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लखनऊ। 2025: मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ, में आज ‘हार्ट हेल्थ कार्निवल’ का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों से आए 1,000 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
इस पहल के बारे में मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल लखनऊ के कार्डियोलॉजी कार्डियक साइंसेज़ के चेयरमैन डॉ. नकुल सिन्हा ने कहा पारंपरिक रूप से दिल के रोग, खासकर कोरोनरी आर्टरी डिजीज को केवल बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था। लेकिन पहचान और डायग्नोसिस में हुई प्रगति के चलते अब यह साफ़ हो गया है कि दिल का रोग किशोर और युवाओं के साथ सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है।
इस रोग की घटनाओं और प्रसार में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है, जिसका मुख्य कारण डायबिटीज़, हाई ब्लडप्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, स्मोकिंग और लाइफस्टाइल की परेशानियां हैं। हार्ट अटैक और अचानक मृत्यु जैसी स्थितियां इन वर्गों में अब काफी आम हो गई हैं। इसके अलावा कई अन्य रोग भी हैं, जो दिल को प्रभावित कर सकते हैं और लक्षणों तथा संबंधित तकलीफ़ों का कारण बनते हैं।
डॉ. नकुल ने कहा हृदय की पंप करने की क्षमता में कमी अलग-अलग कारणों से हार्ट फेल्योर सिंड्रोम का कारण बन सकती है। यह तब भी हो सकता है जब हृदय की पंपिंग क्रिया सामान्य रहे। यह स्थिति कई मॉडर्न ज़िंदगी में सेहत के ख़िलाफ़ जाकर अपनाई गई आदतों का नतीजा हैं, जिनके कारण ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, ओवरवेट होना और फेफड़ों की समस्याएं बढ़ती हैं। भारतीयों में एक ख़ास मुश्किल यह भी है कि कभी-कभी अधिक मोटापे के बिना भी पेट के अंदर चर्बी ज़्यादा पाई जाती है, जो अपने बुरे असर छोड़ती है। कुछ असामान्य जेनेटिक या वंशानुगत स्थितियां भी हैं, जो अचानक हृदय की धड़कन को असामान्य कर सकती हैं और कई बार यह घातक भी साबित होती हैं।
डॉ. अम्बुकेश्वर सिंह एसोसिएट डायरेक्टर एवं यूनिट हेड इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ, ने सभी को साइलेंट हार्ट अटैक के बारे में जागरूक किया और कहा “हालांकि यह आम नहीं है, लेकिन सामान्य लक्षणों जैसे सीने में दर्द या सांस फूलना आदि के बिना भी साइलेंट हार्ट अटैक हो सकता है। कुल हार्ट अटैक में ऐसे मामलों की संख्या ख़ासकर डायबिटीज़ के रोगियों में लगभग 5 से 10 प्रतिशत तक होती है।
कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य के बारे में बात करते हुए, प्रो. डॉ. डी. प्रभाकरन, एमडी, डीएम (कार्डियोलॉजी), एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, सेंटर फॉर क्रॉनिक डिज़ीज़ कंट्रोल (CCDC) ने कहा “पर्यावरणीय बदलाव, ख़ासकर वायु प्रदूषण, भारत में दिल के रोगों की बढ़ती घटनाओं के प्रमुख कारण के रूप में उभर रहा है। सेंटर फॉर क्रॉनिक डिज़ीज़ कंट्रोल (CCDC) के अंतर्गत किए गए रीसर्च में पाया गया है कि, भारतीयों में कार्डियोवैस्कुलर रोगों के ज़्यादा मामले सामने आने में जेनेटिक, लाइफ़स्टाइल और एनवायरनमेंटल कारकों का एक साथ होना एक बड़ी वजह है, जिसमें वायु प्रदूषण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शहरीकरण और कुपोषण भी दिल के रोगों के बढ़ते बोझ में योगदान दे रहे हैं। भारत में, वायु प्रदूषण प्रतिवर्ष 1. 27 मिलियन लोगों की मृत्यु के लिए ज़िम्मेदार है, जिनमें से आधी मौतें कार्डियोवैस्कुलर रोगों से संबंधित हैं। इससे दिल का दौरा और स्ट्रोक के ख़तरे 48 प्रतिशत तक बढ़ जाते हैं।
इस कार्यक्रम में ज़ुम्बा सेशन, हार्ट हेल्थ पर एक नाटक, बलून लिफ्ट सेरेमनी और प्रतिभागियों के लिए निःशुल्क हेल्थ चेकअप भी आयोजित किए गए। दिल की सेहत के लिए ज़रूरी खाने पर सलाह देने वाले हेल्थ स्टॉल भी लगाए गए। विश्व हृदय दिवस मेले का यह आयोजन बेहद जानकारीपूर्ण और मनोरंजक रहा, जिसमें दिल के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में कामयाबी मिली और मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ, की पहल को भी यहां सभी ने जाना।







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