











































इन दोनों की आंखों में दिक्कत है।
कुशीनगर। ज़िले के सुकरौली में लोगों की आंखों की रोशनी कम हो रही है। कोई चार दर्जन लोग ऐसे हैं जो आंख, कान और हाथ की बीमारी से परेशान हैं। सरकारी स्तर पर बात यह हुई है कि इनकी जांच कराई जाएगा, मेडिकल टीम भेजी जाएगी। लेकिन, तब तक यह मामला और भी गंभीर हो सकता है। यह जरूरी है कि इस मामले को तत्काल देखा जाए।
पूरा मामला इसलिए गंभीर है कि जो बच्चा जन्म से ही सब कुछ सही देख रहा था, उसकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगी है और रात में तो कुछ दिखता ही नहीं।
वरिष्ठ पत्रकार सूर्य प्रकाश राय सुकरौली से लौटे हैं। उन्होंने इस संवाददाता को बताया कि कम उम्र के कई लोगों की आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम हो रही है।
लगभग 500 लोगों के बीच यहाँ पचास लोग विकलांगता से पीड़ित हो चुके हैं। एक ही परिवार के पाँच सदस्यों में तीन भाई ऐसे हैं, जिन्हें दिन में तो धुंधला दिखता है लेकिन शाम होते ही कुछ दिखाई ही नही देता। गाँव मे ही दो सगी बहनो की एक एक आँख खराब हो चुकी है। गाँव में कई और लोग ऐसे हैं जो आँख, कान, हाथ और पैर की समस्या से परेशान हैं।
गाँव की मुन्नी देवी के पाँच सदस्यीय परिवार में माँ-बेटी को छोड़कर तीनों बेटे में एक ऐसी बीमारी है जिसमे दिन के उजाले में दिखता है लेकिन सूर्यास्त के बाद जिंदगी अंधेरे में डूब जाती है। मुन्नी देवी ने बताया कि स्थानीय अस्पताल से लेकर सरकारी अस्पताल तक सब जगह दिखा दिया पर कोई रोग पकड़ नहीं पाया।
सूर्य प्रकाश बताते हैः कुछ जागरुक लोगों ने मुझे बताया कि गाँव मे कई लोग ऐसे ही असमय विकलांगता के शिकार हो गए हैं। गाँव के ही रामभवन (45) की आँखें खराब है।
सिरी की दो बेटियो की एक-एक आंख खराब है। उनकी माँ मुराति देवी ने बताया कि बड़ी बेटी पूजा जब कुछ बड़ी हुई तो उसकी एक आँखों की पुतली अपने आप बाहर आ गयी। हम लोग डर गए। फिर उसकी एक आंख पत्थर की लगाई गई। अब उसकी एक ही आख काम करती हैं। दूरी बेटी की एक आँख जन्म से ही खराब है।
जांच होगी, डाक्टरों की टीम जाएगी
उप जिलाधिकारी हाटा पूर्ण बोरा ने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सुरेश पटारिया ने बताया कि डाक्टरों की टीम गाँव मे भेजकर विस्तार से लोगो की जाँच करायी जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा की कारण क्या है।
विटामिन ए की कमी
इस संबंध में गोरखपुर के प्रख्यात नेत्र चिकित्सक डा. शशांक कुमार ने बताया कि संभव है कि उनमें विटामिन ए की जबरदस्त कमी हो, वो कुपोषण का शिकार हों।
कुछ बीमारियां जन्मजात होती हैं और उनमें आनुवंशिकता का भी गुण होता है। लेकिन, पहले आंखें ठीक थीं, रोशनी ठीक थी, सब कुछ दिखता था और अब विजिबलिटी कम होने लगी है तो प्रथम दृष्टया यह कुपोषण का ही मामला दिखता है। संभव है कि विटामिन एक की जबरदस्त कमी है।
पहले इन्हें समुचित मात्रा में विटामिन ए देने की जरूरत है। बेहतर हो कि ये लोग किसी बेहतरीन विशेषज्ञ चिकित्सकों से अपना ट्रीटमेंट कराएं।
ये समस्या आई कैसे
बड़ा सवाल यह है कि ये समस्या आई कैसे, कास कर तब जब यहां विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम है, गांव से लेकर जिले तक स्वास्थ्य महकमा चौकस होने का दावा करता है। फिर तो इस किस्म के रोग को बहुत पहले पकड़ लेना चाहिए था, समाधान हो जाना चाहिए था।







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