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लखनऊ। मधुमेह युवा अवस्था में ही कान की नसों (ear nerves) को सुखा रहा है। सुनने में जिस तरह की समस्या 60 साल की उम्र में होनी चाहिए वह मधुमेह रोगियों (diabetic patients) में 30 से 40 साल में ही हो रही है। मधुमेह रोगियों में नाक का संक्रमण भी तेजी से बढ़ रहा है। यही वजह है कि चिकित्सा संस्थानों (medical institutions) में मधुमेह रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
मधुमेह के नियंत्रित नहीं होने पर शरीर के विभिन्न अंगों पर इसका असर पड़ता है। अब इसका कान पर व्यापक असर देखा जा रहा है। कम सुनाई पड़ना,कान में सनसनाहट (tinnitus) रहने जैसी समस्या तेजी से बढ़ रही है।
एसजीपीजीआई (SGPGI) के न्यरो सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर (associate professor) डॉ. अमित केसरी ने बताया कि उच्च मधुमेह वाले मरीजों में कान की रक्त सेल्स (blood cells) के साथ कान के अंतरिक हिस्से की नसें कमजोर हो जाती हैं। फिर धीरे-धीरे सुनाई देना बंद हो जाता है।







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