











































प्रतीकात्मक चित्र
नयी दिल्ली। विश्व प्रसिद्ध स्वास्थ्य शोध पत्रिका दी लैंसेट (The Lancet) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत और दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण (air pollution), खासकर पीएम 2.5, के उच्च स्तर से गर्भपात (miscarriages) और समय से पहले जन्म का खतरा बढ़ जाता है। शोध के अनुसार हर साल लगभग तीन लाख से अधिक गर्भपात प्रदूषण के कारण हो रहे हैं। भारत में भी वायु प्रदूषण का गर्भावस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
आईआईटी (IIT) दिल्ली और अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (मुंबई) ने ब्रिटेन (UK) और आयरलैंड (Ireland) के संस्थानों के साथ मिलकर हाल ही में इस विषय पर अध्ययन किया है। स्टडी में पाया गया कि गर्भावस्था में पीएम 2.5 (PM 2.5) के अधिक संपर्क में आने से समय से पहले डिलीवरी (premature delivery) का जोखिम लगभग 70 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। वहीं जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने का जोखिम करीब 40 प्रतिशत तक ज्यादा होता है। ऐसे बच्चे, जो प्रदूषित हवा में पलते हैं, उनके विकास में रुकावट आती है। बच्चों को आगे चलकर सांस की परेशानी, एनीमिया (anemia) और दिल की बीमारी (heart disease) हो सकती है।
क्या प्रदूषण से देश में धूप के घंटे काम हो रहें हैं ?- Is pollution reducing sunlight hours in the country?
उत्तर भारत (North India) के बिहार, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे इलाकों में पीएम 2.5 प्रदूषकों का स्तर बहुत ज्यादा है। जबकि देश के दक्षिण और पूर्वोत्तर हिस्सों में यह कम है। यही वजह है कि उत्तर भारत के राज्यों में समय से पहले जन्म के मामलों की संख्या भी अधिक पाई गई। हिमाचल प्रदेश में 39 प्रतिशत, उत्तराखंड में 27 प्रतिशत, राजस्थान में 18 प्रतिशत और दिल्ली में 17 प्रतिशत बच्चों का जन्म समय से पहले हुआ। वहीं पंजाब ऐसा राज्य रहा, जिसमें जन्म के समय सबसे ज्यादा बच्चों का वजन औसत से कम था
पीएम 2.5 क्या होता है?- What is PM 2.5?
हवा में धूल हमें दिखती है लेकिन पीएम 2.5 बहुत छोटे होते हैं। पीएम का अर्थ है पार्टिकुलेट मैटर और 2.5 मतलब 2.5 माइक्रोन, उसका आकार बताता है। ये इतने बारीक होते हैं कि आंखों से नहीं दिखते। ये इंसानी बाल की मोटाई से लगभग तीस गुना छोटे होते हैं।
फैक्ट्रियों और गाड़ियों के धुंए, लकड़ी, कचरा या पराली जलाने से ये कण हवा में फैल जाते हैं। सांस लेने के साथ ये हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं। ये फेफड़ों (lungs) तक पहुंच जाते हैं और खून में भी मिल सकते हैं। इससे सांस की परेशानी, दिल की बीमारी, स्ट्रोक और बच्चों के विकास में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
आईआईटी दिल्ली के अध्ययन से पता चलता है कि गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में प्रदूषण के संपर्क में आने से बच्चे का वजन कम हो सकता है। साथ ही पीएम 2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (nitrogen dioxide) और ओजोन (ozone) के अधिक स्तर से बच्चे का जन्म 37 हफ्ते तक पहले हो सकता है।
मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ता है गंभीर असर- The health of the mother and child is severely impacted
प्रदूषण का असर मां से कहीं ज्यादा बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ता है। प्रदूषित हवा में पीएम 2.5 जैसे बहुत बारीक कण और कार्बन मोनोऑक्साइड (carbon monoxide), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड जैसी गैसें होती हैं। सांस लेते समय ये गंदी हवा गर्भवती महिला के शरीर में प्रवेश करती है। जिससे ये कण फेफड़ों से होकर खून में पहुंच जाते हैं। गर्भ में पल रहे बच्चे को बढ़ने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन चाहिए होती है। ये प्रदूषक खून में ऑक्सीजन की मात्रा घटा देते हैं। ऑक्सीजन की कमी से बच्चे का विकास रुक सकता है।







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