











































प्रतीकात्मक चित्र
पटना। बिहार सरकार द्वारा आयुष चिकित्सकों का मानदेय 66000 किए जाने पर चिकित्सकों में अपार हर्ष देखा जा रहा है लेकिन वहीं दूसरी ओर आयुष चिकित्सक के साथ टीम में कार्यरत फार्मासिस्ट में असंतोष व्याप्त हो गया है।
कारण स्पष्ट है कि एक तरफ आयुष (Ayush) चिकित्सकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है वहीं दूसरी दूसरी तरफ फार्मासिस्ट की अनदेखी की जा रही है। फार्मासिस्ट (pharmacist) डॉ इरफान और अरुण कुमार ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर कहा है कि हम लोगों के साथ सरकार (government) द्वारा नाइंसाफी की गई है। एक ही टीम में काम कर रहे आयुष चिकित्सकों का मानदेय 66000 कर दिया गया लेकिन फार्मासिस्ट को पुराने मानदेय पर ही अपने हाल पर रोने के लिए छोड़ सरकार ने आत्मघाती कदम उठाया है। इसलिए सरकार को आयुष चिकित्सकों (doctors) के साथ-साथ बिहार के तमाम फार्मासिस्ट के साथ भी न्याय करते हुए मानदेय में वृद्धि करनी चाहिए। यदि समय रहते सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया तो हम फार्मासिस्ट सड़क पर उतरने (protest) के लिए मजबूर हो जाएंगे।
Edited by Shweta Singh







हुज़ैफ़ा अबरार August 24 2026 0 91
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 8078
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 1967
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 1715
हुज़ैफ़ा अबरार August 08 2026 0 1589
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 8078
एस. के. राणा January 20 2026 0 5292
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 5180
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 5082
एस. के. राणा February 01 2026 0 4907
एस. के. राणा January 13 2026 0 4788
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4753
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87197
सौंदर्या राय April 08 2022 0 35169
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38279
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35770
लेख विभाग March 19 2022 0 35399
सौंदर्या राय March 16 2022 0 73015
मॉनसून लगातार करवट ले रहा है। इस मौसम में कई सारी बीमारियों और संक्रमणों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
धरना-प्रदर्शन एवं सांकेतिक भूख हड़ताल किया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग किया कि मरीजों के हित में म
उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नर्सिंग व पैरामेडिकल संस्थानों की क्वालिटी मैनेजमेंट पर फोक
नए मामलों में सबसे ज्यादा 36 लखनऊ से, 31 गौतमबुद्धनगर से, 13 गाजियाबाद से, 4 प्रयागराज से और एक हरदो
ब्रिटेन की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने अक्टूबर के अंत में ओमिक्रॉन के दो नए वेरिएंट्स को बीक्यू 1 और
रोबोट के पिता बनने की ये कहानी बार्सिलोना की है। वैज्ञानिकों ने यहां रोबोट की मदद से संतानोत्पति के
ट्रांसप्लांट सर्जन अंतिम समय तक नहीं जानते कि किसका अंग प्रत्यारोपण करने वाले हैं। ट्रांसप्लांट सर्ज
शहर के सभी सरकारी अस्पतालों में अभी आभा एप के जरिये मरीजों को ओपीडी पर्चे बन रहे हैं। वहीं अब आभा एप
डॉ० राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ने शासन द्वारा निर्धारित सेवा शुल्क की एकल पॉलिसी को 09 जु
स्क्रब टायफस के ज्यादातर मरीज पहाड़ी इलाकों में ही पाए जाते हैं। यह एक जीवाणुजनित संक्रमण है, जिससे

COMMENTS