












































डाउन सिंड्रोम एक आनुवांशिक विकार है जो असामान्य कोशिका विभाजन के कारण गुणसूत्र 21 में अतिरिक्त क्रोमोजोम (chromosome) की वजह से होता है। भ्रूण (fetus) में क्रोमोजोम की मात्रा अधिक होने पर बच्चों में डाउन सिंड्रोम (Down syndrome) की बीमारी होती है। ये बच्चों में जन्मजात (congenital) होने वाली गंभीर बीमारियों में से एक है। इससे पीड़ित बच्चों की मांसपेशियां जन्मजात कमज़ोर होतीं हैं। ऐसे बच्चे नॉर्मल बच्चों से अलग व्यवहार करतें हैं। पीड़ित बच्चों का शारीरिक, मानसिक विकास सामान्य बच्चों की तरह नहीं होता।
डाउन सिंड्रोम पीड़ित बच्चों में हल्के से लेकर गंभीर लक्षण तक हो सकते
हैं। ऐसे बच्चोंकी मांसपेशियां कम ताकतवर होती हैं। हालांकि उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों की ताकत बढ़ती रहती है। ऐसे बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में बैठना, चलना या उठना सीखने में ज्यादा समय लेते हैं। इनका बौद्धिक, मानसिक व शारीरिक विकास धीमा होता है।
डाउन सिंड्रोम की पहचान - Down syndrome diagnosis
कई बच्चों के चेहरे पर अजीब से लक्षण दिखते हैं। जैसे कान छोटा होना, चेहरा सपाट होना, आंखों का तिरछापन, जीभ बड़ी होना आदि। बच्चों की रीढ़ की हड्डी में भी विकृत हो सकती है। कुछ बच्चों को पाचन की समस्या भी हो सकती है तो कई बच्चों को किडनी संबंधित परेशानी हो सकती है। इनकी सुनने-देखने की क्षमता कम होती है। ये गाना सुनना और डांस करना पसंद करतें हैं।
सकारात्मक रवैये से जी सकते हैं सामान्य जीवन - Can lead a normal life with a positive attitude

डाउन सिंड्रोम से पीड़ित रोगी के लिए उनके परेशानियां होती हैं, लेकिन अभिभावक बच्चे को उत्साहित करें तो कम हो सकती हैं। ऐसे बच्चे के प्रति सकारात्मक रवैया रखें। बच्चे के पोषक तत्वों पर भी ध्यान देना चाहिए। ऐसे बच्चों को ज्यादा सुरक्षित घेरे में न रखें।
होम्योपैथी एक अच्छा विकल्प - Homeopathy is a good option
डाउन सिंड्रोम के कारण पैदा होने वाली समस्याओं को लक्षण के आधार पर होम्योपैथी द्वारा काफी हद तक ठीक कर दिया जा सकता है। इसके लिए किसी अनुभवी और सुयोग्य होम्योपैथ की देख-रेख में लंबे समय तक धैर्यपूर्वक इलाज करवाना चाहिए। बच्चे को किस प्रकार से रखना है, उसके साथ कैसा व्यवहार करना है कैसे उसका पालन पोषण करना है, यह सब अपने चिकित्सक से पूछें। बिना चिकित्सक से पूछे दवा कतई बंद ना करें।
लेखक - डॉ रूप कुमार बनर्जी, होम्योपैथी चिकित्सक, गोरखपुर







हुज़ैफ़ा अबरार June 07 2026 0 1533
हुज़ैफ़ा अबरार June 01 2026 0 1211
हुज़ैफ़ा अबरार June 04 2026 0 994
हुज़ैफ़ा अबरार June 10 2026 0 833
हुज़ैफ़ा अबरार June 12 2026 0 791
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4438
एस. के. राणा January 20 2026 0 4312
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 4291
एस. के. राणा January 13 2026 0 4200
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 3962
एस. के. राणा February 01 2026 0 3619
एस. के. राणा February 04 2026 0 3521
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86623
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34441
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37649
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35217
लेख विभाग March 19 2022 0 34727
सौंदर्या राय March 16 2022 0 72098
बदलते मौसम का असर लोगों के ऊपर दिखने लगा है। इस बार तो मार्च की धूप ही लोगों की सेहत पर असर डाल रही
कोविशील्ड और कोवैक्सीन की 66 करोड़ और खुराकें क्रमश: 205 रुपये और 215 प्रति खुराक, के हिसाब से खरीदी
देश में त्योहारों के बीच कोरोना के ओमिक्रोन वेरिएंट के सब वेरिएंट एक्सबीबी ने डराना शुरू कर दिया है।
फार्मेसिस्ट दिवस पर स्टेट फार्मेसी कॉउंसिल उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व चेयरमैन और फार्मेसिस्ट फेडरेश
आगरा दौरे पर पहुंचे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया।
महाराष्ट्र में एक दिन में सबसे अधिक 7,467 लोग संक्रमण से उबरे हैं। मंत्रालय ने कहा कि देश में एक दिन
Maternal consumption of ultra-processed food during the child rearing period was associated with an
बच्चे ही देश का भविष्य है। यही कल के नेहरू या मोदी होंगे। मैं तो अपने करियर की शुरुआत से ही बच्चों क
इससे प्रभावित पशुओं की मृत्युदर काफी कम है लेकिन जरा सी लापरवाही यूपी में भी अन्य राज्यों की तरह ही
दिल्ली लिवर से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को जल्द ही सफदरजंग अस्पताल और वर्धमान महावीर मेडिकल

COMMENTS