











































हेल्थ जागरण ने होम्योपैथिक चिकित्सा को लेकर पूर्व होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ अनिरुद्ध वर्मा से बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्नों चर्चा किया। उन्होंने हेल्थ जागरण के प्रयास को सराहनीय बताया। रोगों को जड़ से समाप्त करने की बात करते हुए डॉक्टर साहब ने कहा कि होम्योपैथी को बढ़ावा दे कर सस्ता और आसान इलाज जनता को मुहैया करवाया जा सकता है। प्रस्तुत है वार्ता का विवरण।
डॉ अनिरुद्ध वर्मा- हेल्थ जागरण के प्रयासों का मैं स्वागत करता हूँ एवं शुभकानाएं देता हूँ।
हुज़ैफ़ा अबरार- होम्योपैथी की स्वीकारिता बढ़ी है लेकिन रिसर्च और डेवलपमेंट नहीं हो पा रहें है, इसकी वजह क्या है ?
डॉ अनिरुद्ध वर्मा - निश्चित रूप से स्वीकारिता बढ़ी है। होम्योपैथी में रोगों के उपचार की, रोगों के रोकथाम की और रोगों को जड़ से ख़तम करने की क्षमता हैं। विगत 200 सालों में इसमें बहुत परिवर्तन आया है। विकास, शोध और अनुसंधान के लिए धन की आवश्यकता होती है। सरकार के सहयोग नहीं करने के कारण इसके विकास और शोध की गति धीमी है। पर्याप्त बजट मिलने पर तेज़ी के साथ शोध होगा।
हुज़ैफ़ा अबरार- जिस प्रकार की सुविधाएं एलोपैथी डॉक्टरों मिलती है। क्या उस प्रकार की सुविधाएँ आप लोगों को मिलतीं हैं?
डॉ अनिरुद्ध वर्मा- आपका प्रश्न बिलकुल सही है। अगर केंद्र सरकार का बजट देखे, स्वास्थ्य का बजट लगभग 2 लाख 23 करोड़ रुपये का है जिसमें से 2 हज़ार 900 करोड़ रुपये का बजट होम्योपैथी को मिला है। जो स्वाथ्य बजट का एक प्रतिशत है। इस छोटे से बजट में होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति किस प्रकार विकास करेगी यह सोचने का विषय है। अगर बात करतें हैं नौकरियों की, चिकित्सा संस्थानों की और शोध संस्थानों की, तो होम्योपैथी के मात्र 1600 राजकीय होम्योपैथी चिकित्सालय हैं और 9 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। एलोपैथी में 16,000 चिकित्सालय और मेडिकल अधिकारी काम कर रहें हैं। इस कारण उन की सुविधांए ज़्यादा दूर तक पहुचतीं है और हमारी नहीं पहुंच पातीं हैं। फिर भी हर पाँचवाँ आदमी होम्योपैथिक चिकित्सा ले रहा है। तमाम अभाव में, तमाम कमी के बाद हमारे चिकित्सक काम कर रहें हैं।
हुज़ैफ़ा अबरार- ऐलोपैथिक में नए शोध हो रहें हैं, नयी जांचे हो रही हैं और नयी बीमारियों का पता चल रहा है। क्या। होमयोपैथी में ऐसा हो रहा है?
डॉ अनिरुद्ध वर्मा- भारत सरकार की संस्था केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद् शोध कर रही है। संसाधन केअभाव में शोध का क्षेत्र व्यापक नहीं है। जितना बजट अन्य चिकित्सा पद्धतियों को मिलता है, उसका पाँच फीसदी भी यदि होम्योपैथी को मिल जाए तो हम वही परिणाम देंगे। कम पैसे और सीमित संसाधनों में हम ज़्यादा अच्छा परिणाम दे पाएंगे।
यदि रोगों को जड़ से ठीक करना है, स्वास्थ्य प्रदान करना है, गाँव-गाँव, घर-घर तक चिकित्सा सुविधा पहुचानी है तो एक मात्र विकल्प होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति ही है। चिकित्सा पद्धति में आत्मनिर्भर होने के लिए होम्योपैथी अपनाना होगा। यह जड़ से रोगों को ठीक करने वाली चिकित्सा पद्धति हैं।







हुज़ैफ़ा अबरार June 07 2026 0 1533
हुज़ैफ़ा अबरार June 01 2026 0 1204
हुज़ैफ़ा अबरार June 04 2026 0 994
हुज़ैफ़ा अबरार June 10 2026 0 833
हुज़ैफ़ा अबरार June 12 2026 0 791
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4438
एस. के. राणा January 20 2026 0 4312
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 4284
एस. के. राणा January 13 2026 0 4193
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 3962
एस. के. राणा February 01 2026 0 3619
एस. के. राणा February 04 2026 0 3521
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86623
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34441
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37642
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35217
लेख विभाग March 19 2022 0 34720
सौंदर्या राय March 16 2022 0 72098
जीएसवीएएम मेडिकल कॉलेज में 1982 में स्पीच थेरेपी सेंटर खोला गया था। 40 साल से ये संस्था हकलाने वाले
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार अब एक से अधिक बार चिकित्सक द्वारा गर्भवती महिलाओं
इसके सेवन से पेट की गैस, अपच और आव की दिक्कत दूर हो जाती है। खांसी और कफ में यह आपको आराम देता है। द
सुबह के समय पार्क या घर में व्यायाम करें। व्यायाम करने से आपका शरीर सुडौल बना रहता है और रक्तसंचार अ
नए अस्पताल में 100 बेड का पुरुष और 100 बेड का महिला अस्पताल बनाने की तैयारी है। इसके लिए सीएमओ को पा
डॉक्टरों की एक टीम ने ऑपरेशन कर विशाल के शरीर से महिलाओं वाले अंगों को निकाल दिया है, लेकिन अभी भी
पेटीएम ऐप के जरिए यूजर्स प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जुड़े निजी और सरकारी अस्पतालों में उपयोगकर्
मिर्गी के मरीज के परिजन अज्ञानता की वजह से मिर्गी से जुडी भ्रांतियों पर आँख मूँद कर विश्वास कर लेते
कब्ज के सटीक कारण की पहचान करना अक्सर मुश्किल होता है। हालाँकि, ऐसी कई चीजें हैं जो इस स्थिति में यो
उपमुख्यमंत्री तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सख

COMMENTS