देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

स्वास्थ्य

सोशल मीडिया तो ठीक पर इसकी लत आपका मेंटल हेल्थ खराब कर देगी

सोशल मीडिया को एक टूल की तरह इस्तेमाल करना कहीं से गलत नहीं पर इसमें पूरी तरह डूब जाना, इसका एडिक्ट हो जाना आपके मेंटल हेल्थ के लिए कहीं से भी उचित नहीं है...

लेख विभाग
April 06 2022 Updated: April 06 2022 09:14
0 34227
सोशल मीडिया तो ठीक पर इसकी लत आपका मेंटल हेल्थ खराब कर देगी प्रतीकात्मक फोटो

पारूल ने अपनी मम्मी को लंदन से जन्मदिन की बधाई वाट्सएप पर दी। मैसेज सेंड करने के बाद वह लगातार ब्लू टिक की प्रतीक्षा करती रही। जब आधा घंटा हो गया तो उसने झल्लाकर अपने हस्बेंड से कहा-यार, मम्मी तो वाट्सएप पर आ ही नहीं रही हैं। आधा घंटा हो गया। उन्होंने मेरा मैसेज तक नहीं देखा है। मम्मी मुझसे प्यार नहीं करती।

यह कह कर वह जोर-जोर से रोने लगी। पारूल के हस्बेंड ने समझाया कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। मम्मी जी किसी काम में फंस गई होंगी। इसलिए उन्होंने नहीं देखा। इसका अर्थ यह थोड़े ही हुआ कि वह तुम्हें प्यार नहीं करती। पारूल ने कहा, तुम नहीं जानते। मम्मी चाहती ही नहीं थी कि मैं इस दुनिया में आऊं...वह फिर सुबकने लगी।

ठहरिये दोस्तों। पारूल सिर्फ एक उदाहरण है। ऐसी हजारों पारूल हैं अपने देश में या दुनिया भर में जो वाट्सएप मैसेज भेजने के बाद तब तक उसे देखती रहती हैं जब तक ब्लू टिक न आ जाए। अगर किसी ने ब्लू टिक न दिखने का आप्शन बंद कर रखा हो और दो मिनट के भीतर कोई रिप्लाई (Reply) न करे तो लोग फोन करने लग जाते हैं कि भई, तुम्हें मैसेज दिया था। अब तक तुमने देखा ही नहीं।

असल में, आज की तारीख में सोशल मीडिया हमारे जीवन का हिस्सा बन गया है। क्या फेसबुक, क्या ट्विटर, क्या वाट्सएप, क्या इंस्टाग्राम...सब लोकप्रिय हैं और सभी में आज के नौजवान लोग बिजी रहते हैं। ये एक किस्म का एडिक्शन ही है जो आपको कभी बेहद उत्तेजित कर देता है, कभी एकदम शांत। आप किसी के मरने की खबर पाकर रोने लगते हैं, कभी किसी की शादी की फोटो देख कर गुनगुनाने लगते हैं, फोन करने लगते हैं, दोस्तों को इन्फार्म करने लगते हैं कि देखो, साले ने शादी कर दी। इंस्टा पर फोटो शेयर किया है....दरअसल, ये उत्तेजना, ये शिथिल हो जाना ही एक किस्म की दिमागी समस्या है। ये मानसिक बीमारी के लक्षण हैं।

कई लोगों को आपने देखा होगा कि वे आफिस में या घर पर भी आपसे बात कर रहे होते हैं तो कभी आपकी तरफ देखेंगे, कभी मोबाइल की तरफ। बिना मतलब के भी ये मोबाइल को स्क्राल (Scroll) करते रहते हैं। ये मानसिक रुप से अस्वस्थ लोगों की शुरुआती निशानियां हैं।

एक दौर था, जब लोग सुबह उठते थे और भगवान का नाम लेकर शौच आदि से निवृत्त होकर अपनी दिनचर्या प्रारंभ करते थे। आज के दौर में कई लोग ऐसे हैं जो सुबह उटते ही कम से कम 1 घंटा इंस्टा पर टाइम स्पेंड करने के बाद ही फ्रेश होते हैं। कुछ लोग तो ऐसे हैं जो उठते ही फोन उठाएंगे और खामखा सभी का स्टेटस (Status) चेक करने लगेंगे। कुछ लोग भजन लगा लेंगे और भजन सुनने के साथ ही फेसबुक भी देखेंगे। फेसबुक से मन भर जाएगा तो मैसेंजर पर जाएंगे। वहां भी लोगों को चेक करेंगे।

सच-सच बताएं, क्या आपमें  भी यही आदत है? एकबारगी आप इसे बेहद सामान्य बात कह कर उड़ा देंगे पर ये सामान्य बात नहीं है। सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल हमारे मानसिक स्वास्थ्य (Mental health) से जुड़ा हुआ है। महाराष्ट्र की एक मनोचिकित्सक तीथी कुकरेजा कहती है कि  इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि सोशल मीडिया ने हमें हमारे मित्रों, परिजनों आदि से दूर कर दिया है। हर कोई अपनी कोठरी में अकेला है। यह अकेलापन अवसाद पैदा करता है जो सीधे-सीधे मानसिक बीमारी है। अब हम आत्मचिंतन नहीं करते। हम अपने एकाकीपन को भरने के लिए फोन के भरोसे हैं। यह बेहद खतरनाक है।

उपाय क्या है

सोशल मीडिया से जुड़े रहें पर उतना ही, जितने की जरूरत है। माता-पिता, घर-परिवार, दोस्त-रिश्तेदार, इन सभी से मिलें। बातें करें। पुराने मुद्दों पर बात करें। नए मुद्दों पर बात करें पर चुप न रहें। घूमते-फिरते रहें। परिवार के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करें। कोशिश करें कि सभी के साथ आमने-सामने बातें हों। जब बातचीत चल रही हो तो सोशल मीडिया का जिक्र न हो। अच्छी बातें करें। इससे आपकी तंत्रिका तंत्र और बढ़िया तरीके से फंक्शन करेगी।

लेखक - आनंद सिंह 

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

RELATED POSTS

COMMENTS

मुँहासों के उपचार के लिए ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स ने लॉन्च किया मिन्यम जेल

मुँहासों के उपचार के लिए ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स ने लॉन्च किया मिन्यम जेल

हुज़ैफ़ा अबरार July 15 2022 37982

ग्लेनमार्क द्वारा वर्ष 2020 में भारत में मुँहासों की व्यापकता पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार 45 प्रति

केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने देश भर के डॉक्‍टरों के साथ की बैठक 

केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने देश भर के डॉक्‍टरों के साथ की बैठक 

एस. के. राणा December 27 2022 32887

डॉ मांडविया ने डॉक्टरों और आईएमए के सदस्यों से कोविड 19 के बारे में प्रामाणिक जानकारी का प्रसार जार

आज के पौधे कल के आक्सीजन प्लांट: डा. सूर्यकान्त  

आज के पौधे कल के आक्सीजन प्लांट: डा. सूर्यकान्त  

हुज़ैफ़ा अबरार September 03 2021 25732

राजकीय नर्सेस संघ केजीएमयू के सहयोग से ‘प्रत्येक व्यक्ति-एक पौधा’ थीम के तहत वृहद वृक्षारोपण का आयोज

एमवे इंडिया शत-प्रतिशत प्लास्टिक वेस्ट न्यूट्रल बना

एमवे इंडिया शत-प्रतिशत प्लास्टिक वेस्ट न्यूट्रल बना

रंजीव ठाकुर August 25 2022 21363

एमवे इंडिया 100% पोस्ट-कंज्यूमर प्लास्टिक वेस्ट का प्रबंधन करने और 100% प्री-कंज्यूमर प्लास्टिक वेस्

गुजरात में दर्ज हुआ पहला XBB.1.5 वैरिएंट का केस

गुजरात में दर्ज हुआ पहला XBB.1.5 वैरिएंट का केस

विशेष संवाददाता January 01 2023 39067

अमेरिका और ब्रिटेन में इस नए वैरिएंट XBB.1.5 ने तबाही मचा रखा है। अब ये भारत भी पहुंच गया है। गुजरात

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के 50 वर्ष पूरे होने पर मनाया जाएगा स्वर्ण जयंती समारोह

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के 50 वर्ष पूरे होने पर मनाया जाएगा स्वर्ण जयंती समारोह

अनिल सिंह October 15 2022 30347

स्वर्ण जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ हो सकते हैं। उपराष्ट्रपति कार्यालय

सुप्रीम कोर्ट ने सरस्वती मेडिकल कॉलेज पर नियमों की अनदेखी कर दाखिला करने पर लगाया पांच करोड़ का जुर्माना।

सुप्रीम कोर्ट ने सरस्वती मेडिकल कॉलेज पर नियमों की अनदेखी कर दाखिला करने पर लगाया पांच करोड़ का जुर्माना।

हे.जा.स. February 25 2021 23097

जुर्माने की रकम का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेज में दाखिले के इच्छुक जरूरतमंद छात्रों को व

केंद्र सरकार की वैक्सीनेशन पॉलिसी ठीक  लेकिन किसी भी व्यक्ति को जबरदस्ती टीका नहीं लगाया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

केंद्र सरकार की वैक्सीनेशन पॉलिसी ठीक लेकिन किसी भी व्यक्ति को जबरदस्ती टीका नहीं लगाया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

एस. के. राणा May 02 2022 24995

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह भी आदेश दिया है कि वैक्सीन लगवाने से होने वाले साइड-इफेक्ट्स के

आखिर क्यों दोबारा होता है कोविड-19 संक्रमण, जानें इससे बचाव के उपाय

आखिर क्यों दोबारा होता है कोविड-19 संक्रमण, जानें इससे बचाव के उपाय

श्वेता सिंह August 25 2022 23861

सीडीसी (CDC) के मुताबिक किसी व्यक्ति में एक से अधिक बार संक्रमण होने को रि-इंफेक्शन कहा जाता है। को

टीके की दोनों खुराक लेने के बाद गंभीर संक्रमण का जोखिम नगण्य हो जाता है: शोध

टीके की दोनों खुराक लेने के बाद गंभीर संक्रमण का जोखिम नगण्य हो जाता है: शोध

हे.जा.स. February 09 2022 38141

द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक टीके से पैदा हुई प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कुछ महीन

Login Panel