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फाइलेरिया रोग: लक्षण, कारण, इलाज और बचाव

फाइलेरिया एक परजीवी रोग है जो फाइलेरियोइडिया टाइप राउंडवॉर्म के संक्रमण से होता है। वे खून चूसने वाले कीड़ों जैसे काली मक्खियों और मच्छरों से फैलते हैं। यह हेल्मिंथियासिस नामक बीमारियों के समूह से संबंधित हैं।

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May 13 2022 Updated: May 13 2022 15:20
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फाइलेरिया रोग: लक्षण, कारण, इलाज और बचाव

फाइलेरिया को चिकित्सकीय रूप से फाइलेरियासिस के रूप में जाना जाता है। इसे विश्व स्तर पर एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (neglected tropical disease) माना जाता है। फाइलेरिया दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता का प्रमुख कारण है। यह संक्रमण, जो किसी भी आयु वर्ग में होता है, लिम्फैटिक प्रणाली को नुकसान पहुंचाता है और यदि इसे रोका नहीं जाता है, तो यह शरीर के अंगों में असामान्य सूजन दिखाई पड़ता है।

फाइलेरिया (Filariasis) एक परजीवी रोग है जो फाइलेरियोइडिया (Filaroidea) टाइप राउंडवॉर्म (roundworms) के संक्रमण से होता है। वे खून चूसने वाले कीड़ों जैसे काली मक्खियों और मच्छरों से फैलते हैं। यह हेल्मिंथियासिस (helminthiasis) नामक बीमारियों के समूह से संबंधित हैं।

फाइलेरिया वयस्क कीड़े आमतौर पर एक ऊतक (tissue) में रहते हैं, प्रारंभिक लार्वा व्यक्ति के रक्त में माइक्रोफिलारिया (microfilariae) के रूप में जाना जाता है। इन परिसंचारी (circulating) माइक्रोफ़िलेरिया को मच्छर या मक्खियों द्वारा संक्रमित मरीज़ से दूसरे व्यक्ति में ले जाया जाता है।

अभी तक फाइलेरिया रोग पैदा करने वाले आठ कीड़े (worm) चिन्हित हुए हैं। वे मनुष्य में मेजबान के रूप में रहतें हैं। शरीर के जिस भाग पर वे प्रभाव डालते हैं, उसके अनुसार इन्हें तीन समूहों में विभाजित किया जाता है।

फाइलेरिया के प्रकार - Tpes of filariasis

1. लिम्फैटिक फाइलेरिया - Lymphatic Filariasis

यह वुचेरेरिया बैनक्रॉफ्टी, ब्रुगिया मलयी और ब्रुगिया टिमोरी कीड़े के कारण होता है। ये कीड़े लिम्फ नोड्स सहित लिम्फैटिक तंत्र पर कब्जा कर लेते हैं। पुराने मामलों में, ये कीड़े एलीफेंटियासिस सिंड्रोम की ओर ले जाते हैं।

2. सबक्यूटेनियस फाइलेरिया - Subcutaneous filariasis

यह लोआ लोआ (आंख का कीड़ा), मैनसोनेला स्ट्रेप्टोसेर्का और ओन्कोसेर्का वॉल्वुलस के कारण होता है। ये कीड़े त्वचा के ठीक नीचे की परत पर कब्जा कर लेते हैं। एल. लोआ, लोआ लोआ फाइलेरिया का कारण बनता है, जबकि ओ. वॉल्वुलस रिवर अंधापन का कारण बनता है।

3. सेरस कैविटी फाइलेरिया - Serous cavity filariasis

यह  कृमि मैनसोनेला पर्स्टन्स और मैनसोनेला ओज़ार्डी के कारण होता है, जो पेट की सेरस कैविटी पर कब्जा कर लेते हैं। डिरोफिलारिया इमिटिस, डॉग हार्टवॉर्म, शायद ही कभी मनुष्यों को संक्रमित करता है।

फाइलेरिया के लक्षण - Symptoms of Filariasis

  • त्वचा और टिश्यू का मोटा होने के साथ एडिमा
  • पैरों, बाहों, योनि, स्तनों और अंडकोश में सूजन
  • त्वचा के नीचे के चकत्ते, पित्ती के पपल्स और जोड़ों में सूजन
  • त्वचा का रंग कम या ज़्यादा हो जाना
  • आंखों में अंधापन
  • दूधिया सफेद मूत्र का आना

फाइलेरिया के कारण - Causes of filariasis

फाइलेरिया सूत्रकृमि (filarial nematodes) का जीवन चक्र जटिल होता है, जिसमें मुख्य रूप से पांच चरण होते हैं। नर और मादा कृमियों के मिलन के बाद मादा हजारों की संख्या में जीवित सूक्ष्म फाइलेरिया को जन्म देती है। यह बीमारी मच्छरों द्वारा फैलती है, खासकर परजीवी क्यूलेक्स फैंटीगंस मादा मच्छर के जरिए। जब यह मच्छर किसी फाइलेरिया से ग्रस्त व्यक्ति को काटता है तो वह संक्रमित हो जाता है। फिर जब यह मच्छर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति को काटता है तो फाइलेरिया के कीटाणु रक्त के जरिए उसके शरीर में प्रवेश कर उसे भी फाइलेरिया से ग्रसित कर देते हैं।

फाइलेरिया का इलाज - treatment of filariasis

  • संयुक्त राज्य अमेरिका में Diethylcarbamazine (DEC) नाम की गोली का प्रयोग किया जाता है। यह दवा माइक्रोफाइलेरिया और कुछ वयस्क कृमियों को मार देती है।
  • DEC का उपयोग दुनिया भर में 50 से अधिक वर्षों से किया जा रहा है।
  • अमेरिकी संस्था सीडीसी चिकित्सकों को DEC के सिफारिश करती है।
  • जहां ओंकोसेरियासिस मौजूद है, एलएफ के इलाज के लिए इवरमेक्टिन (ivermectin) दिया जाता है।
  • कुछ अध्ययनों के अनुसार डॉक्सीसाइक्लिन (doxycycline) भी दिया जाता है।

कब कौन सी दवा किस मात्रा में देनी है, यह निर्णय चिकित्सक ही ले सकते है। खुद से ली गयी दवा बहुत नुक्सान पहुंचा सकती है। 

फाइलेरिया से बचाव

  • फाइलेरिया चूंकि मच्छर के काटने से फैलता है, इसलिए बेहतर है कि मच्छरों से बचाव किया जाए। इसके लिए घर के आस-पास व अंदर साफ-सफाई रखें।
  • पानी जमा न होने दें और समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें। फुल आस्तीन के कपड़े पहनकर रहें।
  • सोते वक्त हाथों और पैरों पर व अन्य खुले भागों पर सरसों या नीम का तेल लगा लें।
  • हाथ या पैर में कही चोट लगी हो या घाव हो तो फिर उसे साफ रखें। साबुन से धोएं और फिर पानी सुखाकर दवाई लगा लें।

 

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