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लखनऊ। विश्व किडनी कैंसर दिवस पर रीजेंसी हेल्थ लखनऊ के विशेषज्ञों ने लोगों से किडनी कैंसर के चेतावनी वाले संकेतों को पहचानने और समय पर जांच करवाने की अपील की। हॉस्पिटल के यूरोलॉजिस्ट और ऑन्कोलॉजिस्ट ने कहा बीमारी के बारे में ज़्यादा जानकारी होने से लोग जल्दी इलाज करवाने के लिए प्रोत्साहित हो सकते और उनके ठीक होने की संभावना बढ़ती है। रीजेंसी हेल्थ लखनऊ के एसोसिएट डॉयरेक्टर रीनल ट्रांसप्लांट डॉ जगदीप बाल्यान ने कहा किडनी कैंसर के लक्षण शुरुआती स्टेज़ में शायद कभी दिखाई देते हैं इसी देरी की वजह से मरीज़ों को सबसे ज़्यादा नुकसान उठाना पड़ता है।
हमारे अनुभव के मुताबिक आजकल किडनी के 60 से 70 प्रतिशत ट्यूमर का पता तब चलता है जब किसी दूसरी मेडिकल समस्या के लिए इमेजिंग टेस्ट किए जाते हैं। हालांकि इससे बीमारी का पता चलने की दर में सुधार हुआ है, फिर भी कई मरीज़ हॉस्पिटल में तक पहुँचते हैं जब ट्यूमर काफी बढ़ चुका होता है। जो मरीज़ लगातार दिख रहे लक्षणों की तुरंत जाँच करवाते हैं, उनके पास इलाज के ज़्यादा विकल्प होते और वे आसानी से ठीक हो पाते हैं। बीमारी के बढ़ने से पहले मरीज़ डॉक्टर से मदद ले इसके लिए जरूरी है कि लोगों के बीच जागरूकता बढ़े। डॉक्टर ने कहा किडनी कैंसर को सायलेंट बीमारी कहा जाता है क्योंकि यह वर्षों तक बिना किसी ख़ास लक्षण के बढ़ती रहती है। इस वजह से कई मरीज़ ट्यूमर के एडवांस स्टेज में पहुँचने के बाद ही इलाज़ कराते हैं, जिससे इलाज और मुश्किल हो जाता है।
दुनिया भर में किडनी कैंसर तेज़ी से बढ़ने वाले यूरोलॉजिकल कैंसर में से एक बना हुआ है। GLOBOCAN 2022 के ताज़ा अनुमानों के अनुसार दुनिया भर में किडनी कैंसर के लगभग 434,840 नए मामले सामने आए, जिससे यह दुनिया का 14वां सबसे ज्यादा होने वाला कैंसर बन गया है। मेडिकल एक्सपर्ट्स ने भारत में भी इसके मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी है। इसका कारण मोटापा बढ़ना हाई ब्लड प्रेशर तंबाकू का इस्तेमाल और डायग्नोस्टिक इमेजिंग की बेहतर सुविधाएँ हैं। इस ट्रेंड ने स्पेशलिस्ट्स की चिंता बढ़ा दी है कि डायग्नोस्टिक क्षमताओं में सुधार के बावजूद कई मरीज़ों में बीमारी काफ़ी एडवांस्ड अवस्था में बढ़ चुकी होती है।
रीजेंसी हेल्थ लखनऊ के डॉक्टरों ने ज़ोर दिया कि कुछ लक्षणों को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, जैसे यूरिन में खून आना, कमर के निचले हिस्से में लगातार दर्द, बिना किसी वजह के वज़न कम होना, थकान और भूख न लगना आदि। जिन लोगों को स्मोकिंग मोटापा हाइपरटेंशन और किडनी की बीमारी परिवार में रही हो, उन्हें खास तौर पर सावधान रहना चाहिए और नियमित हेल्थ चेकअप करवाना चाहिए। विशेषज्ञों ने कहा कि मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल तकनीक में तरक्की से अब किडनी के काम को बनाए रखते हुए प्रभावी इलाज मुमकिन हो गया है और कई मरीज़ों को तेज़ी से ठीक होने में मदद मिल रही है।
किडनी कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए रीजेंसी हेल्थ लखनऊ ने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और जोखिम फैक्टर को नियंत्रित करके किडनी की सेहत के प्रति जागरूक रहने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू का सेवन कम करना या छोड़ना, स्वस्थ वजन बनाए रखना, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना और किसी भी लगातार बने रहने वाले लक्षण पर समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखने और बीमारी के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।







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