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नयी दिल्ली। भारत के कई राज्य इन दिनों लंपी वायरस का भयंकर कहर झेल रहे हैं। दुग्ध उत्पादन वाले जानवर खासतौर गायों पर इसकी मार ज्यादा पड़ी है। वहीं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा विकसित और लंपी स्किन रोग से पूर्ण सुरक्षा देने वाली स्वदेशी लंपी-प्रो वैक इंड वैक्सीन का कमर्शियल स्केल उत्पादन अगले चार से पांच माह में शुरू होने की संभावना है।
वहीं इस लंपी वायरस वैक्सीन (lumpy virus vaccine) की टेस्टिंग इस साल अप्रैल में आईवीआरआई (IVRI) में किया गया था। इनमें 10 नर बछड़े शामिल थे जिन्हें टीका लगाया गया था और बाकी 5 को टीका नहीं लगाया गया। एक महीने के बाद, टीकाकरण (vaccination) वाले जानवरों ने लंपी वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी विकसित कर ली।
इसके बाद जुलाई में, राजस्थान के बांसवाड़ा में एक गौशाला में 140 मवेशियों जिसमें गर्भवती गायों के साथ-साथ बछड़ों, बछिया और बैल भी थे, सब पर इस वैक्सीन का परीक्षण किया गया। हिसार और हांसी (हरियाणा) और मथुरा (यूपी) के अलावा उदयपुर, अलवर और जोधपुर में 35 अन्य गौशालाओं और डेयरी फार्मों (dairy farms) में जानवरों को भी टीका लगाया गया है। इन सबको लंपी वायरस (lumpy virus) नहीं हुआ। इससे पता चलता है कि लंपी वायरस की ये वैक्सीन 100 प्रतिशत तक सुरक्षा प्रदान कर सकती है।
बता दें कि लंपी वायरस डिजीज की सबसे ज्यादा शिकार गायें हो रही हैं। इस वायरस से बचने के लिए सबसे पहले पशुओं का टीकाकरण जरूर कराएं। किसी भी मवेशी (Cattle) में लंपी वायरस से संबंधित लक्षण मिले तो तुरंत स्थानीय पशु चिकित्सक (veterinary doctor) से संपर्क करें। इसी के साथ संक्रमित पशु (infected animal) को अन्य पशुओं से अलग कर उसकी साफ सफाई की विशेष व्यवस्था करें। इस बात का ध्यान दें कि मक्खी और मच्छर संक्रमित मवेशी पर न बैठने ना पाए।
Edited by Aarti Tewari







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