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लाखों लोगों को प्रभावित कर रहा स्लीप एपनिया, विशेषज्ञों ने जताई चिंता

स्लीप एपनिया (Sleep Apnea) नींद से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें सोते समय व्यक्ति की साँस बार-बार रुक जाती है या साँस लेने में रुकावट आती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है और नींद पूरी होने के बावजूद सुबह थकान महसूस हो सकती है। जोर से खर्राटे आना दिन में अत्यधिक नींद आना और नींद के दौरान सांस रुकना स्लीप एपनिया के महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत हैं। समय पर पहचान और उपचार से उच्च रक्तचाप हृदय रोग और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है।

हुज़ैफ़ा अबरार
October 23 2026 Updated: October 23 2026 00:25
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लाखों लोगों को प्रभावित कर रहा स्लीप एपनिया, विशेषज्ञों ने जताई चिंता Image of Sleep Apnea

लखनऊ। स्लीप एपनिया (Sleep Apnea) नींद से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें सोते समय व्यक्ति की साँस बार-बार रुक जाती है या साँस लेने में रुकावट आती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है और नींद पूरी होने के बावजूद सुबह थकान महसूस हो सकती है। स्लीप एपनिया पर डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग द्वारा ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया एवं पॉलिसोमनोग्राफी विषय पर सीएमई एवं हैंड्स-ऑन कार्यशाला का आयोजन किया गया। डॉ. RMLIMS के निदेशक प्रो. डॉ. सीएम सिंह ने अपने संबोधन में उन्होंने मोटापे और स्लीप एपनिया के बीच गहरे संबंध पर कहा ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया के लगभग 70–80% मरीज मोटापे से ग्रस्त होते हैं और  90% मोटे व्यक्तियों में यह बीमारी हो सकती है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण अधिकांश मामलों का निदान नहीं हो पाता। 

पद्मश्री प्रो. राजेन्द्र प्रसाद ने भारत में स्लीप एपनिया की स्थिति पर कहा पिछले दो दशकों में इस बीमारी की घटनाओं और प्रसार में काफी वृद्धि हुई है, लेकिन आम जनता में इसकी जानकारी अभी भी सीमित है। प्रो. सूर्यकांत ने कहा जोर से खर्राटे आना दिन में अत्यधिक नींद आना और नींद के दौरान सांस रुकना स्लीप एपनिया के महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत हैं। समय पर पहचान और उपचार से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है। प्रो. डॉ. अजय कुमार वर्मा विभागाध्यक्ष पल्मोनरी मेडिसिन डॉ. RMLIMS ने बताया कि आज के समय में अच्छी नींद को हृदय स्वास्थ्य और समग्र स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है।

 
डॉ. विभा गंगवार ने स्वास्थ्य के लिए नींद के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. अनिल कुमार सिंह चंदन हॉस्पिटल लखनऊ ने स्लीप एपनिया के सही निदान और स्लीप स्टडी रिपोर्ट को समझने और पढ़ने की विधि के बारे में बताया। डॉ. हेमंत कुमार डॉ. RMLIMS ने इसके उपचार में PAP थेरेपी और दवाओं की भूमिका पर चर्चा की। डॉ. आशीष झा कार्डियोलॉजी विभाग डॉ. RMLIMS ने स्लीप एपनिया के हृदय रोग और अन्य बीमारियों पर पड़ने वाले प्रभाव को समझाया। प्रो. सारिका गुप्ता KGMU ने कहा बच्चों में खर्राटों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनमें भी स्लीप एपनिया हो सकता है और समय पर निदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। डॉ. देवेंद्र चोपड़ा प्रोस्थोडॉन्टिक्स सरस्वती डेंटल कॉलेज ने स्लीप एपनिया के उपचार में डेंटल उपकरणों तथा चयनित शल्य चिकित्सा की भूमिका पर चर्चा की।


 डॉ. दीपक शर्मा और डॉ. शुभ्रा श्रीवास्तव KGMU ने प्रतिभागियों को पॉलिसोमनोग्राफी रिपोर्ट स्कोरिंग स्लीप स्टडी की व्याख्या तथा स्लीप एपनिया के उपचार में PAP उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. सागर जैन डॉ. अमन सक्सेना डॉ. कमल वर्मा, डॉ. शाश्वत केसरवानी, डॉ. दिलीप और डॉ. सलभ सहित पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के अन्य सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यशाला में इंटरैक्टिव व्याख्यानों और व्यावहारिक प्रदर्शनों के माध्यम से चिकित्सकों को स्लीप से संबंधित श्वसन विकारों के बेहतर निदान और उपचार के लिए प्रशिक्षित किया गया।

स्लीप एपनिया के लक्षण  

सोते समय तेज खर्राटे लेना। नींद में साँस रुकना जिसे परिवार का कोई सदस्य देख सकता है। रात में अचानक हाँफते हुए या घुटन महसूस करके जागना। सुबह उठने पर सिरदर्द होना। दिन में बहुत नींद आना या थकान महसूस करना। रात में बार-बार नींद खुलना। ध्यान लगाने में कठिनाई और चिड़चिड़ापन। सुबह उठने पर मुँह सूखना।


स्लीप एपनिया कितने प्रकार का होता है
मुख्यतः इसके तीन प्रकार होते हैं- 1.ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) यह सबसे आम प्रकार है। सोते समय गले की मांसपेशियाँ ढीली हो जाती हैं और साँस का रास्ता संकरा या बंद हो जाता है।
2. सेंट्रल स्लीप एपनिया (CSA) इसमें मस्तिष्क साँस लेने के लिए शरीर को सही संकेत नहीं भेज पाता।
3. मिक्स्ड स्लीप एपनिया
इसमें पहले बताए गए दोनों प्रकार की समस्याएँ हो सकती हैं।

स्लीप एपनिया से क्या नुकसान हो सकता है?
यदि इसका इलाज न किया जाए तो इससे  उच्च रक्तचाप (हाई बीपी)। हृदय रोग और स्ट्रोक। अनियंत्रित रक्त शर्करा की समस्या। दिन में अत्यधिक नींद आने से वाहन चलाते समय दुर्घटना का खतरा।


 स्लीप एपनिया का इलाज कैसे होता है?
अच्छी बात यह है कि इसका इलाज संभव है। वजन अधिक होने पर वजन कम करना। शराब और नींद की गोलियों से बचना खासकर बिना डॉक्टर की सलाह के। पीठ के बल सोने से समस्या बढ़ती हो तो करवट लेकर सोना। CPAP मशीन सोते समय मास्क के माध्यम से हवा का दबाव देकर साँस का रास्ता खुला रखने में मदद करती है। कुछ मामलों में मुँह में लगाने वाला विशेष उपकरण या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।  

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