











































प्रतीकात्मक
गोरखपुर। कोरोना की तीसरी लहर के दस्तक के खतरे के बीच राहत की खबर है। कोरोना वायरस के म्यूटेशन की पहचान के लिए बीआरडी मेडिकल कालेज में जीनोम सीक्वेसिंग की तैयारी शुरू हो गई है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग की लैब में जीनोम सीक्वेसिंग की जाएगी। इस जांच के लिए अन्य मशीनें विभाग में मौजूद है। केवल कैंपलरी सीक्वेसिंग मशीन नहीं है। इसके लिए शासन से वार्ता चल रही है। अगस्त में मशीन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी टीम के पास बीएसएल थ्री लैब (बॉयोसेफ्टी लैब) की सुविधा है। इस लैब में आरएनए स्ट्रक्चर मशीन से लेकर बॉयोसेफ्टी कैबनेट तक की सुविधा उपलब्ध है। इन सुविधाओं की बदौलत माइक्रोबायोलॉजी की टीम एक दिन में 10 हजार कोरोना सैंपलों की जांच कर सकती है। ऐसे में जीनोम सीक्वेसिंग जांच के लिए टीम को केवल कैंपलरी सीक्वेसिंग मशीन की जरूरत है। इसे लेकर शासन से वार्ता भी शुरू कर दी गई है। इस मशीन के आने के बाद जीनोम सीक्वेसिंग के अलावा अन्य जांचें भी हो सकेंगी।
अभी जीनोम सीक्वेसिंग के लिए माइक्रोबायोलॉजी की टीम को नमूना आईजीआईबी दिल्ली (इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी) दिल्ली भेजना पड़ रह है। इसकी वजह से जांच रिपोर्ट मिलने में देरी हो रही है। माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि केवल कैंपलरी सीक्वेसिंग मशीन की जरूरत है। इस मशीन के मिलने के बाद जीनोम सीक्वेसिंग के साथ अन्य जांचें भी आसानी से हो सकेंगी। इसे लेकर शासन से वार्ता चल रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही मशीन मिल जाएं।

कई बीमारियों का भी लग सकेगा पता
जीनोम सीक्वेसिंग मशीन लगने के बाद वायरस के डीएनए और आरएनए में बदलाव की पहचान हो सकेगी। इसके अलावा माता-पिता से मिलने वाली अनुवांशिक बीमारियां जैसे थैलेसीमिया, हीमोफीलिया की स्क्रीनिंग भी की जाएगी, ताकि यह पता चलेगा कि यदि उनका कोई बच्चा जन्म लेता है तो उसे कोई बीमारी तो नहीं होगी।







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