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10 फरवरी से फाइलेरिया उन्मूलन के लिए निर्णायक सर्वजन दवा सेवन (आईडीए) अभियान शुरू हो रहा है। सब लोग दवा खाएं और अपने घर-परिवार के लोगों को भी दवा खिलवाएं। आपका भरपूर सहयोग मिलेगा तो हम इन बीमारियों का प्रदेश से उन्मूलन कर ले जाएंगे। स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने यह बातें नेगलेक्टेड ट्रापिकल डिजीज (एनटीडी) दिवस के मौके पर आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में कहीं।
पीसीआई के सहयोग से लखनऊ विश्वविद्यालय के नए परिसर में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में सबसे पहले सैकड़ों विद्यार्थिय़ों ने कैंपस में रैली निकाली और अपने साथियों को फाइलेरिया के बारे में जागरूक किया। बाद में धरवंतरी सभागार में आयोजित संगोष्ठी में राज्य मंत्री ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि बिना बीमारी के किसी भी व्यक्ति को दवा खिलाना निश्चित तौर पर मुश्किल काम है लेकिन मच्छर जनित रोगों के मामले में और कोई उपाय भी नहीं है। फाइलेरिया एक बार हो जाए तो फिर इसका कोई इलाज नहीं है। इसलिए दवा खाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आईडीए अभियान को चलाने में वॉलंटियर की अहम भूमिका है। अंत में सभी को फाइलेरिया की दवा खाने की शपथ दिलाई गई।
अपर मुख्य सचिव अमित घोष ने भी राज्य मंत्री की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा उपेक्षित बीमारियों को खत्म कर पाना सिर्फ एक विभाग के बस का नहीं है। इसके लिए अंतरविभागीय समन्वय व समुदाय की सहभागिता जरूरी है। उन्होंने कहा कि हर उपेक्षित बीमारी के लिए अलग रणनीति बनानी होगी।
विधायक डॉ नीरज बोरा ने कहा कि 51 जिलों के 782 ब्लाक में फैली फाइलेरिया बीमारी अब 21 जिलों के 64 ब्लाक में सिमट गई है। यह स्वास्थ्य विभाग के संगठित काम को दर्शाता है। इसी तरह अन्य उपेक्षित बीमारियों के लिए भी काम करना होगा।
गेट्स फाउंडेशन के उपनिदेशक डॉ भूपेंद्र त्रिपाठी ने उपेक्षित बीमारियों के बारे में देश-प्रदेश की स्थिति रखी। उन्होंने बताया कि उपेक्षित रोगों के मामले में भारत विश्व में शीर्ष पर है। केंद्र व प्रदेश सरकार इस दिशा में बेहतरीन काम कर रही है। समुदाय का और सहयोग मिलेगा तो हम इन बीमारियों का उन्मूलन जल्द कर लेंगे।
राज्य फाइलेरिया अधिकारी डॉ ए.के, चौधरी ने फाइलेरिया व कालाजार की प्रगति के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि अभियान में विश्व स्वास्थ्य संगठन, पाथ, सीफार और जीएचएस संस्थाओं के साथ-साथ 3335 वॉलंटियर, जिनमें प्रधान, कोटेदार, फाइलेरिया मरीज़, एसएचजी सदस्य 853 गाँवों में फाइलेरिया और आईडीए के बारे में जागरूकता फैला रहे हैं और सोशल मोबिलाइज़ेशन एक्टिविटी आयोजित कर रहे हैं। इसके अलावा पीसीआई के 84 वॉलंटियर भी जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के नए परिसर के निदेशक डॉ राकेश कुमार सिंह, निदेशक संचारी रोग डॉ रेखारानी, आईसीडीएस की डॉ. अनुपमा, गेट्स फाउंडेशन के डॉ. भूपेंद्र त्रिपाठी, एनएसएस की मंजू सिंह तथा फाइलेरिया व कुष्ठ रोग से जुड़े अधिकारियों औऱ सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को भी सम्मानित किया गया।







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