












































अपोलोमेडिक्स पहली ‘कीहोल’ हार्ट सर्जरी
लखनऊ। राजधानी स्थित अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में एक चार वर्षीय छोटे बच्चे की जटिल हार्ट सर्जरी नई तकनीक से सफलतापूर्वक पूरी कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह उत्तर प्रदेश में पहली बार हुआ, जब इतने छोटे बच्चे के दिल के छेद को ‘कीहोल’ तकनीक यानी बेहद छोटे चीरे के माध्यम से बंद किया गया।
बच्चे को लंबे समय से फेफड़ों में बार बार संक्रमण हो रहा था और उसे सांस लेने में भी परेशानी रहती थी। जांच में पता चला कि उसके दिल में छेद है। आमतौर पर ऐसी स्थिति में पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी की जाती है, जिसमें सीने में सामने की तरफ बड़ा चीरा (लगभग 15 से मी का) लगाया जाता है और मरीज को सर्जरी के बाद कई दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ता है।
अपोलोमेडिक्स में इस जटिल सर्जरी को अत्याधुनिक ‘मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी’ तकनीक से किया गया। इसमें बच्चे के कंधे के नीचे बगल के हिस्से में सेफ्टी पिन जितना (लगभग 3 से मी) का एक छोटा सा चीरा लगाया गया और उसी रास्ते से दिल का ऑपरेशन पूरा किया गया। इस दौरान हृदय को बायपास मशीन पर रखकर दिल के छेद को बंद किया गया।
इस सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाले अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में कार्डियक सर्जरी विशेषज्ञ डॉ राहुल भूषण ने बताया "छोटे बच्चों में यह सर्जरी करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि उनका हृदय आकार में बहुत छोटा होता है। डॉ राहुल भूषण ने इस तकनीक में विशेष प्रशिक्षण सिंगापुर के नेशनल हार्ट सेंटर में प्राप्त किया है। वहां उन्होंने मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी में एक वर्ष की फेलोशिप की, जिसके बाद इस तकनीक को लखनऊ में शुरू किया गया।
उन्होंने बताया, “छोटे बच्चों का दिल आमतौर पर वयस्क व्यक्ति के दिल से 3 से 4 गुना छोटा होता है। ऐसे में सर्जरी के दौरान बच्चों के दिल तक छोटे चीरे द्वारा पहुंचना और बायपास मशीन से जोड़ना तकनीकी रूप से कठिन होता है। नई तकनीक और आधुनिक मशीनों की मदद से अब इतने छोटे बच्चों में भी यह सर्जरी संभव हो पाई है। वयस्कों में दिल और फेफड़ों के कार्य को सुचारु रखने वाली बायपास मशीन से जोड़ने की प्रक्रिया आमतौर पर जांघ के ऊपरी हिस्से यानी ग्रोइन में मौजूद फीमोरल रक्त वाहिकाओं के माध्यम से की जाती है। लेकिन बच्चों में ये फीमोरल रक्त वाहिकाएं पूरी तरह विकसित नहीं होतीं। इसलिए बायपास मशीन के लिए ट्यूब लगाने की प्रक्रिया उसी छोटे चीरे से करनी पड़ती है, जहां से सर्जरी की जा रही होती है। इससे सर्जरी और कठिन हो जाती है, क्योंकि उसी छोटे स्थान से कई ट्यूब दिल में लगानी पड़ती हैं और सर्जिकल प्रक्रिया करने की जगह भी कम हो जाती है।"
डॉ राहुल भूषण ने बताया कि इस सर्जरी में लगभग तीन घंटे का समय लगा। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें हड्डी या मांसपेशी को नहीं काटा जाता, रक्तस्राव कम होता है और मरीज की रिकवरी बहुत तेज होती है।उन्होंने कहा, “इस प्रक्रिया में बच्चे को केवल एक दिन आईसीयू में रखना पड़ा और दो दिन में ही अस्पताल से छुट्टी मिल गई। पहले यह माना जाता था कि हृदय सर्जरी के बाद मरीज को पांच से दस दिन तक अस्पताल में रहना पड़ता है, लेकिन नई तकनीक से यह धारणा बदल रही है।” उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रकार की सर्जरी से शरीर पर बड़ा निशान नहीं बनता, वह सामान्य जीवन जी सकता है इसलिए बच्चे को आगे खेलकूद या रक्षा सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी जाने पर कोई बाधा नहीं आती।
अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के सीईओ और एमडी डॉ मयंक सोमानी ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के हेल्थ सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया, “हमारा उद्देश्य है कि अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकें उत्तर प्रदेश के मरीजों तक पहुंचें ताकि लोगों को बड़े शहरों या विदेश जाने की जरूरत न पड़े। अपोलोमेडिक्स में विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक तकनीक की मदद से जटिल सर्जरी भी सुरक्षित तरीके से की जा रही हैं।”
इस सफल सर्जरी के बाद बच्चे का दिल पूरी तरह सामान्य तरीके से काम कर रहा है और डॉक्टरों के अनुसार वह अब पूरी तरह स्वस्थ है। इस तकनीक के आने से भविष्य में बच्चों में होने वाली जटिल हृदय सर्जरी अधिक सुरक्षित बन सकेगी।







हुज़ैफ़ा अबरार October 22 2026 0 1309
हुज़ैफ़ा अबरार October 18 2026 0 1197
विशेष संवाददाता October 21 2026 0 1197
हुज़ैफ़ा अबरार October 22 2026 0 791
हुज़ैफ़ा अबरार October 22 2026 0 700
हुज़ैफ़ा अबरार October 09 2026 0 6678
हुज़ैफ़ा अबरार October 08 2026 0 1561
हुज़ैफ़ा अबरार October 13 2026 0 1554
हुज़ैफ़ा अबरार October 14 2026 0 1456
हुज़ैफ़ा अबरार October 06 2026 0 1407
हुज़ैफ़ा अबरार October 22 2026 0 1309
हुज़ैफ़ा अबरार October 09 2026 0 1281
हुज़ैफ़ा अबरार October 18 2026 0 1197
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 10297
हुज़ैफ़ा अबरार October 09 2026 0 6678
एस. के. राणा February 01 2026 0 6566
एस. के. राणा January 20 2026 0 6321
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 5915
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 5782
एस. के. राणा January 13 2026 0 5334
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87666
सौंदर्या राय April 08 2022 0 35932
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38839
सौंदर्या राय April 05 2022 0 36337
लेख विभाग March 19 2022 0 35917
सौंदर्या राय March 16 2022 0 73904
कोरोना वायरस संक्रमण शरीर को तोड़ देता है। अपनी मांसपेशियों की बेहतर रिकवरी के लिए प्रोटीनयुक्त डाइट
भरवारा एसटीपी की कार्यदायी संस्था सुएज इंडिया के प्लांट इंचार्ज राजेश देशराज ने छात्रों को सीवेज ट्र
कोवैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक नियमित आधार पर डब्ल्यूएचओ को आंकड़े उपलब्ध करा रहा है और डब्ल्यूएचओ
बहराइच जिलाधिकारी डॉ दिनेश चन्द्र ने स्पष्ट निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर
लिवर प्रत्यारोपण लिवर कैंसर और हेपेटाइटिस-बी एवं सी से पीड़ित मरीजों में भी सफलतापूर्वक किया गया है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दस कर्मियों और सेवानिवृत्त कर्मियों को राज्य हेल्थ कार्ड
हिमाचल में कोरोना वायरस के साथ अब नए वायरस H3N2 इन्फ्लूएंजा ने दहशत फैला दी है। प्रदेश के स्वास्थ्य
कोरोना के नए मामलों के बीच सीएम योगी ने राज्य स्तरीय कोविड सलाहकार समिति और उच्चस्तरीय टीम-9 के साथ
लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के नेत्र विभाग में बच्चों की नेत्र समस्याओं के निदान हेतु क्लीनिक प्रारम
शिक्षा सौंदर्य बोध को विकसित करने में अहम भूमिका निभाती है। शारीरिक सुंदरता का महत्त्व तब और बढ़ जाता

COMMENTS