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35 की उम्र के बाद मां बनने में क्यों बढ़ जाती हैं मुश्किलें? 

बढ़ती उम्र के साथ गर्भधारण की संभावनाओं में बदलाव आने लगता है। खासतौर पर 35 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं की प्रजनन क्षमता में गिरावट अपेक्षाकृत तेज हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, महिलाओं का जन्म सीमित संख्या में अंडों के साथ होता है और यही अंडे उनके पूरे  उम्र तक चलते रहते हैं। उम्र बढ़ने के साथ अंडाशय में मौजूद अंडों की संख्या और उनकी गुणवत्ता कम होने लग जाती है। इससे गर्भधारण में अधिक समय लग सकता है और गर्भपात का जोखिम भी बढ़ सकता है।

हुज़ैफ़ा अबरार
October 25 2026 Updated: October 25 2026 00:21
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35 की उम्र के बाद मां बनने में क्यों बढ़ जाती हैं मुश्किलें?  Image of Pregnent woman’s

लखनऊ। 35 वर्ष के बाद महिलाओं की प्रजनन क्षमता में गिरावट आ सकती है, क्योंकि अंडों की संख्या और गुणवत्ता उम्र के साथ बदलती है। एएमएच और अल्ट्रासाउंड जैसी जांच ओवेरियन रिजर्व समझने में मदद करती हैं। सही समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेना महत्वपूर्ण है। मां बनना किसी भी महिला के जीवन का सबसे खास अनुभव होता है। हालांकि जिस तरह से लोगों की दिनचर्या और खानपान में गड़बड़ी बढ़ती जा रही है, इसने प्रग्नेंसी से संबंधित जटिलताओं को काफी बढ़ा दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जो चीजें सामान्य तौर पर गर्भधारण का खतरा बढ़ाती जा रही हैं, उम्र का बढ़ना उनमें से एक है।

बढ़ती उम्र के साथ गर्भधारण की संभावनाओं में बदलाव आने लगता है। खासतौर पर 35 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं की प्रजनन क्षमता में गिरावट अपेक्षाकृत तेज हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, महिलाओं का जन्म सीमित संख्या में अंडों के साथ होता है और यही अंडे उनके पूरे  उम्र तक चलते रहते हैं। उम्र बढ़ने के साथ अंडाशय में मौजूद अंडों की संख्या और उनकी गुणवत्ता कम होने लग जाती है। इससे गर्भधारण में अधिक समय लग सकता है और गर्भपात का जोखिम भी बढ़ सकता है।

35 की उम्र के बाद गर्भधारण

स्त्री रोग विशेषज्ञ बताती हैं, कई महिलाएं इस उम्र के बाद भी स्वस्थ गर्भधारण कर सकती हैं। हालांकि सामान्यतौर पर माना जाता रहा है कि 35 की उम्र के बाद गर्भधारण से संबंधित जटिलताएं ज्यादा हो सकती हैं। यही कारण है कि सभी महिलाओं को सही समय पर जांच, जीवनशैली में सुधार और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ जरूरी हो जाता है। महिलाओं के अंडाशय में मौजूद अंडों की संख्या उम्र के साथ प्राकृतिक रूप से कम होती जाती है। इसे ओवेरियन रिजर्व में कमी कहा जाता है। बढ़ती उम्र के साथ अंडों में क्रोमोसोम की असामान्यताएं होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इससे निषेचन में परेशानी, भ्रूण के विकास में बाधा या गर्भपात का जोखिम बढ़ सकता है।


ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि वैसे तो 40 की उम्र तक गर्भधारण हो सकता है। हालांकि लाइफस्टाइल और खानपान की गड़बड़ी ने गर्भधारण को थोड़ा मुश्किल बना दिया है। वैसे तो हर महिला की प्रजनन क्षमता अलग होती है। केवल उम्र के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई महिला गर्भधारण कर पाएगी या नहीं। 20 और 30 की शुरुआती उम्र में सामान्यतः प्रजनन क्षमता सबसे अधिक होती है। ये गर्भधारण के लिए सबसे अच्छी उम्र मानी जाती है। 35 वर्ष के आसपास प्रजनन क्षमता में गिरावट होने लग जाती है। 40 वर्ष के बाद यह गिरावट आमतौर पर अधिक तेज होती है, जिससे गर्भधारण कठिन हो जाता है।

बढ़ती उम्र में माँ बनने पर क्या परेशानियाँ हो सकती हैं?
माँ बनना हर महिला के जीवन का खूबसूरत एहसास होता है। लेकिन आज करियर आर्थिक जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत कारणों से कई महिलाएँ देर से माँ बनने का फैसला करती हैं। ऐसे में एक सवाल अक्सर मन में आता है कि क्या बढ़ती उम्र में माँ बनने से गर्भावस्था में परेशानियाँ बढ़ जाती हैं।

1. गर्भधारण में परेशानी
महिलाओं की उम्र बढ़ने के साथ अंडों की संख्या और गुणवत्ता में कमी आने लगती है। इसका असर गर्भधारण की संभावना पर पड़ सकता है। विशेष रूप से 35 साल के बाद गर्भधारण में अधिक समय लग सकता है।

2. गर्भपात का बढ़ता खतरा
बढ़ती उम्र में गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है। इसका एक प्रमुख कारण अंडों में गुणसूत्र संबंधी बदलाव हो सकते हैं। हालाँकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अधिक उम्र में हर गर्भावस्था में गर्भपात का खतरा होगा।

3. बच्चे में आनुवंशिक समस्याओं का जोखिम
माँ की उम्र बढ़ने के साथ बच्चे में डाउन सिंड्रोम जैसी कुछ गुणसूत्र संबंधी स्थितियों का खतरा बढ़ता है। गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर की सलाह से स्क्रीनिंग और आवश्यक जाँचें करवाई जा सकती हैं।

4. गर्भावस्था में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर
35 साल या उससे अधिक उम्र में गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इन स्थितियों की समय पर पहचान और उचित इलाज माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए महत्त्वपूर्ण है।

5. समय से पहले डिलीवरी और सिजेरियन की संभावना
बढ़ती उम्र में कुछ महिलाओं को समय से पहले प्रसव या सिजेरियन डिलीवरी की आवश्यकता पड़ सकती है। हालाँकि, केवल उम्र अधिक होने का अर्थ यह नहीं है कि सामान्य प्रसव संभव नहीं होगा। डिलीवरी का तरीका माँ और बच्चे की स्थिति के आधार पर तय किया जाता है।


6. बढ़ती उम्र में स्वस्थ गर्भावस्था के लिए क्या करें?
अगर आप अधिक उम्र में माँ बनने की योजना बना रही हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
गर्भधारण से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।
डॉक्टर की सलाह से फोलिक एसिड लेना शुरू करें।
ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की जाँच करवाएँ।
संतुलित आहार लें और नियमित रूप से हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि करें।
गर्भावस्था के दौरान नियमित जाँच करवाएँ और डॉक्टर की सलाह का पालन करें।


निष्कर्ष
बढ़ती उम्र में माँ बनना कुछ चुनौतियाँ लेकर आ सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अधिक उम्र में स्वस्थ बच्चे को जन्म देना मुश्किल ही होगा। सही समय पर मेडिकल सलाह, नियमित जाँच और उचित देखभाल से गर्भावस्था को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है। इसलिए माँ बनने की योजना बनाते समय उम्र के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। गर्भधारण की योजना बनाने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलें।


डॉक्टर की सलाह से फोलिक एसिड लें सामान्यतः गर्भधारण से कम से कम एक महीने पहले 400 माइक्रोग्राम प्रतिदिन।
ब्लड प्रेशर, शुगर और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य जाँच करवाएँ। गर्भावस्था के दौरान नियमित जाँच और बच्चे की आवश्यक स्क्रीनिंग करवाएँ। यदि उम्र 35 साल या अधिक है और 6 महीने कोशिश करने के बाद भी गर्भधारण नहीं हुआ है, तो प्रजनन विशेषज्ञ से मिलें। 40 साल से अधिक उम्र में शुरुआत में ही परामर्श लेना उचित है।

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