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तन और मन को स्वस्थ्य रखने का वैज्ञानिक आधार है सही तरीके से किया गया उपवास

उपवास वैसे तो कई प्रकार के होते हैं। कोई सुबह उपवास रखता है, कोई रात को। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि उपवास में खाद्य पदार्थों की बजाय अगर तरल पदार्थों का सेवन किया जाए, तो उससे शरीर का सही डिटॉक्सिफिकेशन होता है।

लेख विभाग
April 02 2022 Updated: April 02 2022 23:01
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तन और मन को स्वस्थ्य रखने का वैज्ञानिक आधार है सही तरीके से किया गया उपवास प्रतीकात्मक

चैत्र नवरात्र शुरू हो चुके हैं, जिसमें उपवास रखने से विशेष दैवीय प्राप्तियां होने की बात कही जाती है। घर में सुख-शांति व समृद्धि आती है। इसी के साथ रमज़ान का महीना भी शुरु होने वाला है जिसके मूल में रोज़ा (उपवास ) है  माना जाता है कि उपवास का जितना असर तन पर होता है, उतना ही मन भी स्वस्थ रहता है। आइए जानते हैं कि आखिर उपवास यानी फास्टिंग के क्या हैं फायदे....

उपवास वैसे तो कई प्रकार के होते हैं। कोई सुबह उपवास रखता है, कोई रात को। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि उपवास में खाद्य पदार्थों की बजाय अगर तरल पदार्थों का सेवन किया जाए, तो उससे शरीर का सही डिटॉक्सिफिकेशन होता है। इससे पाचन बेहतर होता है और साथ ही पेट संबंधी अनेकानेक परेशानियां कम होती हैं। जब पेट ठीक रहता है, तो चेहरे की चमक भी बनी रहती है।

इंटरमिटेंट फास्टिंग पूरी सावधानी के साथ - Intermittent fastening with utmost care

इन दिनों देश-विदेश हर जगह मोटापे (obesity) की समस्या एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। वजन कम करने के लिए लोग तमाम तरह की उपवास विधि को अपना रहे हैं, जिसमें इंटरमिटेंट फास्टिंग एक है। इससे बढ़ती चर्बी को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही शरीर हानिकारक एवं विषाक्त पदार्थों (toxic substances) से मुक्त हो जाता है।  व्यक्ति ऊर्जावान महसूस करता है। डाइटिशियन (Dietician) एवं वेलनेस एक्सपर्ट कृति श्रीवास्तव बताती हैं कि इंटरमिटेंट फास्टिंग में ठोस पदार्थ की जगह तरल पदार्थों का सेवन किया जाता है। इसमें एक निश्चित समय में ही खाना खाते हैं। हर दिन कुछ घंटों (8 से लेकर 16 घंटे) के लिए फास्ट करना या हफ्ते में एक-दो दिन सिर्फ एक बार भोजना करना होता है। इससे शरीर में स्टोर फैट (stored fat) को बर्न करने में मदद मिलती है लेकिन यह फास्टिंग कभी भी अपने मन से नहीं, बल्कि चिकित्सकों की निगरानी एवं परामर्श से करनी चाहिए। क्योंकि डाइट या जीवनशैली में बड़े बदलाव से कई प्रकार के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। आपको सिरदर्द, थकान, चक्कर आने या भूख कंट्रोल न कर पाने की शिकायत हो सकती है। इसलिए सोच-समझकर ही इसे करें।

उपवास के दौरान शरीर की जरूरतों को सुनें - Observe to the needs of the body during fasting

जैसा कि सभी को ज्ञात है कि मानव शरीर में 70 फीसद तक पानी है। इसलिए हमें हाइड्रेटेड (hydrated) रहना जरूरी होता है। पानी पीने के कई फायदे हैं, जो उपवास के दौरान और आवश्यक हो जाता है। इससे न सिर्फ शरीर के टॉक्सिंस (toxins) बाहर निकलेंगे, बल्कि स्किन में चमक, मसल मजबूत होगी। कहना गलत नहीं होगा कि किसी भी प्रकार के उपवास के समय अपने शरीर की जरूरतों पर ध्यान दें। उसे सुनने की कोशिश करें। विशेषज्ञों के अनुसार, सही तरीके से की गई फास्टिंग से न सिर्फ वजन नियंत्रित रहता है, बल्कि इससे ब्लड शुगर (blood sugar) को बेहतर ढंग से मैनेज किया जा सकता है। हां, कई बार ऐसा हो सकता है कि फास्टिंग करने से शुगर लेवल कम हो जाए, तो उसके लिए पर्याप्त सावधानी रखनी होती है। ऐसे में डाक्टर से पहले ही सलाह ले लेना अच्छा रहेगा।

मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद फास्टिंग - Fasting beneficial for mental health

फास्टिंग अर्थात उपवास की एक और बड़ी विशेषता है कि इससे मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है, क्योंकि जब आप उपवास करते हैं, तब रक्त एवं लिम्फैटिक सिस्टम (lymphatic system) से विषाक्त पदार्थ का बहाव भी कम होता है और दिमाग बेहतर तरीके से सोच पाता है। मस्तिष्क को शुद्ध रक्त मिलने से वह ऊर्जा का इस्तेमाल भी कहीं अच्छे से कर पाता है। इससे याद्दाश्त (memory) अच्छी होती है। कुल मिलाकर कहें कि उपवास करना हर प्रकार से लाभकारी है, बशर्ते कि उसे सही रूप से किया जाए।

 लेखक - अंशु

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