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वाशिंगटन। अमेरिका में कुछ दिन पहले हुई प्यू रिसर्च में यह बात सामने आई है की बहुत पेरेंट्स अपने बच्चों को जेंडर बेस्ड एजुकेशन नहीं देना चाहते हैं। आरहुस यूनिवर्सिटी (Aarhus University) ने एक सर्वे किया था इसमें कई चौंकाने वाले तथ्यों का खुलासा किया गया है।
पहली बार इस तरह का सर्वे किया गया है, सर्वे में सामने आया कि बच्चों में जल्दी किशोरावस्था तक पहुंचने की इच्छा पनप रही हैं। इतना ही नहीं, 11 साल की उम्र के बच्चों में जेंडर बदलने की चाहत होने लगी है। रिसर्चर्स ने सर्वे में पाया कि 5% बच्चों ने आंशिक या पूरी तरह से जेंडर बदलने (change gender) की इच्छा जताई है।
इसके लिए ‘बेटर हेल्थ फॉर जनरेशन्स’ (Better Health for Generations) रिसर्च प्रोजेक्ट के डेटा का इस्तेमाल किया गया था। इसके लिए सभी बच्चों से हर 6 महीने में उनके शरीर में होने वाले बदलावों के बारे में जानकारी जुटाई। जिन बच्चों ने जेंडर बदलने की चाहत जताई थी, वे दूसरे बच्चों की तुलना में दो महीने पहले ही किशोर हो चुके थे।
इस रिपोर्ट के परिणाम बाल रोग विशेषज्ञों (pediatricians) के लिए जरुरी हैं, जो किशोरावस्था में प्रवेश कर रहे बच्चों के साथ डील करते हैं। डॉक्टरों के सामने ऐसे कई मामले आ सकते हैं, जिनमें बच्चे जल्दी किशोर होने पर असहज महसूस करें। इसलिए इस बारे में सही जानकारी होनी जरुरी है।1996 में शुरु हुए इस प्रोजेक्ट में डेनमार्क (Denmark) की एक लाख महिलाओं को शामिल किया गया था।







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