











































लखनऊ। हर साल 8 जून को जागरुकता बढ़ाने के लिए वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे का आयोजन किया जाता है। आज इस अवसर पर हेल्थ जागरण ने अपोलो अस्पताल में न्यूरो सर्जन डॉ सुनील कुमार सिंह (एमबीबीएस, एमएस, एमसीएच) से खास बातचीत की।
डॉ सुनील कुमार सिंह ने बताया कि इस दिन की शुरुआत जर्मनी से हुई थी और आज यह दिन पूरी दुनिया में मनाया जाता है। भारत की बात करें तो लगभग 30 हजार मरीज ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित हैं जबकि यह आंकड़ा ज्यादा भी हो सकता है। कारण की बात करें तो जेनेटिक कारण भी हो सकते हैं या फिर अपने आप भी हो सकता है। लक्षण की बात करें तो मस्तिष्क के अलग अलग हिस्सों में ब्रेन ट्यूमर होने के अलग अलग लक्षण होते हैं। कुछ कैंसर होते हैं और कुछ बेनाइन भी होते हैं। एक मिथ्या धारणा है कि ब्रेन में कुछ भी हो जाए तो उसका इलाज नहीं हो सकता है, यह आज की डेट में गलत धारणा है। विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि सर्जरी करके ट्यूमर को निकाला जा सकता है और बिना ऑपरेशन के भी ट्रीटमेंट किया जा रहा है।

हेल्थ जागरण - डॉ साहब आम आदमी की बात करें तो ऐसे कौन से लक्षण है जिससे ब्रेन ट्यूमर की पहचान की जा सकें?
डॉ सुनील सिंह - ये लक्षण अलग अलग हिस्सों के हिसाब से होते हैं। आमतौर पर सर दर्द होना, लगातार सिर दर्द होते रहना, उल्टी आना, धुंधला दिखाई देना, निगलने में दिक्कत होना, चलने फिरने में दिक्कत होना या हाथ पैर में सामंजस्य नहीं होना भी हो सकता है।
हेल्थ जागरण - निदान (डायग्नोज) के क्या तरीके हैं?
डॉ सुनील सिंह - पहले डॉक्टर मरीज के लक्षण देखते हैं फिर रेडियोलॉजी टेस्ट जैसे सीटी स्कैन, एमआरआई आदि से ब्रेन ट्यूमर की पहचान की जाती है।
हेल्थ जागरण - आज ब्रेन ट्यूमर डे पर क्या संदेश देना चाहेंगे, आम आदमी क्या करें और क्या ना करें?
डॉ सुनील सिंह - इसकी जागरूकता बहुत जरूरी है। जल्दी लक्षणों को पहचानें और डॉक्टर के पास पहुंचे। इसके अलावा रेडिएशन यानी मोबाइल या मोबाइल टॉवर से दूरी बना कर रखनी चाहिए।
हेल्थ जागरण - डॉ साहब आपने मोबाइल की बात कही है। पहले लोग मोबाइल ऊपर की जेब में रखते थे फिर नीचे आगे की जेब में रखने लगे और अब पीछे की जेब में रखते है, इसमें क्या सही है? मोबाइल कहां रखना चाहिए?
डॉ सुनील सिंह - देखिए मोबाइल शरीर से दूर ही रहना चाहिए। कोशिश करें कि ईयर फोन या ब्लूटूथ का इस्तेमाल करें। ऊपर की जेब में रखने से हार्ट पर असर पड़ता है। हालांकि अब उच्च क्वालिटी के मोबाइल आ रहें हैं जिनमें रेडिएशन कम होता है लेकिन जितना हो सके मोबाइल शरीर से दूर रखना चाहिए।







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