











































प्रतीकात्मक
नई दिल्ली : एक अध्ययन में दावा किया गया है कि जो लोग कोरोना को मात दे चुके हैं और कोविशील्ड की दोनों टीके लगवा चुके हैं, उनके ऊपर डेल्टा वैरिएंट का असर नहीं होगा।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और भारतीय वायरोलॉजी संस्थान पुणे द्वारा यह अध्ययन किया गया है। कोरोना का डेल्टा वैरिएंट पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस खतरनाक वैरिएंट से सबसे ज्यादा सुरक्षित कौन है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी पूरी दुनिया में तेजी से फैलते डेल्टा प्लस वैरिएंट को लेकर चेतावनी दी है। कहा गया है कि कोरोना के अन्य वैरिएंट्स की तुलना में यह वैरिएंट सबसे ज्यादा घातक है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की एक हालिया स्टडी के मुताबिक कोवैक्सीन कोरोना के ज्यादा खतरनाक स्वरूप डेल्टा प्लस वैरिएंट के खिलाफ ज्यादा सक्षम है। केंद्रीय विज्ञान और तकनीकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा था कि डेल्टा प्लस वैरिएंट के करीब 70 केसेज आए हैं। आईएनएसएसीओजी की लैब में जीनोम सीक्वेंसिंग के दौरान इन मामलों का पता चला है।
अध्ययन के दौरान यह पाया गया कि कोरोना को मात दे चुके लोगों पर डेल्टा वैरिएंट निष्प्रभावी रहा। वहीं कोविशील्ड की एक या दोनों डोज ले चुके लोगों पर तुलनात्मक रूप से इसका असर नजर आया।







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