











































प्रतीकात्मक
लखनऊ। बच्चों में दस्त-बुखार का मौसम शुरू हो चुका है लेकिन यह दस्त होने की वजह कोरोना भी हो सकता है। जी हां, इंडिया एकेडमी आफ पिडियाट्रिक्स ने जो गाइडलाइन जारी की है उसमें पेट दर्द, उल्टी और दस्त कोरोना के वेव टू के लक्षण बताए गए हैं।

कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर में बच्चों के ज्यादा प्रभावित होने की आंशका के बीच अभिभावकों के लिए जारी इस गाइडलाइन में बताया गया है कि खांसी, हल्का कफ, बुखार और बदन दर्द कोरोना के लक्षण हैं ही लेकिन इस वायरस की दूसरी लहर में दस्त भी कोरोना के लक्षण के तौर पर देखा गया है। इसलिए अगर बच्चे को दस्त है तो उसे हल्के में न लें।
गाइडलाइन के मुताबिक अगर बच्चे को तीन दिन से ज्यादा बुखार आ रहा है या परिवार में किसी को कोरोना हुआ है तो भी बच्चे का कोरोना टेस्ट कराना चाहिए।
केजीएमयू की बाल रोग विभाग की एडिशनल प्रोफेसर डा. शालिनी त्रिपाठी ने गाइडलाइन में दिए गए इस लक्षण को सही बताते हुए कहा कि केजीएमयू में भी कुछ महीनों पहले ऐसा एक केस आया था। एक बच्ची को दस्त हो रहे थे। उसका स्टूल टेस्ट कराने पर वह कोरोना पाजिटिव पाई गई थी। बाद में उसका इलाज किया गया और वह ठीक हो गई।

उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण दस्त होने के केस कम हैं लेकिन इसे नकारा नहीं जा सकता। अभिभावकों को सजग रहना होगा। डायरिया पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु का एक बड़ा कारण है। बार-बार बच्चों को डायरिया होने पर उनमें कुपोषण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इससे बचाव जरूरी है।
डॉ. शालिनी के मुताबिक अक्सर बच्चों में डायरिया होने पर डिहाइड्रेशन यानी निर्जलीकरण की संभावना रहती है, जिससे गंभीरता बढ़ सकती है और बच्चे के जीवन के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है। आम तौर पर वायरस से होने वाले डायरिया में एंटीबायोटिक कारगर नहीं होते।
बच्चों में दस्त के कारण
बचाव के उपाय
डायरिया का इलाज
अगर बच्चे को दस्त की समस्या हो गई है तो घबराएं नहीं बल्कि किसी दवा से पहले पानी की कमी से बचाएं। इसके लिए बच्चे को लिक्विड पदार्थ दें। जीवनरक्षक घोल यानी ओआरएस पिलाएं। हर दस्त के बाद ओआरएस देना चाहिए लेकिन ध्यान रखना है बहुत चीनी वाले पेय पदार्थ, शरबत या बाजार के पेय पदार्थ आदि न दें। घर पर ही नींबू पानी में नमक और चीनी मिलाकर पिलाएं। लस्सी, छाछ, नारियल पानी दे सकते हैं।







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