देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

स्वास्थ्य

ओमिक्रॉन की प्रसार और संक्रमण क्षमता ज्ञात सभी वैरिएंट से बहुत ज़्यादा।

ओमिक्रॉन की आर वैल्यू डेल्टा से करीब छह गुना अधिक है, जिसका मतलब है कि ओमिक्रॉन से संक्रमित मरीज 35-45 लोगों में संक्रमण फैलाएगा। इस वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में 30 से अधिक म्यूटेशन की वजह से इस पर मौजूदा वैक्सीनों के बहुत कम प्रभावी रहने की आशंका है।

लेख विभाग
December 25 2021 Updated: December 25 2021 16:38
0 33501
ओमिक्रॉन की प्रसार और संक्रमण क्षमता ज्ञात सभी वैरिएंट से बहुत ज़्यादा। प्रतीकात्मक

दक्षिण अफ्रीका में 24 नवंबर को ओमिक्रॉन का पहला मामला सामने आया था। अब यह दुनियाभर में कोरोना संक्रमण की रफ्तार बढ़ा रहा है। कई देशों में ओमिक्रॉन, डेल्टा से भी प्रबल साबित हो रहा है। ओमिक्रॉन संक्रमण की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महज एक माह के अंदर यह दुनिया के 108 देशों में फैल चुका है। इतना ही नहीं अब तक इस वैरिएंट से संक्रमण के 1.51 लाख केस भी सामने आ चुके हैं।

ब्रिटेन में 5 अप्रैल तक 0.10% मामले ही डेल्टा की वजह से आ रहे थे, जो मई आखिर तक बढ़कर 74% हो गए। जून तक 90% से ज्यादा मामलों के पीछे डेल्टा वैरिएंट ही वजह था। वहीं, ओमिक्रॉन की वजह से ब्रिटेन में एक महीने के भीतर कोरोना संक्रमण ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। 22 दिसंबर को ब्रिटेन में 1 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आए, जो अब तक एक दिन में सबसे ज्यादा था।

अमेरिका में हर चौथा मरीज नए वैरिएंट से संक्रमित
अमेरिका में 19 अप्रैल तक आ रहे कुल कोरोना के मामलों में 0.31% केस के पीछे डेल्टा वैरिएंट ही वजह था। जून अंत तक ये आंकड़ा बढ़कर 50% पर पहुंच गया। एक महीने बाद जुलाई अंत तक 90% से ज्यादा मामलों के लिए डेल्टा जिम्मेदार था। वहीं, जबसे ओमिक्रॉन ने दस्तक दी अमेरिका में संक्रमण की दर में भारी इजाफा हुआ है। 22 दिसंबर तक अमेरिका में हर चौथा केस ओमिक्रॉन की वजह से आ रहा है।

भारत : महज 22 दिनों के अंदर 17 राज्यों में फैला
भारत में दिसंबर 2020 के आखिर में डेल्टा वैरिएंट के मामले सामने आना शुरू हुए थे। शुरुआती एक माह में जहां कुल मामलों में से 0.73% केस ही डेल्टा वैरिएंट के थे। वहीं, भारत में महज 22 दिन के अंदर ही ओमिक्रॉन 17 राज्यों में फैल चुका है। 2 दिसंबर को ओमिक्रॉन का पहला मामला सामने आया था। देश में अब तक इस वैरिएंट के 358 मामले सामने आ चुके हैं।

जर्मनी में संक्रमण की रफ्तार तेज
जर्मनी में जब डेल्टा वैरिएंट की शुरुआत हुई थी तो 0.69% मामलों के पीछे यह जिम्मेदार था। मतलब,उस दौरान डेल्टा वैरिएंट के मामले बेहद कम थे। वहीं, ओमिक्रॉन के आने के कुछ दिन बाद ही कुल मामलों में से 9% केस के पीछे ओमिक्रॉन वैरिएंट जिम्मेदार था।

दक्षिण अफ्रीका में 95% केस ओमिक्रॉन के
दक्षिण अफ्रीका में मई की शुरुआत में जहां केवल 2% नए मामलों के पीछे डेल्टा जिम्मेदार था, जो 12 जुलाई तक बढ़कर 89% पर पहुंच गया था। वहीं, 24 नवंबर को सबसे पहले ओमिक्रॉन का मामला आया था। 13 दिसंबर तक ओमिक्रॉन दक्षिण अफ्रीका में प्रमुख वैरिएंट बन गया है। फिलहाल 95 फीसदी मामलों के पीछे इस नए वैरिएंट को जिम्मेदार माना जा रहा है।

कौन वैरिएंट कितना खतरनाक?

ओमिक्रॉन: अभी तक कुल 53 म्यूटेशन हो चुके हैं, जिनमें से 32 म्यूटेशन तो उसके स्पाइक प्रोटीन में हुए हैं। रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन में भी 10 म्यूटेशन हो चुके हैं। ओमिक्रॉन की आर वैल्यू डेल्टा से करीब छह गुना अधिक है, जिसका मतलब है कि ओमिक्रॉन से संक्रमित मरीज 35-45 लोगों में संक्रमण फैलाएगा। इस वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में 30 से अधिक म्यूटेशन की वजह से इस पर मौजूदा वैक्सीनों के बहुत कम प्रभावी रहने की आशंका है।

डेल्टाइस वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में कुल 18 म्यूटेशन हुए थे। स्पाइक प्रोटीन के जरिए ही वायरस शरीर में प्रवेश करता है। जबकि डेल्टा वैरिएंट में महज 2 ही म्यूटेशन हुआ था। रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन वायरस का वह हिस्सा है जो इंसान के शरीर के सेल से सबसे पहले संपर्क में आता है। इसकी आर वैल्यू 6-7 थी। इसका मतलब ये है कि डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित एक व्यक्ति इस वायरस को 6-7 व्यक्तियों में फैला सकता है।कोविशील्ड वैक्सीन काफी प्रभावी रही थी। वैक्सीन की एफिकेसी (प्रभावकारिता) 63 फीसदी रही थी। 

 

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

RELATED POSTS

COMMENTS

बिहार के दरभंगा में तेजी से फैल रहा डेंगू

बिहार के दरभंगा में तेजी से फैल रहा डेंगू

विशेष संवाददाता October 18 2022 28934

निरीक्षण करने पहुंचे अस्पताल अधीक्षक हरिशंकर मिश्रा ने कहा कि पहले अस्पताल में डेंगू के मरीज कम आ रह

पैरामेडिकल रैंकिंग में प्राइवेट इंस्टिट्यूट आगे

पैरामेडिकल रैंकिंग में प्राइवेट इंस्टिट्यूट आगे

अखण्ड प्रताप सिंह July 14 2023 140996

सरकार ने मिशन निरामया के तहत पूरे नर्सिंग औऱ पैरामेडिकल में सभी को एक कैटिगरी की रैंक दी गई है। नर्स

19 साल के युवक को 12 घंटे तक नहीं मिला खून, तड़प-तड़प कर हुई ट्रॉमा सेंटर कैजुअल्टी में मौत

19 साल के युवक को 12 घंटे तक नहीं मिला खून, तड़प-तड़प कर हुई ट्रॉमा सेंटर कैजुअल्टी में मौत

रंजीव ठाकुर September 05 2022 26402

डॉ सुधीर कुमार सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयू ने आरोप के सिरे से ख़ारिज करते हुए कहा कि ऐसा संभव नहीं है कि

महिलाओं के लिए मिसाल बनीं अनुराधा, कोरोना काल में पेश की सेवाधर्म की मिसाल। 

महिलाओं के लिए मिसाल बनीं अनुराधा, कोरोना काल में पेश की सेवाधर्म की मिसाल। 

February 21 2021 29968

पढ़ाई काल से ही लोगों की सेवाभाव को अपना धर्म बना लिया था। उन्होंने सेवा पेशे को चुना। जीएनएम का कोर

एक्यूपंचर चिकित्सा पद्धति को प्रदेश में मान्यता दी जाए: एक्यूपंचर स्पेशलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया

एक्यूपंचर चिकित्सा पद्धति को प्रदेश में मान्यता दी जाए: एक्यूपंचर स्पेशलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया

हुज़ैफ़ा अबरार July 06 2021 35643

प्रस्ताव के अनुसार एक्यूपंचर चिकित्सा पद्धति को केंद्र सरकार केे अनुरूप प्रदेश में भी मान्यता दी जाए

महामारी की चुनौतियों के समाधान का मार्गदर्शन करेगी द रियल क्राइसेस पुस्तक।

महामारी की चुनौतियों के समाधान का मार्गदर्शन करेगी द रियल क्राइसेस पुस्तक।

हुज़ैफ़ा अबरार January 20 2021 20242

अपनी शिक्षाओं को किसी भी प्रकार की त्रुटि के बिना भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने और उपलब्ध कराने

नेचुरल उपायों से बढ़ायें, आँखों की खूबसूरती  

नेचुरल उपायों से बढ़ायें, आँखों की खूबसूरती  

सौंदर्या राय May 08 2022 59039

आँखों के आस-पास के हिस्से को मॉइस्चराइज करने से आँखों की ख़ूबसूरती सबसे ज्यादा बेहतर बनती है।  इसके

विश्व में दूसरे नम्बर पर है भारत में मोटे बच्चों की संख्या

विश्व में दूसरे नम्बर पर है भारत में मोटे बच्चों की संख्या

लेख विभाग March 25 2022 49746

बचपन में मोटापा का मूल कारण कैलोरी खपत और खर्च की गई ऊर्जा के बीच असंतुलन है। भारतीय आनुवंशिक रूप से

कोवैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी पर फँसा है पेंच।

कोवैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी पर फँसा है पेंच।

हे.जा.स. October 20 2021 47616

कोवैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक नियमित आधार पर डब्ल्यूएचओ को आंकड़े उपलब्ध करा रहा है और डब्ल्यूएचओ

सुप्रीम कोर्ट ने सरस्वती मेडिकल कॉलेज पर नियमों की अनदेखी कर दाखिला करने पर लगाया पांच करोड़ का जुर्माना।

सुप्रीम कोर्ट ने सरस्वती मेडिकल कॉलेज पर नियमों की अनदेखी कर दाखिला करने पर लगाया पांच करोड़ का जुर्माना।

हे.जा.स. February 25 2021 23097

जुर्माने की रकम का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेज में दाखिले के इच्छुक जरूरतमंद छात्रों को व

Login Panel