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नयी दिल्ली। अमेरिका के एक नामी कैंसर रोग विशेषज्ञ ने आगाह किया है कि वैश्वीकरण, बढ़ती अर्थव्यवस्था, आबादी और बदलती जीवन शैली के कारण भारत को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की सुनामी का सामना करना पड़ेगा। इससे प्रभावी तरीके से निपटने के लिए उन्होंने प्रौद्योगिकी आधारित चिकित्सा तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुमानों के अनुसार, जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के कारण 2040 में दुनिया भर में कैंसर रोगियों की संख्या 2.84 करोड़ होने की आशंका है, जो 2020 की तुलना में 47 प्रतिशत अधिक होगी।
अमेरिका के ओहायो में क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के हेमेटोलॉजी और मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग (oncology department) के अध्यक्ष डॉ. जेम अब्राहम ने कहा है कि कैंसर की रोकथाम और उपचार के लिए टीके, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा डिजिटल तकनीक (digital technology) का विस्तार और 'लिक्विड बायोप्सी' (Liquid Biopsy) से निदान उन 6 रुझानों में शामिल हैं, जो इस सदी में कैंसर के उपचार को नया रूप देंगे।
मनोरमा ईयर बुक (Manorama Year Book) 2023 के एक आर्टिकल में अब्राहम ने कहा है कि अन्य 3 रुझान जीनोमिक प्रोफाइलिंग, जीन संपादन प्रौद्योगिकियों के विकास और अगली पीढ़ी के इम्युनोथैरेपी (immunotherapy) और सीएआर टी सेल थेरेपी का इस्तेमाल किया गया हैं। उन्होंने कहा है कि डिजिटल तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) और टेलीहेल्थ से मरीजों और विशेषज्ञों के बीच की खाई कम होगी। यह संभावित रूप से हमारे देश के दूरदराज के हिस्सों में विशेषज्ञों की देखभाल की उपलब्धता में वृद्धि करेगा, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र (countryside) भी शामिल है, जहां हमारी अधिकांश आबादी रहती है।







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