











































प्रतीकात्मक
जेनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और मानव प्रजनन कार्यक्रम (HRP) का एक नया अध्ययन दर्शाता है कि विश्व भर में महिलाओं को प्रसव के दौरान बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ता है, जोकि अस्वीकार्य है। बुधवार को जारी की गई रिपोर्ट, Dignity and respect in maternity care, में मातृत्व देखभाल के लिये महिलाओं की गरिमा व सम्मान पर बल दिया गया है।
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक़, गर्भवती महिलाओं (pregnant women), किशोरवय लड़कियों (adolescent girls), व्यक्तियों और नवजात शिशुओं के साथ बुरा बर्ताव किये जाने की समस्या, दुनिया भर में व्याप्त है। रिपोर्ट बताती है कि प्रसव (labor) के दौरान महिलाओं और उनके नवजात शिशुओं के साथ किस तरह का बर्ताव किया जाता है। साथ ही, देखभाल को बेहतर बनाने के लिये रास्ता भी सुझाया गया है।
डब्लूएचओ का कहना है कि महिलाओं को हर जगह अपने अधिकारों के हनन का सामना करना पड़ता है, जिनमें निजता का अधिकार, जानकारी प्रदान किये जाने के बाद प्राप्त सहमति, और प्रसव के दौरान भरोसेमन्द साथी को चुनने का अधिकार है।

अध्ययन के अनुसार, मानवाधिकार हनन के गम्भीर मामलों में, प्रसव के दौरान बुनियादी देखभाल और मानवीय बर्ताव (humane treatment), बिना अवगत कराये सिज़ेरियन सर्जरी (caesarean surgery) के लिये प्रसूति कक्ष में ले जाने, और बच्चे के जन्म के उपरान्त, धन ऐंठने के लिये कई दिनों तक माताओं को भर्ती रखे जाने समेत अन्य समस्याएँ हैं।
अध्ययन में ऐसे मामलों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया है, जिसमें रसूख़ और धनी परिवारों के लिये नर्सरी में बच्चों की अदला-बदली की गई, प्रसव के दौरान पिटाई और अपमान किया गया, और जन्म के बाद नवजात शिशु और माताओं को अलग रखा गया।
भरोसे का अभाव - Lack of trust
अध्ययन के अनुसार, प्रसव के समय अभिभावकों और नवजात शिशुओं के साथ बुरा बर्ताव, अस्पताल संस्कृति (hospital culture) में आम बात है। ऐसा इसलिये भी होता है कि लोगों में मरीज़ों के अधिकारों, लैंगिक भेदभाव (gender discrimination) और सहानुभूतिपूर्ण देखभाल के कौशल के प्रति समझ की कमी या जानकारी नहीं है
इन कारणों से स्वास्थ्य केंद्रों (hospital culture) पर से भरोसा दरकता है, जिससे महिलाओं द्वारा प्रसव से पहले, उसके दौरान और उसके बाद स्वास्थ्य केंद्रों में देखभाल के लिये जाने की सम्भावना कम हो जाती है। इस व्यवहार के कारण महिलाओं और उनके नवजात शिशुओं (newborns) के स्वास्थ्य-कल्याण के लिये जोखिम पैदा हो जाता है और उनके जीवन के लिये ख़तरा पैदा होने की आशंका बढ़ जाती है।
देखभाल गुणवत्ता में सुधार - Improve care quality
नई रिपोर्ट में सम्मानजनक मातृत्व देखभाल के लिये सुझाव भी पेश किये गए हैं, जिसे राष्ट्रीय नीतियों, सुविधा केंद्रों में बदलावों और सामुदायिक स्तर पर जागरूकता के ज़रिये निपटा जा सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक़ हर किसी को गरिमामय मातृत्व देखभाल (improve care quality) मुहैया कराई जानी अहम है, और किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाना होगा। शोधकर्ताओं का मानना है कि प्रसव के दौरान बुरे बर्ताव के महिलाओं के अनुभवों को बेहतर ढँग से समझना और स्थिति में सुधार लाना बेहद अहम ह।
इस विषय में समझ बढ़ाने के लिये, ज़्यादा डेटा एकत्र करने, अनुभवों व उनके सन्दर्भों को समझने और ऐसे अनुभवों के प्रभावों को समग्रता से समझे जाने पर बल दिया गया है।







हुज़ैफ़ा अबरार July 07 2026 0 406
हुज़ैफ़ा अबरार July 07 2026 0 357
हुज़ैफ़ा अबरार July 09 2026 0 196
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4753
एस. के. राणा January 20 2026 0 4641
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 4585
एस. के. राणा January 13 2026 0 4403
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4333
एस. के. राणा February 01 2026 0 3962
एस. के. राणा February 04 2026 0 3759
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86826
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34714
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37936
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35413
लेख विभाग March 19 2022 0 35007
सौंदर्या राय March 16 2022 0 72455
अहमदाबाद में डॉक्टरों ने एक महिला के पेट से 47 किलोग्राम का ट्यूमर निकालकर उसे नया जीवन दिया है। ट्य
वहीं अधिकत्तर मेडिकल कॉलेज को एनआईसी से भी नहीं जोड़ा गया है।जबकि राजस्थान की सभी मेडिकल कॉलेज और र
इस योजना के तहत आने वाले व्यक्ति को हर साल पांच लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज दिया जाता है। ये इलाज सभी
मौसम परिवर्तन होने के कारण जिला अस्पताल में इलाज और ओपीडी दफ्तर में भारी भीड़ उमड़ रही है। अधिकांश ल
जायडस कैडिला ने एक बयान में कहा, ‘‘कंपनी ने जायकोव-डी के लिए डीसीजीआई के कार्यालय में ईयूए के लिए आव
एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीएसएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस पाठ्यक्रमों में दाखिला के लिए नीट (स्नातक)
देश में 118 दिन बाद संक्रमण के सबसे कम 31,443 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की कुल संख्या बढ़
रायबरेली जिले से हाथ ठेले पर मरीज के अस्पताल पहुंचने का मामला सामने आया है।
डब्ल्यूएचओ इस समय भारत बायोटेक के डेटा की समीक्षा कर रहा है और डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट पर उपलब्ध ताजा
बरेली के एम खान अस्पताल में बच्चे की जीभ के बजाए खतना करने का मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। बरे

COMMENTS