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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में परिवार नियोजन सेवाओं को अधिक सुलभ, आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। त्रैमासिक ‘अंतरा’ गर्भनिरोधक इंजेक्शन को अब एक नए और बेहतर रूप में प्रस्तुत किया गया है। बुधवार को ‘अंतरा सब-क्यूटेनियस (अंतरा–एससी)’ का शुभारंभ पायलट कार्यक्रम के रूप में प्रदेश के 19 चयनित जिलों में किया जायेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल परिवार नियोजन कार्यक्रम में नवाचार आधारित दृष्टिकोण को मजबूती देगी।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने कहा “अंतरा–एससी का शुभारंभ प्रदेश में परिवार नियोजन सेवाओं को नई दिशा और विस्तार देगा। अब बास्केट ऑफ़ चॉइस में 9 विकल्प उपलब्ध होंगे। यह महिलाओं के लिए अधिक सरल, सुविधाजनक और प्रभावकारी है, हमारा लक्ष्य है कि हर महिला को सुरक्षित और सुविधाजनक गर्भनिरोधक विकल्प उपलब्ध हो।
शुरुआती चरण में यह सुविधा अलीगढ़, लखनऊ, मेरठ और सहारनपुर मंडल के 19 जिलों की चयनित स्वास्थ्य इकाइयों में उपलब्ध होगी, जिससे महिलाओं को एक सरल, सुरक्षित और स्वयं-नियंत्रित गर्भनिरोधक विकल्प मिलेगा। केवल विकल्प नहीं, पहुंच और निरंतरता भी जरूरी संयुक्त निदेशक, परिवार नियोजन, डॉ. सुशील कुमार बनियान ने कहा परिवार नियोजन कार्यक्रमों की सफलता केवल विकल्प उपलब्ध कराने में नहीं, बल्कि उन्हें लोगों तक सरल और नियमित रूप से पहुंचाने में है। अंतरा–एससी इस चुनौती का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है। इसका सरल डिजाइन और स्वयं-प्रशासन की सुविधा इसकी पहुंच और निरंतरता को मजबूत करेगी।
आसान उपयोग, बेहतर अनुभव
परिवार नियोजन कार्यक्रम के महाप्रबंधक डॉ. सूर्यांशु ओझा ने बताया अंतरा–एससी एक प्री-फिल्ड, सिंगल-डोज गर्भनिरोधक इंजेक्शन है, जो एक बार लेने पर तीन माह तक प्रभावी सुरक्षा प्रदान करता है। इसे त्वचा के नीचे आसानी से लगाया जा सकता है, जिससे दर्द कम होता है। पारंपरिक अंतरा (इंट्रामस्कुलर) की तुलना में इसमें कम खुराक के साथ समान प्रभावशीलता है। उन्होंने बताया कि यह सिंगल-यूज इंजेक्शन होने के कारण संक्रमण का जोखिम नहीं रहता और यह लगभग 70% तक कम बायोमेडिकल वेस्ट उत्पन्न करता है। जिससे दूरस्थ और संसाधन-विहीन क्षेत्रों में इसकी पहुंच सुनिश्चित होगी। महिलाएं बिना बार-बार स्वास्थ्य केंद्र जाए भी इसका नियमित उपयोग जारी रख सकेंगी।
अधिक जानकारी के लिए लाभार्थी राष्ट्रीय परिवार नियोजन हेल्पलाइन (टोल-फ्री: 1800-11-6555) पर संपर्क कर सकते हैं। डॉ. ओझा ने बताया कि पहले चरण के लॉन्च की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह इंजेक्शन प्रारंभ में केवल नए लाभार्थियों को दिया जाएगा। संबंधित जिलों में चिकित्सा विशेषज्ञों, स्टाफ नर्स, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों, आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। साथ ही, राज्य स्तर से एफएलएमआईएस पोर्टल के माध्यम से इसकी आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
कार्यक्रम के रोल आउट के लिए जारी
निर्देशों के अनुसार, विभिन्न मंडलों जैसे आलीगढ़, लखनऊ, मेरठ एवं सहारनपुर के जिलों में अस्पतालों, महिला चिकित्सालयों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) हेतु राज्य मंडल और जिला स्तर के अधिकारियों का नामांकन किया गया है। उदाहरणस्वरूप राज्य स्तर से रायबरेली हेतु डॉ. सुशील कुमार बनियान (संयुक्त निदेशक, परिवार कल्याण) एवं प्रीति आनंद (प्रोजेक्ट डायरेक्टर एफपी, यूपीटीएसयू); सीतापुर हेतु मनीष सोनी (कंसल्टेंट एफपी, एसपीएमयू, एनएचएम) एवं सचिन कोठारी (डिप्टी डायरेक्टर एफपी, यूपीटीएसयू); तथा उन्नाव हेतु डॉ. सूर्यांशु ओझा (जनरल मैनेजर-एफपी, एनएचएम), अन्नू सोनकर (प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर एफपी, एसपीएमयू, एनएचएम), बृजेश कुमार (सीनियर स्पेशलिस्ट प्रोग्राम, यूपीटीएसयू), डॉ. मसूद सलीम (कंसल्टेंट एफपी, एसपीएमयू, एनएचएम) एवं संतोष सिंह (डीटीएल प्रोग्राम, यूपीटीएसयू) को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। ये अधिकारी राज्य स्तर पर अंतरा एससी कार्यक्रम के प्रभावी रोल आउट, प्रशिक्षण एवं निगरानी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इन जिलों में उपलब्ध होगा ‘अंतरा–एससी’ प्रथम चरण में यह सुविधा अलीगढ़, एटा, हाथरस, कासगंज, हरदोई, खीरी, लखनऊ, रायबरेली, सीतापुर, उन्नाव, बागपत, बुलंदशहर, गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और शामली के चयनित अस्पतालों में उपलब्ध होगी।







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