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लखनऊ। राजधानी में स्मार्ट विलेज पंचायत को संबोधित करते हुये केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने ग्राम प्रधानों को देश का कर्मयोगी बताया। कहा कि ग्राम पंचायतों को नेचुरल फार्मिंग पर बल देने की आवश्यकता है। इससे देश के नागरिक अस्पतालों से दूर रहेंगे और कैंसर जैसी बीमारी में कमी आयेगी।
स्मार्ट विलेज पंचायत (Smart Village Panchayat) विषय पर दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath), केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह और केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री कपिल मोरेश्वर पाटिल (Kapil Moreshwar Patil) ने किया।

केंद्रीय मंत्री (Union Minister) गिरिराज सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायतों को नेचुरल फार्मिंग (natural farming) पर बल देने की आवश्यकता है। इससे देश के नागरिक अस्पतालों से दूर रहेंगे और कैंसर जैसी बीमारी में कमी (cancer reduction) आयेगी। ग्राम पंचायतों को शिक्षायाक्त, पोषण युक्त (nutritious), ग्रीन एनर्जी (green energy) युक्त बनाने की जरूरत है।
उन्होंने (Giriraj Singh) कहा कि स्मार्ट पंचायत’ सिर्फ एक शब्द नही बल्कि देश की आत्मा है। देश के वैज्ञानिक शोध कर रहे है और प्लाज्मा एक्टिवेटेड वाटर (plasma activated water) प्रणाली पर जोर दिया जा रहा है। अगर यह सपना साकार होता है और हर ग्राम पंचायत में प्लाजमा वाटर तकनीक आ जाती है तो देश को यूरिया आयात की आवश्यकता नहीं पडेगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का सपना है कि वर्ष 2070 तक भारत ‘कार्बन तटस्थता’ (Carbon Neutrality) को हासिल करें। इस लक्ष्य को हासिल करने में ग्राम पंचायतों की भूमिका काफी अहम रहेगी। फंड देने में केंद्र सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है,पिछले पांच वर्षो में उतर प्रदेश को पचास हजार करोड़ रुपये का फंड दिया गया है।
सम्मेलन में नागरिक केंद्रित स्वास्थ्य देखभाल, आंध्र प्रदेश की इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (electronic health record) पहल, ग्रामीण स्वास्थ्य (Rural Health) तैयारी, ग्रामीण क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने में चुनौतियां, ऊर्जा समाधान, भारतीय एग्रीबिजनेस क्षेत्र तथा केरल- कार्बन न्यूट्रैलिटी की ओर, ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण अनुकूल (environment friendly) प्रक्रियाएं जैसे विषयों पर प्रस्तुतीकरण दिए गए।







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