











































प्रतीकात्मक
योग स्वाभाविक रूप से स्तन बढाने का सबसे सफल,सस्ता और सरल तरीका है। योग की मदद से आप अपनी इच्छा तक स्तन का आकार बड़ा कर सकती है और योग आपके स्तन को लूज होने से बचाता है। प्रभावी योग आसन निम्नलिखित है जिनकी मदद से आप सुडौल और मनचाहा आकार का स्तन प्राप्त करेंगी।
भुजंगासन : भुजंगासन योग की मुद्रा कोबरा की तरह होती है। भुजंगासन योग का नियमित अभ्यास स्तन आकार को बढ़ाने में मदद करता है और योग आसन काफी सरल भी है। भुजंगासन योग करने के लिए सबसे पहले आप बिलकुल सीधा होकर लेट जाएं उसके बाद हथेली को फर्श पर दबाते हुए शरीर के अगले भाग को ऊपर की तरफ उठा लें। इस योग मुद्रा का अभ्यास करते हुए ईमानदारी से इस बात की जाँच कर ले कि आपका आधा पेट उपर की तरफ हो और पैर जमीन से चिपके बिलकुल सीधे हो। कुछ सेकंड तक अपने आप को इसी स्थिति में रखें उसके बाद आराम में फर्श पर सिर को गिरा लें।
इस स्थिति को 5-6 बार कम से कम दोहराएँ फिर धीरे-धीरे संख्या में वृद्धि करें और यदि कोई हर्निया या अन्य बीमारी है तो बिना डॉक्टरी सलाह के इस योग आसन को ना करें।
गोमुखासन : इस आसन को गाय मुख योग के नाम से भी जाना जाता है क्योकि इस योग को करते समय योगी की स्थिति एक गाय के मुख की तरह हो जाती है। स्तन वृद्धि के लिए इस योग को प्रभावी पाया गया है। कमल में मुद्रा बैठ कर योग आसन को शुरू करें।
पैरों के उपर पैर जमाने के बाद बाएं हाथों को कमर के पीछे से उपर की ओर ले जाए और दाहिने हाथ से सिर के पास से बाएं हाथ को पकड़ने लें। ऐसी ही क्रिया विपरीत दिशा में दोहराएँ।
उष्ट्रासन : अगर आप को लगता है उष्ट्रासन नाम ऊंट की तरफ इशारा कर रहा है तो आप बिलकुल सही सोच रही है जब आप उष्ट्रासन पोजीसन में होते है तो आपकी बॉडी देखने में ऊंट जैसी लगती है। इस योग को अभ्यास करने के लिए अपने घुटनों पर आराम से बैठ जाएं और उसके बाद घुटनों से पूरे शरीर को ऊपर की तरफ करें और हाथों पीछे की तरफ करते हुए अपनी दोनों ऐड़ीयों को पकड़े। जब आप इस मुद्रा में आ जाएं तो सिर जितना पीछे की तरफ ले जा सकती है लेकर जाएं। कुछ सेकंड के लिए इस मुद्रा में रहे और फिर अपनी सुविधा के अनुसार इस प्रक्रिया को दोहराते रहे। उष्ट्रासन करने से स्तन का आकार तो बढ़ता है साथ में यह योग आपके स्तन को लूज नही होने देता है।
वृक्षासन : सावधान मुद्रा से शुरू होने वाला यह योग बॉडी संतुलन पर टिका होता है। देखने में वृक्षासन जितना सरल लगता है असल में उतना सरल यह है नही।
जैसा की हम पहले ही बता चुके है यह मुद्रा सावधान स्थिति से शुरू होती है। सावधान होने के बाद एक पैर को उठाकर अपनी जांघों पर रख लें और दोनों को हाथों को सीधा ऊपर कर नमस्ते की मुद्रा धारण कर श्वास लेने और छोड़ने की प्रक्रिया धीरे-धीरे शुरू कर दें। कुछ समय तक एक मुद्रा में रहने के बाद विपरीत दिशा से दोहराएँ। वृक्षासन स्तन आकार को बढाने और उनमे रक्त संचार की क्रिया को सामान्य करता है।
द्विकोण आसन : स्तन का आकार बढाने वाला यह प्रभावी आसन भी देखने में बिलकुल सरल लगता है और यह भी वृक्षासन की संतुलन बना कर खड़े होकर किया जाता है। द्विकोण आसन करने के लिए सबसे पहले पैरों को सामान्य मुद्रा में खोल लें और उसके बाद दोनों हाथों को अपने बॉडी के पीछे ले जा कर,हाथों की उँगलियों को आपस में जोड़ लें और उसके बाद धीरे-धीरे साँस लेने और छोड़ने के प्रक्रिया करें। 20 से 30 सेकंड मुद्रा में टिके रहने के बाद इसे सुविधा अनुसार दोहराया जा सकता है।







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