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यूरोप के एक तिहाई डॉक्टर और नर्स अवसाद या चिंता से ग्रस्त हैं: डब्ल्यूएचओ

WHO योरोप के क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर हैंस हेनरी क्लूगे कहते हैं कि MeND सर्वे के नतीजे याद दिलाते हैं कि योरोप की स्वास्थ्य व्यवस्था तभी मज़बूत हो सकती है जब उसे सम्भालने वाले लोग मज़बूत हों। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों की यह स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती। 

हे.जा.स.
October 28 2025 Updated: October 28 2025 22:03
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यूरोप के एक तिहाई डॉक्टर और नर्स अवसाद या चिंता से ग्रस्त हैं: डब्ल्यूएचओ प्रतीकात्मक चित्र

जेनेवा। योरोप में 10 में से कम से कम एक डॉक्टर मनोविकार से पीड़ित है। वह आत्महत्या तक करने के विचारों का सामना कर रहा है। WHO के एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि योरोप में डॉक्टर और नर्स लगातार तनावपूर्ण व असुरक्षित परिस्थितियों में काम कर रहे हैं, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गम्भीर असर पड़ रहा है।  

10 अक्टूबर को 'विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस' के पर जारी इस सर्वेक्षण के नतीजों के अनुसार, चिन्ताजनक संख्या में स्वास्थ्यकर्मी, आत्महत्या के विचारों या स्वयं को नुक़सान पहुँचाने की प्रवृत्ति का अनुभव कर रहे हैं। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन - WHO की योरोप इकाई ने एक सर्वे किया है जिसमें पाया गया कि बहुत से स्वास्थ्यकर्मी अवसाद (Depression), चिन्ता (Anxiety) और आत्महत्या (Suicide) के विचारों से जूझ रहे हैं, जबकि कामकाज के लम्बे घंटे, आसपास हिंसा की घटनाएँ और अस्थाई रोज़गार, इन पर दबाव को और बढ़ा रहे हैं।  

इस सर्वे में पाया गया कि हर 3 में से 1 डॉक्टर और नर्स अवसाद से ग्रस्त हैं और हर 10 में से 1 डॉक्टर, आत्महत्या के विचारों से ग्रसित होता है। योरोप में डॉक्टर और नर्स ऐसे हालात में काम कर रहे हैं, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य और रहन-सहन पर गम्भीर असर डाल रहे हैं। ‘नर्सों और डॉक्टरों का मानसिक स्वास्थ्य’(MeND) सर्वेक्षण अब तक का सबसे बड़ा विश्लेषण है, जिसमें योरोपीय संघ के सभी 27 देशों के साथ-साथ, आइसलैंड और नॉर्वे से 90 हज़ार से अधिक जवाबों का विश्लेषिण किया गया है। 

रिपोर्ट में देशों के अनुसार आँकड़े दिए गए हैं जिनमें यह भी उजागर किया गया है कि योरोप के स्वास्थ्य तंत्र और स्वास्थ्यकर्मियों में, वर्षों से संसाधन निवेश की कमी ने, कितना बड़ा मानसिक और मानवीय मूल्य चुकाया है। 

मुख्य निष्कर्ष -Key Findings
पिछले एक वर्ष में हर 3 में से 1 डॉक्टर (doctors) या नर्स (nurses) ने कार्यस्थल पर धमकियों या हिंसा का सामना किया, जबकि 10 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मियों को शारीरिक हिंसा या यौन उत्पीड़न (sexual harassment) का सामना करना पड़ा। 

  • वहीं, हर 4 में से 1 डॉक्टर, सप्ताह में 50 घंटे से अधिक काम करते हैं और लगभग 32 प्रतिशत डॉक्टर व 25 प्रतिशत नर्सें, अस्थाई रोज़गार अनुबन्धों (temporary employment) पर काम कर रहे हैं, जिससे रोज़गार की असुरक्षा और मानसिक तनाव में वृद्धि जुड़ी हुई है। 
  • सबसे चिन्ताजनक तथ्य यह सामने आया कि हर 10 में से 1 डॉक्टर या नर्स ने कहा कि पिछले दो सप्ताहों में उनके मन में यह विचार आया कि “मर जाना ही बेहतर होगा” या “ख़ुद को नुक़सान पहुँचाना चाहिए।” 
  • इस तरह के “निष्क्रिय” आत्महत्या के विचार, भविष्य में आत्मघाती व्यवहार की सम्भावना को बढ़ाते हैं। इस तरह का असुरक्षित कार्य वातावरण, सीधे तौर पर कमज़ोर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। 

WHO के अनुसार, योरोपीय देशों में विदेश में प्रशिक्षण प्राप्त डॉक्टर व नर्स पर निर्भरता बढ़ रही है। जो डॉक्टर और नर्सें हिंसा का अनुभव करते हैं, लगातार लम्बे घंटे काम करते हैं, या रात की पारियों में काम करते हैं, उनमें अवसाद, चिन्ता और आत्महत्या के विचार आने की सम्भावना कहीं अधिक होती है। वास्तव में, डॉक्टरों और नर्सों में आत्महत्या सम्बन्धी विचारों की दर सामान्य आबादी की तुलना में लगभग दोगुनी पाई गई है। 

WHO योरोप के क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर हैंस हेनरी क्लूगे कहते हैं कि MeND सर्वे के नतीजे याद दिलाते हैं कि योरोप की स्वास्थ्य व्यवस्था तभी मज़बूत हो सकती है जब उसे सम्भालने वाले लोग मज़बूत हों। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों की यह स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती। 

डॉक्टर हैंस हेनरी ने कहा कि अब ठोस क़दम उठाने की ज़रूरत है, जैसे कि स्वास्थ्य क्षेत्र में हिंसा और उत्पीड़न के लिए शून्य-सहनशीलता नीति लागू करना, अत्यधिक कार्य घंटों और थकावट के चलन को ख़त्म करना, डिजिटल तकनीकों जैसे AI का इस्तेमाल कर कामकाज को सरल बनाना और हर स्वास्थ्यकर्मी को गोपनीय व सम्मानजनक मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराना। 

उन्होंने आगाह किया कि स्वास्थ्यकर्मियों में बढ़ता मानसिक स्वास्थ्य संकट, दरअसल स्वास्थ्य सुरक्षा का संकट है, जो पूरे स्वास्थ्यतंत्र की स्थिरता को ख़तरे में डाल सकता है। 

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