











































लखनऊ। कोरोना काल चलते लगभग डेढ़ साल बीत रहें हैं और छात्र ऑनलाइन क्लासेज के माध्यम से शिक्षा प्राप्त कर रहें हैं। ऐसे में ऑनलाइन क्लासेज का बच्चों के मनो- मस्तिष्क पर कैसा प्रभाव पड़ रहा है इसके विश्लेषण के लिए हेल्थ जागरण पहुंचा एक ऐसे व्यक्ति के पास जिन के पास वर्षों का शिक्षण अनुभव और मनोविज्ञान की प्रैक्टिस दोनों का मिश्रण मौजूद है। राजधानी के आईआईएम मार्ग स्थित यूनिटी कॉलेज में प्रोफेसर डॉ आलोक चौधरी शिक्षण, काउंसलिंग और मनोविज्ञान की निजी प्रैक्टिस करते हैं।
छात्र-छात्राओं की इन्हीं विषम मानसिक परिस्थितियों को लेकर हेल्थ जागरण ने मनोवैज्ञानिक डॉ आलोक चौधरी से खास बातचीत की है। डॉ चौधरी ने ऑनलाइन क्लासेज के प्रभाव, लक्षण, बचाव की बहुमूल्य जानकारी दी।
हेल्थ जागरण - डॉ साहब ऑनलाइन क्लासेज का बच्चों पर कैसा प्रभाव पड़ रहा है, क्या इस पर कोई शोध भी सामने आया है।
डॉ आलोक चौधरी - ऑनलाइन क्लासेज में बच्चे केवल शिक्षा की जानकारी प्राप्त कर पा रहें हैं जबकि स्कूल जा कर सीखने के अनुभव से वे वंचित हो रहे हैं। इस पर फिलहाल कोई शोध सामने नहीं आया है लेकिन जब भी आएगा तब आप देखेंगे कि ऑनलाइन क्लासेज का बच्चों पर विपरीत असर पड़ा है।
हेल्थ जागरण - डॉ साहब ऑनलाइन क्लासेज के कारण पड़ रहें प्रभाव के क्या कारण और लक्षण हो सकते हैं?
डॉ आलोक चौधरी - बच्चों में चिड़चिड़ापन आना स्वाभाविक है क्योंकि अब बच्चे 5-6 घंटे का स्कूल नहीं करते बल्कि 24 घंटे व्यस्त हैं। ऑनलाइन क्लासेज के साथ साथ होमवर्क और परीक्षाएं भी हो रही है। स्कूल जाने पर बच्चे एक-दूसरे से मिलते हैं, खेलते हैं और अनुभव प्राप्त करते हैं लेकिन ऑनलाइन क्लासेज में ऐसा नहीं होता है।
हेल्थ जागरण - डॉ साहब ऑनलाइन क्लासेज में बच्चे गेम खेलने लगते हैं और इंटरनेट पर कुछ भी देखते हैं, क्या इसका प्रभाव बच्चों के मनो-मस्तिष्क पर पड़ रहा है?
डॉ आलोक चौधरी - जी जरुर पड़ रहा है। बच्चों की मन: स्थिति बहुत ही कोमल और नाजुक होती है इससे असमय प्राप्त की गई जानकारियां घातक सिद्ध हो सकती है। अभिभावक हर समय बच्चों पर निगरानी नहीं रख सकते हैं। कक्षा में टीचर बच्चों पर नजर रखते हैं लेकिन ऑनलाइन क्लासेज में ऐसा नहीं होता है।
हेल्थ जागरण - डॉ साहब ऑनलाइन क्लासेज लेने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
डॉ आलोक चौधरी - एक तो ऑनलाइन क्लासेज का समय कम करना चाहिए और दूसरा कक्षा के बाद बच्चों को अन्य एक्टीविटी भी करवानी चाहिए।
डॉ साहब हेल्थ जागरण से बातचीत करने का धन्यवाद। उम्मीद है लोगों इस बहुमूल्य जानकारी का उपयोग करेंगे।







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