











































सांकेतित्र चित्र
शरीर में रक्त प्रवाह ठीक तरह से नहीं हो पाता है तो खून एक ही जगह पर जमा हो जाता है। इसकी वजह से उस हिस्से की नसें फूल जाती हैं और उभरी हुई नजर आती हैं। इसी स्थिति को वैरिकोज वेन्स के रूप में जाना जाता है। इसकी वजह से खासतौर पर पैरों में नीली या बैंगनी रंग की उभरी हुई नसें नजर आ सकती हैं। इसके अलावा, पैरों में जलन, दर्द ऐंठन और भारीपन आदि लक्षण भी नजर आ सकते हैं। आइए जानते हैं इन जड़ी-बूटियों के बारे में-
मुलेठी- Muleti
इसमें एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं, जो सूजन और दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसमें मौजूद गुण रक्त से विषाक्त पदार्थों को हटाते हैं और बल्ड सर्कलेशन में सुधार करते हैं। इसकी जड़ के पेस्ट में ताजा एलोवेरा जेल मिलाकर प्रभावित हिस्से पर लगाने से वैरिकोज वेंस की स्थिति में जल्द सुधार हो सकता है।
अनंतमूल- infinity
इसकी जड़ों का सेवन करने से शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं, जिससे रक्त शुद्ध होता है। साथ ही ये ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करती है। इसकी जड़ों को पीसकर प्रभावित हिस्से पर नियमित लगाने से पैरों की नीली नसों और जलन की समस्या से राहत मिल सकती है।
चिलबिल- Chilbil
यह जड़ी-बूटी एक प्राकृतिक ब्लड-प्यूरीफायर है। आयुर्वेद में इसका उपयोग त्रिदोषों से जुड़ी समस्याओं का इलाज करने के लिए किया जाता है। यह वैरिकोज नसों के कारण पैरों में रक्त के थक्कों को ठीक करने के लिए लाभकारी होती है।
परहेज- abstinence







हुज़ैफ़ा अबरार June 07 2026 0 1526
हुज़ैफ़ा अबरार June 01 2026 0 1204
हुज़ैफ़ा अबरार June 04 2026 0 987
हुज़ैफ़ा अबरार June 10 2026 0 833
हुज़ैफ़ा अबरार June 12 2026 0 784
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4438
एस. के. राणा January 20 2026 0 4312
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 4284
एस. के. राणा January 13 2026 0 4193
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 3962
एस. के. राणा February 01 2026 0 3612
एस. के. राणा February 04 2026 0 3521
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86623
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34441
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37642
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35217
लेख विभाग March 19 2022 0 34720
सौंदर्या राय March 16 2022 0 72098
आदिकाल से यह मानना है कि स्वच्छ रहने से स्वच्छ जीवन रहता है।जीवाणु गंदगी से पनपते हैं। स्वच्छ नहीं
पिछले 10 दिनों में मेरठ में कोरोना के 6 केस आ चुके हैं। बुधवार को एक साथ तीन लोगों में कोरोना संक्रम
कोरोना अभी ख़त्म नहीं हुआ है, इसलिए त्योहारों की खुशियाँ बरक़रार रखने के लिए उन जरूरी बातों का जरूर ख्
पाइल्स यानी बवासीर, जिसे हेमोरॉएड्स भी कहा जाता है। बवासीर होने पर मल द्वार या गुदा में व्यक्ति को स
शोधकर्ताओं ने बताया कि चाय पीने से डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है। निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि ''अपनी तरह की इस अनूठी सेवा की मदद से लोग हरियाली के विस्तार मे
मास्क पहनने से कोरोना, सर्दी-खांसी या किसी भी तरह का वायरस स्प्रैड नहीं होता। साइंटिस्ट का इस बारे
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि कोरोना संक्रमण कम होने का मतलब यह नहीं है कि हम सावधानी बरतना छोड़ द
सेब एक टेस्टी फल ही नहीं है, बल्कि सुंदरता के गुणों की खान भी है। सेब खाने से त्वचा की रंगत में निखा
काफी महिलाएं अपनी छोटी आंखों के कारण सही तरीके से मेकअप नहीं कर पाती हैं। आंखों को बड़ा और आकर्षक दि

COMMENTS