











































सोसायटी आफ मिडवाईफ इन्डिया की राष्ट्र स्तरीय बैठक
लखनऊ। सोसायटी आफ मिडवाईफ इन्डिया समुदाय के सदस्यों की राष्ट्र स्तरीय बैठक का आयोजन राजधानी में हुआ। बैठक में राष्ट्रीय स्तर की कान्फ्रेंस, नर्सेज मिडवाइफरी के प्रशिक्षण में सुधार व शिक्षा और सामान्य प्रसव करवाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
मुख्य अतिथि डॉ आलोक श्रीवास्तव रजिस्टार, नर्सिंग काउंसिल (Nursing Council), संस्थापक डॉ प्रकाशम्मा, एवं कार्यकारिणी सदस्य मिताली अधिकारी, संध्या रानी, बंदना दास, गीता, अशोक कुमार महामंत्री, राजकीय नर्सेज संघ (State Nurses Association) उत्तर प्रदेश, मेरी जे मलिक अध्यक्ष टी एन ए आई, द्वारा दीप प्रज्वलित कर सोसायटी आफ मिडवाईफ इन्डिया (SOMI) की राष्ट्र स्तरीय बैठक की शुरुआत हुई।

बैठक में एएनएम,/महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता (ANM) एवं नर्सेज के कौशल सुधार हेतु राष्ट्रीय स्तर की कान्फ्रेंस कराने का निर्णय मार्च 2023 में एसजीपीजीआई लखनऊ में लिया गया।

डॉक्टर आलोक श्रीवास्तव ने नर्सेज मिडवाइफरी के प्रशिक्षण में सुधार हेतु राज्य स्तर पर किए जा रहे कार्यों के बारे में बताया। उन्होंने मिडवाइफरी (midwifery) शिक्षा की गुणवत्ता हेतु इंडियन नर्सिंग काउंसिल के मानक पूर्व नहीं कर रहे कालेजों की मान्यता रद्द करने की बात बतायी तथा आगामी वर्ष से प्रशिक्षण हेतु केन्द्रीयकृत प्रवेश परिक्षा एवं प्रशिक्षण उपरांत पंजीकरण हेतु केन्द्रीय कृत परिक्षा कराने के बारे में बताया।

कार्यशाला में डॉ प्रकाशम्मा ने मिडवाइफ के कौशल सुधार एवं सामान्य प्रसव (normal delivery) में मिडवाइफ के महत्व को विस्तार पूर्वक समझाया। इस कार्यक्रम में अस्पतालों में होने वाले सिजेरियन ऑपरेशन (caesarean operation) का सही प्रकार से चयन करने एवं सामान्य प्रसव को बढ़ाने हेतु मिडवाइफ को सही निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया एवं उनको इसकी महत्वता को जिम्मेदारी पूर्वक निभाने हेतु प्रोत्साहित किया गया।

अशोक कुमार, मीडिया प्रभारी सोमी, महामंत्री, राजकीय नर्सेज संघ उत्तर प्रदेश ने कहा कि आगामी राष्ट्र स्तरीय कॉन्फ्रेंस को सफल बनाने हेतु उत्तर प्रदेश राज्य के विभिन्न जिलों से आए हुए नर्सिंग अधिकारियों एवं विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों को कॉन्फ्रेंस को सफल बनाने हेतु कमेटियों का गठन किया गया एवं सभी को अपनी जिम्मेदारियां समझाई गई।
आगामी कॉन्फ्रेंस को अधिक से अधिक सफल बनाया जा सके एवं आमजन तक सामान्य प्रसव के महत्व को समझाया जा सके एवं सिजेरियन ऑपरेशन से होने वाले शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक कठिनाईयों से बचा जा सके।







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