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नयी दिल्ली। भारत सरकार, साल 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है, हालांकि इसके विपरीत देश में ट्यूबरक्लोसिस मरीजों (tuberculosis patients) की संख्या बढ़ती हुई देखी जा रही है। हालांकि टीबी का इलाज संभव है, लेकिन अगर ट्रीटमेंट के बिना इसे छोड़ दिया जाए तो शरीर को अंदर से खोखला कर देता है। टीबी से पीड़ित महिलाएं बांझपन (infertility) का शिकार हो रही हैं। एम्स में हर साल 3 हजार से अधिक महिलाएं उपचार करवाने आती हैं। इनमें 16 से 18 फीसदी महिलाओं में टीबी का कारण बांझपन पाया गया है, जबकि देश में यह आंकड़ा 10 फीसदी तक है।
एक्सपर्ट (experts) का कहना है कि महिलाओं में होने वाले टीबी का गर्भाशय पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। यह देश में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसी महिलाएं यदि गर्भवती (pregnant) होती हैं तो उन्हें विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए। उन्हें दवाइयों का कोर्स बिना डॉक्टर की सलाह से बंद नहीं करना चाहिए। इससे नवजात में भी टीबी का खतरा रहता है।
बता दें कि स्वास्थ्य मंत्रालय (Ministry of Health) के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 में भारत में प्रति एक लाख लोगों में से 210 को टीबी का शिकार पाया गया है। साल 2015 में भारत में प्रति लाख जनसंख्या पर यह आंकड़ा 256 था।







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