













































प्रतीकात्मक
वाशिंगटन। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुखिया डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि कोरोनावायरस के नए वैरिएण्ट ओमिक्रॉन का ख़तरनाक वजूद उभरने से दुनिया भर के लिये, एक बार फिर ये बात बहुत अहमियत के साथ पुष्ट होती है कि इस महामारी के बारे में मौजूदा घबराहट और लापरवाही का नज़रिया बन्द करना होगा।
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी (UN Health Agency) के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ने, सोमवार को जिनीवा में, संगठन की प्रशासनिक संस्था की तीन दिवसीय विशेष बैठक को सम्बोधित करते हुए ये बात कही है।
उन्होंने नए वैरिएण्ट पर वैश्विक चिन्ताओं के बीच दलील दी है कि इस वायरस के ख़िलाफ़ कड़ी मेहनत और कठिनाइयों से हासिल की गई प्रगति को बनाए रखने के लिये, और ज़्यादा अन्तरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है। विश्व स्वास्थ्य एसेम्बली की ये विशेष बैठक, तथाकथित महामारी सन्धि के मुद्दे पर कोई निर्णय लेने के लिये आयोजित की गई है
डॉक्टर टैड्रॉस ने कहा कि विश्व ने, कोविड-19 की चुनौती का सामना करने के लिये, अन्तरराष्ट्रीय सहयोग व एकजुटता के साथ काम नहीं किया है, और अन्य चुनौतियों के साथ-साथ वैक्सीन विषमता के कारण, ओमिक्रॉन जैसे नए ख़तरनाक वैरिएण्ट उभरने में कामयाब होते रहे हैं।
उन्होंने कहा, “बिल्कुल अभी-अभी ओमिक्रॉन (omicron) ने दिखाया है कि दुनिया को, महामारियों पर एक नई सन्धि की क्यों ज़रूरत है: हमारी मौजूदा व्यवस्था, देशों को ऐसे जोखिमों के बारे में अन्य देशों को सतर्क करने के लिये, कोई प्रोत्साहन नहीं मुहैया कराती, जो अन्ततः उनकी सीमाओं तक भी पहुँचेंगी।”







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