देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

राष्ट्रीय

मेडिकल छात्रों की सुनो सरकार ! कही हमी ना बीमार हो जाएँ !!

भारत स्वास्थ्य के क्षेत्र पर अपनी कुल जीडीपी का लगभग 3.8 प्रतिशत खर्च करता है. यह विश्व स्वास्थ्य संगठन कम से कम 5 प्रतिशत के सुझाव से यह बहुत कम है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल 31 जनवरी को संसद में जो आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 पेश किया था, उसमें उन्होंने भारत के स्वास्थ्य खर्च को लेकर एक सकारात्मक तस्वीर पेश की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार ने 2024-25 में स्वास्थ्य पर कुल 6 लाख करोड़ रुपए का खर्चा किया। यह साल 2020-21 में किए 3.2 लाख करोड़ रूपए का दुगना है। 

हे.जा.स.
October 25 2025 Updated: October 25 2025 22:57
0 3206
मेडिकल छात्रों की सुनो सरकार ! कही हमी ना बीमार हो जाएँ !!

नयी दिल्ली। भारत में मेडिकल कॉलेजों में शिक्षा की व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। भारत में मेडिकल कॉलेजों में शिक्षा की व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। एक सर्वे से इसका पता चला है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FIMA) की ओर से किए एक सर्वे में देश के 40 फीसदी मेडिकल स्टूडेंट्स ने अपने कॉलेज में काम के माहौल को ‘टॉक्सिक' बताया है। जबकि 55 फीसदी स्टूडेंट्स ने स्टाफ की कमी की शिकायत की है। इस सर्वे में 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 2000 से अधिक मेडिकल स्टूडेंट, टीचर और प्रोफेसरों को शामिल किया गया। इनमें 90 फीसदी प्रतिभागी सरकारी अस्पताल (government hospitals) और मेडिकल संस्थानों (medical institutions) के हैं।

मेडिकल छात्रों (Medical students) ने कॉलेजों में खराब इंफ्रास्ट्रक्चर को पढ़ाई में बाधा का मुख्य कारण बताया है। लगभग 89 फीसदी प्रतिभागियों को लगता है कि कॉलेजों की बिल्डिंग, लैब और बाकी सुविधाएं अच्छी नहीं हैं। वहीं सिर्फ 54.3 फीसदी स्टूडेंट्स को रेगुलर क्लास मिलती है। मेडिकल क्षेत्र में पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल अनुभव की अहमियत भी होती है। फिर भी केवल 44 प्रतिशत कॉलेजों में स्किल्स लैब उपलब्ध हैं। जबकि 69 फीसदी स्टूडेंट्स का कहना है कि उन्हें लैब और मशीनों की सुविधा संतोषजनक लगती है। 

सरकारी कॉलेजों और अस्पतालों (Government colleges and hospitals) में इलाज कराने आने वाले मरीजों की संख्या ज्यादा होती है। इसलिए इन कॉलेजों में पढ़ रहे छात्रों को काफी अनुभव हो जाता है। उन पर काम का बोझ भी बहुत ज्यादा होता है। इन प्रतिष्ठित कॉलेजों (prestigious colleges) से पढ़कर निकलने के बाद माना जाता है कि अब ये छात्र बिना सीनियर की मदद के खुद से मरीजों का इलाज कर सकेंगे। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि इन कॉलेजों में से निकलने वाले सिर्फ 57 फीसदी स्टूडेंट ही खुद को डॉक्टर बनकर अकेले काम करने के लिए तैयार मानते हैं। 

कहां है भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था? - Where is India's healthcare system?
हाल ही में देश के गृह मंत्री अमित शाह ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि सरकार ‘समग्र स्वास्थ्य प्रणाली' (holistic healthcare system) विकसित करने पर काम कर रही है। उन्होंने बताया था कि साल 2014 में स्वास्थ्य बजट 37 हजार करोड़ रुपये था जो अब 1.27 लाख करोड़ रुपये हो गया है। अमित शाह ने यह भी कहा था कि मोदी सरकार के कार्यकाल में लगभग 65 हजार करोड़ रुपये स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर में खर्च किए गए हैं।

भारत (India) स्वास्थ्य के क्षेत्र पर अपनी कुल जीडीपी का लगभग 3.8 प्रतिशत खर्च करता है. यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के कम से कम 5 प्रतिशत के सुझाव से यह बहुत कम है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल 31 जनवरी को संसद में जो आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 पेश किया था, उसमें उन्होंने भारत के स्वास्थ्य खर्च को लेकर एक सकारात्मक तस्वीर पेश की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार ने 2024-25 में स्वास्थ्य पर कुल 6 लाख करोड़ रुपए का खर्चा किया। यह साल 2020-21 में किए 3.2 लाख करोड़ रूपए का दुगना है। 

काम के बोझ तले दबे स्वास्थ्यकर्मी और डॉक्टर - Healthcare workers and doctors burdened with workload
कोविड महामारी के समय भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की कमजोरियां पूरी दुनिया के सामने आईं. इस पर बात हुई कि देश के कई हिस्सों में अस्पतालों में जरूरी उपकरण, डॉक्टरों की कमी और बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं का अभाव कितना गंभीर है। फिर भी ग्रामीण और छोटे शहरों में हालात अब भी बेहद खराब बने हुए हैं। फिलहाल एक भारतीय डॉक्टर पर 1500 मरीजों का भार है। जबकि डब्लूएचओ के सुझाए मानक के अनुसार एक डॉक्टर अधिकतम 1000 मरीजों को ही देख सकता है।

इसी तरह नर्सों (nurses) की स्थिति भी चिंताजनक है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट खुद बताती है कि सरकारी अस्पतालों, खासकर तालुक, जिला और मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ (paramedical staff) की भारी कमी है। दवाइयों (medicines) की उपलब्धता में भी कमी पाई गई है. फाइमा के सर्वे में भी यही बातें सामने आई हैं।

इस सर्वे के चीफ कोऑर्डिनेटर डॉ सजल बंसल बताते हैं कि नेशनल मेडिकल कमीशन (National Medical Commission) इन कॉलेजों में नियम पालन ना किए जाने को लेकर पहले ही चेतावनी दे चुका है। सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में स्टाफ की कमी के चलते एमबीबीएस और रेजिडेंट डॉक्टरों को उनका भी काम करना पड़ता  है। डॉक्टर हफ्ते में 100 से 120 घंटे काम करते हैं। जबकि पिछले साल एनएमसी के टास्क फोर्स ने सुझाव दिया था कि रेजिडेंट डॉक्टर (resident doctors) से हफ्ते में 74 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जा सकता।

अस्पतालों में सबसे जरूरी बुनियादी सुविधाएं (basic facilities) भी पूरी नहीं होतीं। उदाहरण के लिए अस्पतालों में मरीजों को ले जाने के लिए पर्याप्त स्ट्रेचर नहीं हैं। दिल्ली के आरएमएल जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों में भी अक्सर पैरासिटामोल जैसी सामान्य और जरूरी दवाइयां नहीं मिलतीं। जिसकी वजह से इन एमबीबीएस छात्रों (MBBS students) और पीजी कर रहे डॉक्टरों को इलाज करने में देरी और परेशानी होती है।

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

COMMENTS

बदायूं में एम्बुलेंस में गूंजी किलकारी

बदायूं में एम्बुलेंस में गूंजी किलकारी

आरती तिवारी June 27 2023 29916

बदायूं जिले में संचालित 102 एम्बुलेंस एक नन्हे से बच्चे ने जन्म लेकर एक परिवार मे खुशी का माहौल बना

सोहन लाल बालिका इंटर कालेज में क्षय रोग संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित।

सोहन लाल बालिका इंटर कालेज में क्षय रोग संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित।

हुज़ैफ़ा अबरार November 14 2021 25495

सोहनलाल लाल बालिका इंटर कॉलेज में टीबी यूनिट डीटीसी द्वारा “क्षय रोग निवारण में युवाओं की भूमिका” वि

कोरोना महामारी से फिर तबाह हो रही दुनिया

कोरोना महामारी से फिर तबाह हो रही दुनिया

हे.जा.स. December 30 2021 31548

डब्ल्यूएचओ ने ओमिक्रॉन को बड़ा खतरा बताया और कहा कि यह स्वास्थ्य व्यवस्था को तबाह कर सकता है। इससे स

जन्म के समय बच्चे के पास पीडियाट्रिशियन का होना क्यों जरूरी है?

रंजीव ठाकुर June 04 2022 48684

ट्रेनिंग प्रोग्राम में फर्स्ट गोल्डन मिनट प्रोजेक्ट की जानकारी दी गई जिसमें प्रदेश भर से आए पीडियाट्

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही आई सामने, इलाज कराने आई महिला के एक्स-रे में निकली चाबी

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही आई सामने, इलाज कराने आई महिला के एक्स-रे में निकली चाबी

admin March 22 2023 23950

जहां महिला के एक्स रे में चाबी निकली है। अब इस बात को लेकर महिला अपने साथ एक्स रे को लेकर इलाज के लि

बदलते मौसम में गैस्ट्रोएंटेराइटिस के मरीज़ को बुखार और डिहाइड्रेशन कर सकता है परेशान, ऐसे रहें सावधान

बदलते मौसम में गैस्ट्रोएंटेराइटिस के मरीज़ को बुखार और डिहाइड्रेशन कर सकता है परेशान, ऐसे रहें सावधान

लेख विभाग June 30 2022 31048

जब तापमान बढ़ रहा हो तो बुखार और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर ये स्थिति

ऑयली स्किन से निज़ात पाने के लिए अपनाएं घरेलू उपाय

ऑयली स्किन से निज़ात पाने के लिए अपनाएं घरेलू उपाय

सौंदर्या राय April 17 2022 32159

स्किन पर ज़्यादा आयल होने के कारण रोमछिद्र बन्द हो सकतें है। इस कारण चेहरे पर मुंहासे बढ़ने की प्रॉब्

योग गुरु रामदेव के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट सोमवार को करेगा सुनवाई।

योग गुरु रामदेव के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट सोमवार को करेगा सुनवाई।

हे.जा.स. July 26 2021 26428

डॉक्टरों के संघों ने आरोप लगाया है कि रामदेव बड़े पैमाने पर जनता को गुमराह कर रहे थे। वे गलत तरीके स

हेयरफॉल और डैंड्रफ के लिए बेहद कारगर है एलोवेरा

हेयरफॉल और डैंड्रफ के लिए बेहद कारगर है एलोवेरा

श्वेता सिंह August 29 2022 29259

एलोवेरा में मौजूद विटामिन ए, विटामिन सी और विटामिन ई समेत अन्य कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो बालों क

भारत में कोरोना महामारी कुछ दिनों की मेहमान

भारत में कोरोना महामारी कुछ दिनों की मेहमान

एस. के. राणा March 28 2022 33462

भारत में कोरोना संक्रमितों की घटती संख्या से लग रहा है कि कोरोना महामारी कुछ ही दिनों की मेहमान है।

Login Panel