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कानपुर (लखनऊ ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के 10 हजार रोगी लॉन्ग कोविड की चपेट में हैं। मौसमी बीमारियां बढ़ने के साथ ही इनकी हालत बिगड़ जा रही है। अस्पतालों में आ रहे रोगियों की डायग्नोसिस के ब्योरे से पता चला है कि इनमें बहुतों की कोविड रिपोर्ट एक साल पहले कोरोना निगेटिव आई थी लेकिन कोविड के लक्षण खत्म नहीं हुए हैं। इनका स्टेमिना भी घट गया है और कमजोरी रहती है। कुछ को सांस की तकलीफ है और ऑक्सीजन लेवल कम रहता है।
लॉन्ग कोविड क्या है - What is Long Covid
वे रोगी जो जिनकी कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट आ गई। लेकिन उन्हें कोरोना (corona) के लक्षण बने हुए हैं। विश्व स्तर पर हुए शोधों में चिकित्सा विज्ञानियों ने इस स्थिति को लॉन्ग कोविड (Covid) नाम दिया है।
जीएसवीएम (GSVM) मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि ओपीडी में लगातार लॉंग कोविड के रोगी आ रहे हैं। बहुत से रोगियों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। वहीं सीनियर चेस्ट फिजीशियन (Physician) डॉ. राजीव कक्कड़ ने बताया कि कोरोना से जितने लोग संक्रमित हुए हैं, उनमें 10 से 15 फीसदी रोगी लॉन्ग कोविड की चपेट में हैं। उनकी ओपीडी में प्रतिदिन दो-तीन रोगी आते हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ (Psychiatrist) डॉ. गणेश शंकर ने बताया कि लॉन्ग कोविड रोगियों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें बढ़ी हैं। रोगियों का इलाज चल रहा है।
जिले में 15 फीसदी लॉन्ग कोविड रोगियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ा है। ये अनिद्रा के साथ एंजाइटी और डिप्रेशन का शिकार हो गए हैं। हैलट (Hallet) ओपीडी (OPD) स्तर पर लॉन्ग कोविड रोगियों का इलाज चल रहा है। इनमें ज्यादातर वे रोगी हैं जो कोविड से तो जीत गए लेकिन उनके गुर्दों (kidney) में खराबी आ गई। लिवर और न्यूरो की बीमारियों ने घेर लिया। उनके हाथ-पैरों में झनझनाहट रहती है और थोड़ा सा तेज चलने पर सांस फूल जा रही है।







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