











































Amit Kumar Ghosh Additional Chief Secretary Medical Health & Family Welfare and Medical Education Uttar Pradesh
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में संचालित 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान ने अपने पहले 50 दिनों में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज करते हुए टीबी उन्मूलन की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया है। अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदेश भर में व्यापक स्तर पर सक्रिय स्क्रीनिंग आधुनिक तकनीक आधारित जाँच और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से बड़ी संख्या में संभावित मरीजों की पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ा गया है। अभियान के अंतर्गत अब तक 22 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। स्क्रीनिंग के दौरान चिन्हित संदिग्ध मरीजों की पुष्टि के लिए 15 लाख से अधिक एक्स-रे तथा 4 लाख से अधिक नैट जाँचें कराई गई हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप कुल 96 हजार से अधिक नए टीबी मरीजों को निक्षय पोर्टल पर नोटिफाई कर उनका उपचार प्रारंभ कराया गया है। इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि उन मरीजों की पहचान रही है जिनमें टीबी के सामान्य लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक 28 हजार से अधिक ऐसे लक्षणविहीन (एसिम्प्टोमैटिक) मरीजों की पहचान की गई है। जिनका समय रहते पता लगना संक्रमण की श्रृंखला को रोकने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह उपलब्धि फील्ड स्तर पर सघन स्क्रीनिंग सक्रिय खोज अभियान और तकनीक के प्रभावी उपयोग का परिणाम है।
राज्य के दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए विशेष शिविरों का व्यापक आयोजन किया गया। प्रदेश में अब तक 11 हजार से अधिक आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित किए जा चुके हैं जिनमें 9 लाख से अधिक लोगों ने स्वास्थ्य परामर्श और जाँच सेवाओं का लाभ प्राप्त किया। इन शिविरों ने ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के साथ संभावित मरीजों की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। टीबी उन्मूलन को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए सामुदायिक सहभागिता पर विशेष बल दिया गया है। अभियान के दौरान 4 हजार नए निक्षय मित्रों ने पंजीकरण कर मरीजों के पोषण एवं सहयोग की जिम्मेदारी संभाली है। अब तक 1 लाख से अधिक पोषण किट का वितरण किया जा चुका है, जिससे उपचाररत मरीजों को पोषण सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
अभियान में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निकायों की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिली है। प्रदेश भर में 12 हजार से अधिक पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों 3 हजार से अधिक अर्बन लोकल बॉडी के प्रतिनिधियों तथा 300 से अधिक सांसदों विधायकों एवं विधान परिषद सदस्यों ने अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में सहयोग किया है। इसके अतिरिक्त स्कूलों कॉलेजों और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को भी टीबी के प्रति जागरूक किया गया। गांव-गांव तक जागरूकता संदेश पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया जन-संवाद और माइकिंग का सहारा लिया जा रहा है। राज्य क्षय रोग सेल के अनुसार अभियान के अगले चरण में उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों और संवेदनशील आबादी पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा ताकि कोई भी संभावित मरीज जाँच और उपचार से वंचित न रहे। विभाग का लक्ष्य टीबी की शीघ्र पहचान, समय पर उपचार और सामुदायिक सहयोग के माध्यम से प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना है।
अमित कुमार घोष अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण चिकित्सा शिक्षा उत्तर प्रदेश ने कहा मुख्यमंत्री के नेत्रत्व एवं उप मुख्य मंत्री के मार्गदर्शन में संचालित यह अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जन-भागीदारी और स्वास्थ्य विभाग की प्रतिबद्धता का प्रभावी उदाहरण बन चुका है। उन्होंने कहा 28 हजार से अधिक लक्षणविहीन मरीजों की पहचान यह दर्शाती है कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें जमीनी स्तर पर गंभीरता और समर्पण के साथ कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया कि हैंडहेल्ड एक्स-रे एआई आधारित तकनीक और आधुनिक जाँच सुविधाओं के उपयोग से मरीजों की शीघ्र पहचान संभव हो रही है। उन्होंने बताया अभियान के अगले चरण में उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों और संवेदनशील आबादी पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा ताकि कोई भी संभावित मरीज जाँच और उपचार से वंचित न रहे। विभाग का लक्ष्य टीबी की शीघ्र पहचान, समय पर उपचार और सामुदायिक सहयोग के माध्यम से प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि निक्षय मित्रों जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों का सहयोग इस अभियान को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि हर नागरिक इस अभियान से जुड़े और टीबी हारेगा देश जीतेगा के संकल्प को साकार करने में अपनी भूमिका निभाए। स्वास्थ्य विभाग को विश्वास है कि निरंतर जन-सहभागिता तकनीक आधारित जाँच और प्रभावी उपचार व्यवस्था के माध्यम से उत्तर प्रदेश टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को निर्धारित समय से पहले प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।







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