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बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ‘पीरियड लीव'की घोषणा की है। अब राज्य में काम करने वाली सभी महिलाओं को हर महीने एक दिन की ‘पीरियड लीव' मिलेगी। यह छुट्टी सरकारी दफ्तरों के साथ-साथ निजी कंपनियों में काम करने वाली महिलाओं को भी मिलेगी। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य को वरीयता और उन्हें कार्यस्थल पर सहयोग देना करना है।
ओडिशा में भी सरकारी और निजी क्षेत्र की महिला कर्मचारी पीरियड के पहले या दूसरे दिन छुट्टी ले सकती हैं. कुछ भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप जैसे इंफोसिस, टीसीएस, जोमैटो और ओयो जैसी कंपनियों ने भी पीरियड लीव की शुरुआत की है।
जापान, इंडोनेशिया और दक्षिण कोरिया जैसे देशों पीरियड लीव को लेकर पहले से कानून हैं लेकिन भारत में राष्ट्रीय स्तर पर पीरियड लीव को लेकर अभी कोई कानून नहीं है। महिलाओं को 'पेड पीरियड लीव और मुफ्त सैनिटरी उत्पाद देने का अधिकार विधेयक 2022' में यह प्रस्ताव दिया गया था कि अनुच्छेद 21 के तहत महिलाओं को हर महीने तीन दिन की पेड छुट्टी दी जाए लेकिन यह कानून नहीं बन सका।
साल 2023 में भारत के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें भारत में सभी महिला छात्रों और कामकाजी महिलाओं के लिए पीरियड लीव लागू करने की मांग की गई थी। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने पीरियड लीव (Period Leave) को लेकर कहा था कि कई कंपनियां सोचती हैं कि अगर उन्हें हर महीने छुट्टी देना अनिवार्य हो जाएगा तो वे महिला कर्मचारियों को काम पर रखने से हिचकिचाएंगी। ऐसे में पीरियड लीव के लागू करने से महिलाएं नौकरी पाने में पीछे रह सकती है।
आंकड़े बताते हैं कि कई महिलाएं शर्म और सामाजिक कारणों से पेड लीव नहीं लेती। एक सर्वेक्षण के अनुसार जापान में 10 प्रतिशत से भी कम महिलाएं इस अवकाश का उपयोग करती हैं। वहीं 50 प्रतिशत से अधिक महिलाओं को लगता है कि कार्यस्थल पर पीरियड को लेकर समझ की कमी है।







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