झपकती हैं, जिससे आंखों को नम करने के लिए आंसू नहीं बनते हैं और आंखें सूखी हो जाती हैं।
बड़ी स्क्रीन पर काम करते समय आंखें 30 से 40 प्रतिशत तक कम झपकती हैं और मोबाइल पर पलकें झपकने की दर 60 प्रतिशत तक कम हो जाती है। इससे आंखों में जलन, कीचड़ बनने, आंखें लाल होने, सिरदर्द आदि जैसी परेशानियां होने लगती हैं। ड्राई आई एक ऐसी समस्या है जो किसी भी उम्र में हो सकती है और इसकी लोग सबसे ज्यादा अनदेखी करते हैं। यह सही नहीं है। इससे पहले की समस्या बढ़ जाए और अन्य परेशानियां होने लगे, इस पर ध्यान देना जरूरी है।"
इन दिनों बच्चे, युवा और कामकाजी लोग ड्राई आई की ऐसी समस्या से जूझ रहे हैं, जिसकी अनदेखी से उनकी देखने की क्षमता भी जा सकती है।
डॉ. रंजन ने बताया कि ठंड के मौसम में कम तापमान, बाहर की सूखी हवा और घरों में हीटर आदि के कारण सूखी गर्म हवा से आंखों का पानी सूखने लगता है। इससे दर्द, सूजन, धुंधलापन, खुजली और आंखों में पानी आते रहने जैसी परेशानियां होती हैं, क्योंकि हमारा शरीर बाहर के सूखेपन से बचने की कोशिश में लगा होता है।
महिलाओं में मीनोपॉज के बाद ड्राई की समस्या होने की आशंका बढ़ जाती है। हार्मोंस में होने वाला बदलाव कई अन्य शारीरिक बदलाव का कारण भी बनता है, जिससे हमारी ग्रंथियां कम स्राव करती हैं। इससे भी ड्राई आई की समस्या होती है। दूसरी वजह यह भी है कि महिलाएं आंखों पर ज्यादा मेकअप करती हैं। यह भी ड्राई आई की वजह बन सकता है।
ड्राई आई से बचने के लिए डॉ. रंजन ने कुछ उपास सुझाए हैं। स्क्रीन टाइम को कम कीजिए, आंखों को आराम पहुंचाने वाले गतिविधियां बढ़ाइए (जैसे, खेल, वॉकिंग, आई योग और गर्मियों में आई जेल मास्क का प्रयोग), पढ़ते और लिखते समय कमरे में जितनी चटक रोशनी रखते हैं, स्क्रीन पर काम करते समय उससे आधी रोशनी रखिए, स्क्रीन का ब्राइटनेस लेवल भी मध्यम रखिए, सभी स्क्रीन पर ब्लूलाइट फिल्टर लगाकर रखिए, 20-20-20 को आदत में शुमार कीजिए, इसकी मतलब है कि हर 20 मिनट बाद 20 सेकेंड का ब्रेक लेकर 20 फीट दूर देखिए, अगर उपरोक्त सावधानियां नहीं बरती जाएं तो अकेले ब्लू लाइट फिल्टर वाले चश्मे से डिजिटल आई स्ट्रेन (कंप्यूटर विजन सिंड्रोम) कारगर नहीं हो सकता है। इसलिए अपनी आंखों का ख्याल रखिए और किसी भी असामान्य लगने वाले लक्षण को अनदेखा मत कीजिए, क्योंकि वह लक्षण ड्राई आई का हो सकता है।







एस. के. राणा January 13 2026 0 3059
एस. के. राणा January 20 2026 0 2681
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 2646
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 2513
एस. के. राणा February 01 2026 0 2149
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 1890
एस. के. राणा February 04 2026 0 1883
सौंदर्य
सौंदर्या राय May 06 2023 0 102019
सौंदर्या राय March 09 2023 0 106393
सौंदर्या राय March 03 2023 0 106709
admin January 04 2023 0 106725
सौंदर्या राय December 27 2022 0 97047
सौंदर्या राय December 08 2022 0 85484
आयशा खातून December 05 2022 0 140161
लेख विभाग November 15 2022 0 109253
श्वेता सिंह November 10 2022 0 158526
श्वेता सिंह November 07 2022 0 109438
लेख विभाग October 23 2022 0 94170
लेख विभाग October 24 2022 0 97649
लेख विभाग October 22 2022 0 103365
श्वेता सिंह October 15 2022 0 106263
श्वेता सिंह October 16 2022 0 100630
मेडिकल डायरेक्टर एवं यूरोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी के निदेशक डॉ. राकेश कपूर ने कहा कि ओ-आर्म
नियमित कक्षायें शुरू कर दी हैं लेकिन अभिभावकों के मन में कोरोना संक्रमण का भय बना हुआ है और वे अपने
स्वास्थ्य निदेशक की ओर से इस संबंध में प्रदेश के सभी सीएमओ (CMO) को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। भाषा
पीरियड्स को लेट करने की दवाई खाना आखिर कितना सही है? इस आर्टिकल में बताएंगे दवाई को खाने से आपकी हेल
खुशहाल परिवार दिवस के जरिये समुदाय तक पहुँचीं परिवार नियोजन की सेवाएं, हर माह 21 तारीख को स्वास्थ्य
कोरोना ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। देश में 18 हजार के आसपास कोरोना के सक्रिय मरीज हो गए हैं।
तिलकामांझी के होली फैमिली हेल्थ सेंटर में डॉक्टर द्वारा छह महीने के बच्चे को इनफ्लुएंजा और टाइफाइड क
डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने राजाजीपुरम स्थित रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल का जायजा लिया। औचक निरीक्षण के दौ
बेटियां भविष्य की जननी होती हैं। उन्हें सामाजिक कुरीतियों के साथ-साथ सर्वाइकल कैंसर जैसी प्राणघातक ज
जिले में तीन औषधि केंद्र खोले जाएंगे, उनमे से दो औषधि केंद्र यहां के ट्रॉमा सेंटर में खोले जाएंगे तो

COMMENTS